
सोमवार, 14 सितंबर 2026
Liveकटिहार : बड़ी खबर कटिहार से है जहां नॉर्थ ईस्ट एक्स्प्रेस ट्रेन से 4 विदेशी नागरिक को रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी ने संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है.बताया जा रहा है कि म्यांमार के नागरिक मुहम्मद नूर आलम को गिरफ्तार किया गया है जबकि तीन नाबालिग लड़कियों को निरुद्ध किया गया है.पकड़े गए संदिग्ध विदेशी कामाख्या से जम्मू जा रहा था.गिरफ्तार विदेशी नागरिक के पास पासपोर्ट प्रवास का कोई वैध कागजात नहीं मिला.आरपीएफ ने गिरफ्तार म्यांमार के नागरिक के पास से मोबाइल सहित भारतीय और बांग्लादेशी मुद्रा बरामद किया.अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करने को लेकर रेल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है.कटिहार से रितेश कुमार की रिपोर्ट-
खगड़िया: बड़ी खबर बिहार के खगड़िया से है जहां भरतखण्ड सहायक थाना इलाके के भरसो गांव के बंधकट्टा में बाढ़ के पानी में दो सगे भाई डूब गए. दोनों सगे भाई अब तक लापता बताये जा रहे हैं. लापता दोनों बच्चों की तलाश जारी है. बाढ़ के पानी में नहाने के दौरान हादसा हुआ है.
पटना:बिहार लोक भवन में हाईकोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस वी.कामेश्वर राव का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया. राज्यपाल ने जस्टिस वी.कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पद की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह मेंमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मौजूद रहे. उन्होंने चीफ जस्टिस वी. कामेश्वर राव को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं. इस दौरान बिहार सरकार के अधिकारी और कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे. शपथ ग्रहण के साथ ही जस्टिस वी.कामेश्वर राव पटना हाईकोर्ट के 49वें चीफ जस्टिस के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे. इस समारोह को बिहार की न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है.सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में दिल्ली हाईकोर्ट के जज वी.कामेश्वर राव के नाम की अनुशंसा की थी. सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने 6 अगस्त, 2026 की एक बैठक में इनके नाम की अनुशंसा की थी.इससे पूर्व पटना हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस मीनाक्षी मदन राय 11 जुलाई,2026 को सेवानिवृत्त हुई. उसके बाद से वरीय जज जस्टिस सुधीर सिंह एक्टिंग चीफ जस्टिस के रूप में कार्य कर रहे हैं.इनका जन्म 7 अगस्त,1965 को हुआ था.1987 में उन्होनें दिल्ली विश्वविद्यालय से भूगोल में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. 1990 में दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की.दिल्ली बार काउंसिल में मार्च, 1991 में उन्होनें स्वयं को निबंधित कराया।सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट, कैट समेत कई अन्य अदालतों में 20 बरसों तक प्रैक्टिस किया।2010 में उन्हें सीनियर एडवोकेट बनाया गया.उन्हें सेवा मामलों, श्रम कानून, संवैधानिक, प्रशासनिक व मध्यस्थता मामलों में विशेषज्ञता प्राप्त रही.17 अप्रैल, 2013 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का एडीशनल जज नियुक्त किया गया.18 मार्च, 2015 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में स्थायी जज बनाया गया. 2024 में उनका स्थानांतरण कर्नाटक हाईकोर्ट हुआ. मई,2025 में उन्होनें वहां एक्टिंग चीफ जस्टिस के रूप में कार्य किया. पुनः जुलाई, 2025 वे दिल्ली हाईकोर्ट के जज के रुप वापस आये.उन्हें अब पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया हैं.
पटना: किशोर न्याय व्यवस्था को अधिक बाल-अनुकूल,संवेदनशील और पुनर्वास केंद्रित बनाने के लिए मौजूदा कानून के साथ इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. सिर्फ कानून का होना पर्याप्त नहीं होता है,इसका प्रभावी और क्रियान्वयन भी जरूरी है. परिवार और समुदाय आधारित देखभाल,विशेषज्ञों के मूल्यांकन,गैर-हिरासत उपायों और अपराध की रोकथाम को मजबूत करना होगा. यह बात सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली ने शनिवार को ज्ञान भवन में किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम,2015 के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित राज्यस्तरीय परामर्श कार्यक्रम में कही. पटना उच्च न्यायालय,समाज कल्याण विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में न्यायमूर्ति पंचोली ने कहा कि संस्थागत देखभाल अपने आप में पुनर्वास नहीं है. बच्चे की जरूरत के अनुरूप शिक्षा,चिकित्सा,मनोवैज्ञानिक सहायता,परिवार में पुनर्स्थापना और कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था जरूरी है. दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षक,सांकेतिक भाषा के दुभाषिए और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने जोर दिया. साथ ही,किशोर न्याय अधिनियम की धारा-15 के तहत बहु-विषयक प्रारंभिक मूल्यांकन को प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई.बच्चों के अतीत से उसके भविष्य को तय नहीं करेंपटना उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर सिंह ने कहा कि किशोर न्याय व्यवस्था में आने वाला हर बच्चा अपने साथ एक भविष्य लेकर आता है. उसका अतीत उसके भविष्य को तय न करे,यह सुनिश्चित करना जरूरी है.बिहार में 23 प्रेक्षण गृह,पांच सुरक्षित स्थानकिशोर न्याय निगरानी समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि बिहार में 23 प्रेक्षण गृह और पांच सुरक्षित स्थान कार्यरत हैं. किशोर न्याय बोर्डों के प्रधान दंडाधिकारियों के लिए तीन वर्ष का निश्चित कार्यकाल और आठ दिवसीय अनिवार्य प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है. अप्रैल 2015 से जुलाई 2024 तक राज्य में 1,403 बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी हुई है.लापता और अपहृत बच्चों की बरामदगी पर विशेष जोरडीजीपी विनय कुमार ने लापता,अपहृत और मानव तस्करी के शिकार बच्चों की बरामदगी को बड़ी चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि 2025 में एनसीआरबी के अनुसार राज्य में 14,699 बच्चों के लापता या अपहृत होने के मामले दर्ज हुए,जिनमें 52 प्रतिशत की बरामदगी हो सकी. उन्होंने शुरुआती 3 से 24 घंटे में कार्रवाई,पुलिस,परिवार और स्कूल के बेहतर समन्वय और वात्सल्य पोर्टल पर बच्चों का विवरण समय पर अपलोड करने पर जोर दिया.संस्थागत देखभाल अंतिम विकल्प हो: यूनिसेफयूनिसेफ चीफ मोनिका एन. नीलसन ने कहा कि किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को दंडित करना नहीं,बल्कि उन्हें संरक्षण,पुनर्वास और बेहतर भविष्य का अवसर देना है. उन्होंने परिवार आधारित देखभाल,स्पॉन्सरशिप और फॉस्टर केयर को बढ़ावा देने तथा संस्थागत देखभाल को अंतिम विकल्प बनाने पर जोर दिया.तकनीकी सत्र में किशोर न्याय से जुड़े मुद्दों पर मंथनकार्यक्रम के दौरान आयोजित तकनीकी सत्र में किशोर न्याय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई. बाल संरक्षण,पुनर्वास,सामाजिक पुनर्समावेशन,परिवार आधारित देखभाल,लापता बच्चों की बरामदगी,गैर-हिरासत आधारित उपाय,संस्थागत देखभाल,केस मैनेजमेंट और बच्चों के सर्वोत्तम हित जैसे विषयों पर विशेषज्ञों और संबंधित पदाधिकारियों ने विचार साझा किए. चर्चा में व्यवस्था को अधिक प्रभावी,संवेदनशील और बाल-अनुकूल बनाने के उपायों पर भी मंथन हुआ. कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारी,समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी,विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारी,बाल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ,यूनिसेफ के प्रतिनिधि तथा किशोर न्याय व्यवस्था से जुड़े अन्य हितधारक मौजूद रहे.
रांची : प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के प्रथम घटक लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण (BLC)के तहत चयनित लाभुकों को रांची नगर निगम की ओर से स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया. नगर निगम कार्यालय में आयोजित स्वीकृति पत्र वितरण कार्यक्रम में मेयर रोशनी खलखो और डिप्टी मेयर नीरज कुमार ने 34 चयनित लाभुकों को व्यक्तिगत आवास निर्माण के लिए सांकेतिक रूप से स्वीकृति पत्र प्रदान किया. शेष चयनित लाभुकों को उनके संबंधित वार्ड पार्षद के माध्यम से स्वीकृति पत्र उपलब्ध कराया जाएगा.यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र शहरी परिवारों को स्वयं का पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिससे लाभुकों के आवास संबंधी सपने को साकार करने में सहायता मिलेगी और उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्चित होगी. वित्तीय वर्ष 2025_26 और 2026_27 के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के लिए अब तक कुल 2,896 लाभुकों का चयन किया जा चुका है. इस मौके पर विभिन्न वार्डों के पार्षद, सहायक नगर आयुक्त, CLTC, नगर प्रबंधक समेत रांची नगर निगम के पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित थे.रांची से राजेश पाठक की रिपोर्ट--
रांची: झारखंड मेंJSSC-CGLके चयनित अभ्यर्थियों ने रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि वे वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं,लेकिन उन पर पैसे देकर नौकरी हासिल करने के आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ भीड़ तंत्र के वजह से एग्जाम कैंसिल करना गलत है,अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने किसी तरह की गड़बड़ी या पैसे के बल पर नौकरी हासिल नहीं की है,बल्कि सालों तक पढ़ाई और मेहनत करने के बाद उनका चयन हुआ है. उन्होंने कहा कि वे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं,ऐसे में 35 से 40 लाख रुपये देकर नौकरी हासिल करने का आरोप पूरी तरह गलत है.चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए,उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. लेकिन सभी चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी रद्द कर देना न्यायसंगत नहीं है. उनका कहना है किCIDमामले की जांच कर रही है और कोर्ट भी पूरे मामले को देख रहा है,इसलिए जांच के आधार पर दोषियों को सजा मिलनी चाहिए.प्रेस वार्ता के दौरान कुछ अभ्यर्थी भावुक भी हो गए. उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद का असर सिर्फ उन पर नहीं,बल्कि उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है. उनका कहना था कि जिन लोगों ने आंदोलन किया है,वे उनके साथ हैं,लेकिन निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना सही नहीं है. एक चयनित अभ्यर्थी ने भावुक होते हुए कहा कि उन पर 35 से 40 लाख रुपये देकर नौकरी लेने का आरोप लगाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वे आदिवासी और गरीब परिवार से आते हैं और उनकी मां घर पर रहती हैं. ऐसे में इतना पैसा जुटाकर नौकरी लेना उनके लिए संभव ही नहीं है. अभ्यर्थी ने यह भी बताया कि कोर्ट के फैसले के बाद उनकी नौकरी लगी थी. उन्होंने कहा कि पहले वेITBPमें काम करते थे और नौकरी लगने के बाद उन्होंने वहां की नौकरी छोड़ दी. अब अगरJSSC CGLकी नौकरी भी चली जाती है तो उनके सामने भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा.चयनित अभ्यर्थियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो,दोषियों पर कार्रवाई हो,लेकिन बिना दोष साबित हुए सभी चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना नहीं चाहिए.
पटना: साइबर धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे अवैध सिम बॉक्स संचालन के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानीCBIने बड़ी कार्रवाई की है. सीबीआई ने बिहार के वैशाली और ओडिशा के जगसिंहपुर जिले में 10 स्थानों पर तलाशी ली. इस दौरान एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है.सीबीआई के अनुसार,महुआ,वैशाली के एक एयरटेल एरिया डिस्ट्रीब्यूटर की भूमिका बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी करने और उन्हें कथित तौर पर अवैध सिम बॉक्स संचालन में इस्तेमाल के लिए आगे भेजने के मामले सामने आई है. इसी आधार पर डिस्ट्रीब्यूटर को गिरफ्तार किया गया है.यह मामला मूल रूप से बिहार के सुपौल जिले में सामने आए अवैध सिम बॉक्स संचालन से जुड़ा है. जांच के दौरान उस घर से 1300 से अधिक सिम कार्ड बरामद किए गए थे,जहां कथित तौर पर सिम बॉक्स संचालित किया जा रहा था.सीबीआई के मुताबिक,इन सिम कार्ड से जुड़े डेटा के विश्लेषण में देशभर में साइबर अपराध के कम से कम 73 मामलों से कनेक्शन सामने आया है. इनमें डिजिटल अरेस्ट के जरिए की गई ठगी के मामले भी शामिल हैं.जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश सिम बिहार और ओडिशा से जारी किए गए थे. सीबीआई का आरोप है कि वैशाली में सिम बिक्री केंद्रों यानीPoSके क्रेडेंशियल्स का कथित दुरुपयोग किया गया. कुछ ग्राहकों ने बताया कि उनके नाम पर सिम जारी होने की उन्हें जानकारी नहीं थी.तलाशी में मोबाइल फोन,लैपटॉप और सिम कार्ड समेत कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं. सीबीआई ने कहा है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. एजेंसी ने लोगों को डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी से सतर्क रहने की सलाह दी है.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--
पटना : शहर को सुगम,सुरक्षित और जाम-मुक्त बनाने के उद्देश्य से पथ निर्माण विभाग ने यातायात प्रबंधन को लेकर बड़ी पहल शुरू की है. विश्वेश्वरैया भवन स्थित पथ निर्माण विभाग के सभागार में‘यातायात जाम के प्रबंधन एवं समाधान’विषय पर उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने की.कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने पटना की भौगोलिक संरचना,बढ़ती आबादी,वाहनों के दबाव,अतिक्रमण और यातायात नियमों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की. शहर के डाक बंगला,पटना जंक्शन रोड,जीपीओ गोलंबर,एग्जीबिशन रोड,बोरिंग रोड,गांधी मैदान,पीएमसीएच,अशोक राजपथ,सगुना मोड़,अनीसाबाद और बेली रोड जैसे प्रमुख इलाकों में यातायात दबाव को लेकर भी मंथन किया गया.इस दौरान‘Mission Sugam Patna’के तहतAI,डेटा एनालिटिक्स और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का प्रस्ताव रखा गया.AIआधारित मॉडल से संभावित ट्रैफिक जाम का30से60मिनट पहले पूर्वानुमान लगाने और स्थिति के अनुसार सिग्नल तथा डायवर्जन को समायोजित करने की योजना पर चर्चा हुई.ई-रिक्शा और ऑटो के अनियंत्रित ठहराव को रोकने के लिए जियोफेंसिंग,वर्चुअल स्टैंड और शेड्यूलिंग व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है. दुर्घटना कीAIसे पहचान,नजदीकी एंबुलेंस को अलर्ट और ग्रीन कॉरिडोर के जरिए त्वरित अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई.बारिश और जलजमाव के दौरान प्रभावित मार्गों की अग्रिम जानकारी देकर ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट करने की योजना भी प्रस्तावित है. साथ हीICCCके मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर इंटेलिजेंस लेयर लागू करने पर विचार किया गया. आगे ठोस और क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना तैयार की जाएगी.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना: स्वास्थ्य सचिव-सह-खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के खिलाफ राज्य में जांच और कार्रवाई तेज कर दी गई है.इसी क्रम में पटना, हाजीपुर और दरभंगा में खाद्य सुरक्षा टीमों ने विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया.वैशाली जिले के हाजीपुर स्थित स्टेशन रोड में जांच के दौरान दो प्रतिष्ठानों से कुल72किलो पनीर बरामद किया गया.प्रारंभिक जांच में पनीर में स्टार्च की मौजूदगी पाई गई.इसके बाद संबंधित पनीर को नियमानुसार नष्ट कराया गया.नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं.रिपोर्ट आने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी.दरभंगा के बेनीपुर स्थित आशापुर चौक के सुधा मिल्क पार्लर की जांच में21लीटर एक्सपायर्ड दूध और18किलो खराब पनीर पाया गया.खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप दोनों खाद्य सामग्रियों को मौके पर ही नष्ट कराया गया.यहां से भी आवश्यक नमूने संग्रहित किए गए हैं.पटना के फतुहा क्षेत्र में सबलपुर स्थित राजीव डेयरी की जांच के दौरान दूध के नमूने में फॉर्मेलिन की मौजूदगी पाई गई.इसके बाद करीब126लीटर दूध नष्ट कराया गया.मामले में आवश्यक नमूने लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है.वहीं, फतुहा के बाजितपुर स्थितAlexa Foods and Supplements में खाद्य सुरक्षा विभाग, औषधि निरीक्षक, आयुष निदेशालय और पुलिस की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया.परिसर सेFood Supplements और संबंधित सामग्री के छह नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए.इसके अलावा पटना स्थित संतुष्टि स्वीट्स और उसकी विनिर्माण इकाई का भी औचक निरीक्षण किया गया.विभाग के अनुसार, अंतिम निष्कर्ष प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट होगा और उसी के अनुरूप आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
गयाजी : पितृपक्ष महासंगम 2026 को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से गया नगर निगम की ओर से स्वच्छता एवं जागरूकता रैली निकाली गई. विष्णुपद मंदिर परिसर से निकली रैली को मेयर डॉ. वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान, जिलाधिकारी शशांक शुभांकर, नगर आयुक्त डॉ. गगन कुमार और सशक्त स्थायी समिति के सदस्य डॉ. अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.रैली में जनप्रतिनिधियों, वार्ड पार्षदों, पंडा समाज के प्रतिनिधियों और नगर निगम के पदाधिकारी-कर्मियों ने भाग लिया. मेयर, डीएम और अन्य जनप्रतिनिधियों ने खुद सड़क पर झाड़ू लगाकर लोगों को स्वच्छता का संदेश दिया.इस दौरान लोगों से अपील की गई कि पितृपक्ष के दौरान सड़क या खुले स्थान पर कचरा न फेंकें और निर्धारित स्थान पर ही कचरा डालें. नगर निगम ने पूरे पितृपक्ष मेला क्षेत्र को नो प्लास्टिक जोन घोषित किया है,साथ ही मेला क्षेत्र में नशे के सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.मेयर गणेश पासवान ने कहा कि स्वच्छता केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं,बल्कि आम नागरिकों,दुकानदारों और श्रद्धालुओं की भी सामूहिक जिम्मेदारी है. वहीं मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि जनभागीदारी से ही स्वच्छ गयाजी का अभियान सफल होगा.गयाजी से प्रदीप कुमार सिंह की रिपोर्ट--
रांची : एचईसी प्रबंधन (HEC)ने एक बार फिर एचईसी क्षेत्र में अवैध रूप से बसे 32 बस्तियों को खाली करने का निर्देश दिया है. एचईसी प्रबंधन के इस निर्देश के बाद 32 बस्तियों में रहने वाले लोग आक्रोशित हैं. शनिवार को बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में संबंधित बस्तियों में रहने वालों ने एचईसी मुख्यालय का घेराव कर प्रदर्शन भी किया. हालांकि पुलिस-प्रशासन ने उन्हें स्मार्ट सिटी के समीप ही रोक दिया.पुलिस-प्रशासन की पहल पर एचईसी मुख्यालय की ओर से बस्ती बचाओ संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया. मोर्चा की ओर से वार्ता में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को भेजने की तैयारी की गई थी, लेकिन एचईसी प्रबंधन की ओर से मात्र 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को ही वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया. बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक मिंटु पासवान ने कहा कि सात सितंबर को एचईसी प्रबंधन की ओर से नोटिस जारी किया गया है, जिसमें एचईसी क्षेत्र स्थित सभी दुकान, मकान और बस्ती वासियों को बेघर करने की तैयारी की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि एचईसी प्रबंधन को साल 2005 से ही बार-बार कहा जा रहा है कि वे अपने उत्पादन पर ध्यान दें. एचईसी प्रबंधन की ओर से कर्मियों को पिछले 37 महीने से बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है. फिर भी एचईसी प्रबंधन की ओर से कर्मियों पर ध्यान न देकर गरीब बस्ती वासियों को परेशान किया जा रहा है.जमीन एचईसी की है,लेकिन 32 बस्तियों में रहने वाले लोग पिछले 50-60 वर्षों से अपना आशियाना बनाकर रह रहे हैं. सिर्फ यही नहीं,होल्डिंग टैक्स,जल कर और बिजली बिल का भी भुगतान कर रहे हैं. इसके बावजूद बार-बार उजाड़ने का प्रयास किया जा रहा है. आज एचईसी प्रबंधन और सरकार उद्योगपतियों को बसाने के लिए बस्ती वासियों को उजाड़ने पर आमादा है. एचईसी प्रबंधन की ओर से जिन बस्ती वासियों को नोटिस दिया गया है,उनमें बाइपास,सुंदरनगर,जगन्नाथपुर,न्यू कॉलोनी,सेक्टर-1 मार्केट,गायत्री नगर,पटेल नगर,मामा नगर समेत कुल 32 बस्ती शामिल हैं.रांची से राजेश पाठक की रिपोर्ट-
कटिहार : कुरसेला प्रखंड में बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच बच्चों की जरूरतों को लेकर प्रकाशित खबर का बड़ा असर देखने को मिला है. खबर सामने आने के बाद कटिहार के जिला पदाधिकारी ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक निर्देश दिए.जिला पदाधिकारी के निर्देश के बाद कुरसेला की अंचल पदाधिकारी अनुपम के नेतृत्व में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में0से6वर्ष तक के बच्चों के लिए दो समय दूध वितरण की व्यवस्था शुरू की गई. इससे बाढ़ के बीच राहत शिविरों और ऊंचे स्थानों पर रह रहे छोटे बच्चों के परिवारों को काफी राहत मिली है.प्रशासन की इस पहल से प्रभावित परिवारों ने राहत की उम्मीद जताई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था बेहद जरूरी थी. खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई किए जाने से लोगों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है.कटिहार से रितेश रंजन की रिपोर्ट-
बोधगया: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 को लेकर नगर परिषद बोधगया की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई है.इसी कड़ी में बोधगया के निगमा मॉनेस्ट्री के आसपास सड़क किनारे किए गए अवैध अतिक्रमण पर नगर परिषद की ओर से बुलडोजर चलाया गया.अतिक्रमण हटाकर श्रद्धालुओं के आने-जाने का रास्ता साफ कराया गया.दरअसल,पितृपक्ष मेला के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में पिंडदानी गया पहुंचते हैं.श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए गया जिले में 44 आवासन स्थल बनाए गए हैं.इनमें बोधगया के निगमा मॉनेस्ट्री में करीब 2400 तीर्थयात्रियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है.ऐसे में मॉनेस्ट्री के आसपास अतिक्रमण के कारण श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो,इसे लेकर नगर परिषद ने कार्रवाई शुरू की है.नगर परिषद की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण को हटाया और इलाके को अतिक्रमणमुक्त कराया.प्रशासन का कहना है कि पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.बोधगया से मनोज सिंह की रिपोर्ट --
सीतामढ़ी: बड़ी खबर बिहार के सीतामढ़ी से है जहां डुमरा थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह जिला पार्षद प्रतिनिधि बैद्यनाथ महतो की गोली मारकर हत्या कर दी गई. बैद्यनाथ महतो जिला परिषद क्षेत्र संख्या-13की पार्षद खुशदिल देवी के पति थे.बताया जा रहा है कि वह सुबह टहलने के लिए निकले थे. इसी दौरान पथरिया श्मशान घाट के पास बाइक सवार चार अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. करीब आठ गोलियां लगने से बैद्यनाथ महतो की मौके पर ही मौत हो गई.हत्या की खबर फैलते ही इलाके में आक्रोश फैल गया. बड़ी संख्या में ग्रामीण घटना स्थल पर जुट गए और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ विरोध जताने लगे. आक्रोशित लोगों ने हत्या के आरोपित बताए जा रहे गांव के ही एजाज के घर में आग लगा दी.स्थिति को नियंत्रित करने के लिए12थानों की पुलिस मौके पर पहुंची. एसपी अमित रंजन और एसडीएम ने भी घटना स्थल पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया. इसी दौरान ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया. पथराव में इंस्पेक्टर अनिल राम और ट्रैफिक थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार के सिर में चोट लगी. दो दरोगा को भी ग्रामीणों ने मौके से खदेड़ दिया.उग्र भीड़ ने पुलिस की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की. करीब छह वाहन क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है. घटना के बाद डुमरा थाना और सीतामढ़ी समाहरणालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.बताया जा रहा है कि शराब कारोबार के विरोध और शराब कारोबारी के खिलाफ शिकायत को लेकर बैद्यनाथ महतो का विवाद चल रहा था. इसी विवाद को हत्या की वजह माना जा रहा है. पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है. इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.संजय कुमार की रिपोर्ट--
रामगढ़ : सुप्रीम कोर्ट के जज एवं झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस चंद्रशेखर ने शनिवार को रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर पहुंचे. वहां उन्होंने मंदिर में पूजा अर्चना की और मां से आशीर्वाद मांगे. मंदिर परिसर में उपायुक्त ऋतुराज और पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुनायत ने उन्हें बुके देकर स्वागत किया. वहीं पुलिस जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया.सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस चंद्रशेखर का मां छिन्नमस्तिका मंदिर के वरिष्ठ पुजारी सोनू बाबा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनकी विशेष पूजा-अर्चना कराई. जस्टिस चंद्रशेखर ने मां के दरबार में मत्था टेक कर देश-प्रदेश की सुख-शांति की कामना की. वो मूल रूप से रांची के हैं और 2 जून 2026 से सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में हैं.रामगढ़ से मुकेश कुमार की रिपोर्ट-
कटिहार : जिले के कुरसेला गंगा-कोसी की बाढ़ ने कुरसेला प्रखंड के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों की जिंदगी त्रासदी में बदल दिया है. घरों में बाढ़ का पानी घुसने के बाद लोग अपने ही घरों से बेघर हो गए हैं. कोई सड़क किनारे, कोई पुल-पुलिया पर, कोई बांध और रेलवे ढाला के आसपास तो कोई माल गोदाम में छोटे-छोटे बच्चों को लेकर शरण लेने को मजबूर हैं. सिर छिपाने के लिए जगह तो मिल गई, लेकिन बच्चों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही है. सबसे ज्यादा परेशानी उन माताओं की है, जिनकी गोद में दूधमुंहे बच्चे हैं.माल गोदाम और राहत शिविरों में रह रहे दर्जनों छोटे बच्चों के लिए दूध का इंतजाम नहीं होने से माताएं परेशान हैं. उनका कहना है कि गांव में बच्चे रोज दूध पीते थे, लेकिन बाढ़ के कारण घर छूटने के बाद बच्चों के लिए दूध तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलने वाली सेवाएं भी बाढ़ प्रभावित परिवारों तक नहीं पहुंच पा रही हैं. माल गोदाम में शरण लिए महिलाओं की आंखों में बाढ़ की बेबसी साफ दिखाई देती है.बिंदटोली निवासी पिंकी देवी, पूजा कुमारी, अंजली देवी और चांदनी देवी ने बताया कि वे करीब एक सप्ताह से अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ यहां शरण लेकर रह रही हैं. घर में पानी भर गया है, इसलिए वापस लौटने की स्थिति में नहीं हैं. किसी तरह बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए माल गोदाम में ठिकाना बनाया है. लेकिन बच्चों के लिए दूध नहीं मिल रहा है. महिलाओं ने अपनी स्थानीय भाषा में अपनी पीड़ा बताते हुए कहा, "शिविर में बच्चा के दूध नइ मिलै छै. दूध नइ पिला पाने पर बच्चा कानै छै, कैसे बच्चा पालियै बाबू..." यह कहते-कहते कई महिलाओं की आंखें नम हो गई. उनका कहना था कि बच्चे दूध पीने के आदी हैं. अचानक दूध बंद हो जाने से बच्चे बार-बार रोते हैं. मां उन्हें चुप कराने की कोशिश करती हैं, लेकिन जब उनके पास देने के लिए दूध ही नहीं होता तो उनकी बेबसी और बढ़ जाती है.पिंकी देवी नामक महिला ने बताया कि घर में बाढ़ का पानी आने के बाद बच्चों को लेकर सुरक्षित जगह की तलाश में यहां आना पड़ा है. पहले घर में रहते हुए बच्चों के खाने-पीने की व्यवस्था किसी तरह हो जाती थी, लेकिन अब सब कुछ राहत और दूसरों की मदद पर निर्भर हो गया है. उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए भोजन के साथ दूध की भी व्यवस्था होनी चाहिए.बाढ़ के बीच छोटे बच्चों के साथ खुले या अस्थायी ठिकानों में रह रही माताओं की मुश्किल केवल आंगनबाड़ी की नियमित सेवाएं प्रभावित होने से बच्चों को मिलने वाली पोषण संबंधी सुविधाएं भी बाधित हैं.बाढ़ ने इन परिवारों से उनका घर, सामान और रोजमर्रा की जिंदगी छीन ली है. अब उनकी सबसे छोटी जरूरत भी बड़ी समस्या बन गई है. माल गोदाम में बैठी एक मां अपने रोते बच्चे को गोद में लेकर बस यही चाहती हैं कि किसी तरह उसे एक गिलास दूध मिल जाए. उसके लिए इस समय यही सबसे बड़ी राहत है.कटिहार से रितेश रंजन की रिपोर्ट--
Patna : पटना हाईकोर्ट ने 81 आयुद्ध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि 11 साल तक आवेदक सोते रहे और अब दूसरे मामले में फैसला आने के बाद जगे हैं,तो ऐसे लोगों को राहत नहीं दी जा सकती. जस्टिस रितेश कुमार की एकलपीठ ने प्रदीप राम एवं अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद इन्हें रद्द कर दिया.2014 में 181 आर्मरर सिपाही पदों के लिए लिखित परीक्षा ली गई. जिसमें 213 अभ्यर्थी शामिल हुए. रोस्टर के तहत 132 का चयन हुआ और 81 रोस्टर क्लीयरेंस के कारण छूट गए. बिहार पुलिस मेन्स एसोसिएशन की आपत्ति पर डीजीपी ने गृह विभाग से मार्गदर्शन मांगा.गृह विभाग ने पत्र संख्या 1550 जारी कर कहा कि यह सीधी नियुक्ति या प्रोन्नति नहीं है,इसलिए रोस्टर क्लीयरेंस की जरूरत नहीं हैं. जिसके बाद शेष 81 को भी नियुक्त कर वरीयता सूची जारी कर दी गई.आवेदकों का कहना था कि हाई कोर्ट ने एक अन्य मामले में माना है कि आर्मरर चयन में रोस्टर लागू होगा और 231 अभ्यर्थियों का चयन रद्द कर दिया गया,तो उनके मामले में भी वहीं सिद्धांत लागू होगी.वहीं राज्य सरकार का कहना था कि 81में से एक भी आयुद्ध सिपाही को इस केस में पक्षकार नहीं बनाया गया है,जिनकी इस केस के फैसला से नौकरी पर असर पड़ेगा. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि विलंब,लैचेज और पक्षकार नहीं बनाये जाने के आधार पर याचिका रद्द करने योग्य है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 11 वर्षो तक चुनौती नहीं देना,सहमति माना जाएगा.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
Patna : पटना हाईकोर्ट ने कोविड-19से मौत के मामले में तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकने को गलत करार दिया है. कोर्ट ने कहा कि अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र एक विश्वसनीय सबूत होता है. सिर्फ आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं होने पर विधवा का हक नहीं छीना जा सकता.जस्टिस आलोक कुमार की एकलपीठ ने आशा देवी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका के पति अजय कुमार शर्मा की मृत्यु21मई, 2021को मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान हो गई थी.अस्पताल के मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोविड-19दर्ज है. उनका कहना था कि जिला प्रशासन ने मेमो संख्या299दिनांक20.03.2023में उनके पति का नाम कोविड मृतकों की सूची में रखा और राशि भी आवंटित की, लेकिन भुगतान नहीं किया गया.मृतक की पत्नी ने आपदा प्रबंधन के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग और मुंगेर डीएम को विस्तृत अभ्यावेदन दिया. लेकिन तीन सदस्यीय जिला स्वास्थ्य समिति ने आरटी पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने का हवाला दे आवेदिका के दावा को रद्द कर दिया.जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी पत्र संख्या186(11) दिनांक09.03.2022में स्पष्ट किया गया है कि पोर्टल पर अपलोड न होना या टेस्ट रिपोर्ट के अभाव में किसी को मुआवजे से वंचित करने का आधार नहीं होगा.कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोविड सर्टिफिकेट या टेस्ट रिपोर्ट नहीं होना, निर्णायक नहीं हो सकता है. जब अस्पताल का प्रमाण पत्र और जिला स्तरीय स्वीकृत सूची में मृतक का नाम शामिल है, तो सिर्फ तकनीकी आधार पर राशि नहीं देना कानून गलत है.कोर्ट ने अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार कर बिहार कोविड सहायता योजना2022 के तहत अनुग्रह राशि का भुगतान करने का आदेश दिया.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई यानीSVU ने बड़ी कार्रवाई की है. लघु जल संसाधन विभाग, छपरा अंचल के अधीक्षण अभियंता राजेन्द्र कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में केस दर्ज कर छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई.SVU के मुताबिक, प्राथमिकी में राजेन्द्र कुमार के पास3करोड़1लाख87हजार108रुपये की अप्रत्यानुपातिक संपत्ति होने का प्रथम दृष्टया खुलासा हुआ है.पटना, छपरा, गोपालगंज और मुंबई में हुई तलाशी के दौरान3करोड़34लाख57हजार रुपये की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. इनमें जमीन, फ्लैट और मकान शामिल हैं. मुंबई के पनवेल में1करोड़61लाख रुपये की जमीन का दस्तावेज भी मिला है. वहीं पटना के बेउर में दो मंजिला मकान समेत कई भूखंडों का पता चला है.तलाशी के दौरान1 लाख96 हजार रुपये नकद और करीब76 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं. सोनपुर में18 लाख के प्लॉट और39 लाख रुपये के भुगतान की रसीद भी मिली है.SVU के अनुसार, तलाशी में प्राथमिकी में दर्ज संपत्ति से भी अधिक साक्ष्य मिलने की संभावना है. जांच जारी है.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--