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जन्माष्टमी मेला बनेगा खास आकर्षण : पटना के श्री गौड़ीय मठ मंदिर में भव्य तैयारी,भक्ति, संस्कृति और वैष्णव परंपरा का दिखेगा अद्भुत संगम

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पटना: राजधानी के मीठापुर स्थित गौड़ीय मठ मंदिर में इस साल 93वां श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव 3, 4 एवं 5 सितंबर 2026 को भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आयोजित किया जाएगा.

महोत्सव में भक्ति, संस्कृति और वैष्णव परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा.श्रीकृष्ण के रूप, गुण, लीला एवं माधुर्य से संबंधित पदावली कीर्तन, श्रीकृष्ण जन्मलीला कथा,भव्य महाआरती, पंचामृत एवं पंचगव्य से महाभिषेक,56 भोग निवेदन,राजवेश में विशेष शृंगार और फूलों से सुसज्जित भव्य फूल बंगला प्रमुख आकर्षण होंगे.

छह दशक पुराना जन्माष्टमी मेला बनेगा आकर्षण का केंद्र

श्री गौड़ीय मठ का प्रसिद्ध जन्माष्टमी मेला वर्ष 1966 से लगातार आयोजित होता आ रहा है और इस वर्ष इस परंपरा के करीब 60 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं.छह दशकों से पटना के धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा रहा यह मेला आज भी श्रद्धालुओं एवं हर आयु समूह के लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है.

मेले में कृष्ण से जुड़ी पूजन सामग्री, मिठाइयां, खिलौने, झूले, धार्मिक पुस्तकें तथा विभिन्न प्रकार की सजीव झांकियां आकर्षण का केंद्र रहती हैं.अनेक परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस मेले में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद लेते आ रहे हैं.

10 क्विंटल फूलों से सजेगा भव्य फूल बंगला

जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी, रौलेक्स डेकोरेशन, आकर्षक झूमरों और लगभग 10 क्विंटल देशी फूलों से निर्मित भव्य फूल बंगले से सजाया जा रहा है.भगवान श्रीकृष्ण के विशेष शृंगार के लिए वृंदावन से राजवेश एवं बनारसी सिल्क के विशेष वस्त्र मंगाए गए हैं। वहीं शृंगार एवं फूल बंगला तैयार करने के लिए लखनऊ से विशेष टीम आ रही है. पुष्प मुकुट, हार एवं अन्य अलंकरणों से भगवान का विशेष शृंगार किया जाएगा.मायापुर,नवद्वीप,वृंदावन एवं लखनऊ से आएंगी वैष्णव कीर्तन मंडलियांमहोत्सव में मायापुर, नवद्वीप, वृंदावन एवं लखनऊ से वैष्णव कीर्तन मंडलियों के दल विशेष रूप से शामिल होंगे.

दिनभर होने वाले अविराम संकीर्तन से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंजता रहेगा. श्रद्धालुओं को वैष्णव भक्ति संगीत एवं पदावली कीर्तन की विशेष अनुभूति प्राप्त होगी.महोत्सव के दौरान संध्या 8 से 9 बजे तक गौड़ीय नृत्य की विशेष प्रस्तुति होगी,जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं एवं वैष्णव भक्ति की भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रस्तुत की जाएगी.

56 भोग एवं विशेष महाभिषेक की तैयारी

भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाने वाले 56 भोग की विशेष तैयारी की जा रही है. इसके लिए मायापुर से विशेष वैष्णव दल आया है.जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत एवं पंचगव्य से भव्य महाभिषेक किया जाएगा.भगवान के विशेष शृंगार के लिए वृंदावन से राजवेश एवं बनारसी सिल्क के विशेष वस्त्र मंगाए गए हैं. पुष्प मुकुट एवं हार तथा फूल बंगले की विशेष सजावट जन्मोत्सव की भव्यता को और बढ़ाएगी.

जन्माष्टमी के दिन होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान

4 सितंबर 2026, शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतोपवास के अवसर पर प्रातः 8 से 10 बजे तक मां देवकी गर्भ-स्तुति, ब्रह्म-संहिता एवं दशावतार स्तोत्र का सामूहिक पाठ किया जाएगा. सुबह10 बजे के बाद अविराम श्रीकृष्ण संकीर्तन, श्रीकृष्ण की लीला, गुण-महिमा स्तुति एवं वंदना-गान का आयोजन निरंतर चलता रहेगा.

संध्या 5 बजे से कीर्तन एवं मंदिर परिक्रमा होगी

संध्या आरती के पश्चात रात्रि 10 बजे से 12:30 बजे तक श्रीकृष्ण जन्मलीला कथा एवं प्रवचन होगा.रात्रि 11:17 बजे से 12:05 बजे तक शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य आह्वान, भव्य महाभिषेक एवं 56 भोग निवेदन किया जाएगा.इसके पश्चात रात्रि 12:30 बजे दिव्य जन्म महाआरती एवं विशेष दर्शन होंगे. महाआरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए चरणामृत एवं व्रत-प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी.70–80 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावनाहै.

जन्माष्टमी को लेकरआवश्यक तैयारियां की जा रही

श्री गौड़ीय मठ के अध्यक्ष श्रीमद् भक्ति रससार महाराज ने कहा कि जन्माष्टमी को लेकर मंदिर द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही है. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए उनकी सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. महोत्सव एवं मेले के दौरान सुरक्षा, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन की समुचित व्यवस्था के लिए प्रशासन से आग्रह किया गया है,ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और सभी लोग सुगमता एवं सुरक्षित वातावरण में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर सके. मंदिर परिसर में निःशुल्क जूता-चप्पल गृह,प्राथमिक चिकित्सा, शीतल पेयजल एवं प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहेगी.