पटना:बिहार में अनुसूचित जाति के आरक्षण की समीक्षा और उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर एनडीए के भीतर सियासी घमासान बढ़ता जा रहा है. केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के आरक्षण में वर्गीकरण की मांग के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने उन पर तीखा हमला बोला है.
जमुई सांसद अरुण भारती ने मांझी पर दलित समाज को बांटने और कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिहार में दलित और महादलित का वर्गीकरण वर्ष 2007 में ही शुरू हो चुका है। महादलित वर्ग में मुख्य रूप से मुसहर और भुइयां जैसे समुदाय शामिल हैं। ऐसे में 19 साल बाद इन समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में कितना बदलाव आया, इसका जवाब मांझी को देना चाहिए।
अरुण भारती ने कहा कि मांझी बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और लंबे समय तक एससी-एसटी कल्याण विभाग भी उनके परिवार के पास रहा। इसके बावजूद यदि मुसहर और भुइयां समुदाय की सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी महज 0.3 प्रतिशत बताई जा रही है, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने मांझी के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि आरक्षण का 90 प्रतिशत लाभ कुछ ही लोगों को मिल रहा है। भारती ने पूछा कि इस दावे का आधार क्या है और क्या इसके पीछे कोई सर्वे या आधिकारिक आंकड़े हैं?
एलजेपी सांसद ने आरक्षण के बैकलॉग, IIT, IIM, AIIMS और विश्वविद्यालयों में दलित प्रतिनिधित्व तथा निजी क्षेत्र में हिस्सेदारी पर भी बहस की मांग की। उन्होंने कहा कि आरक्षण का उप-वर्गीकरण दलित समाज को बांटने के बजाय वंचितों को वास्तविक लाभ पहुंचाने की दिशा में होना चाहिए।

