अब जमीन का भी बनेगा आधार नंबर : 14 अंकों के ULPIN से मिलेगी डिजिटल पहचान
पटना- बिहार समेत देश के हर भूखंड को एक डिजिटल पहचान देने की योजना है। इसके तहत जमीन के रिकॉर्ड को 14 अंकों के यूनिवर्सल लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) से जोड़ा जाएगा। इसे आम तौर पर जमीन का भू-आधार कहा जा रहा है।नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड को आपस में लिंक किया जाएगा। इसमें जमीन का नक्शा, रजिस्ट्री, जमाबंदी और अदालती मामलों से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। इससे किसी भूखंड की स्थिति की जानकारी एक ही डिजिटल व्यवस्था के जरिए हासिल करना आसान हो सकता है।
नई व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह होगा कि जमीन पर किसी तरह का बैंक कर्ज या मुकदमा चल रहा है या नहीं, इसकी जानकारी भी मिल सकेगी। इससे जमीन की खरीद-बिक्री से पहले उसके रिकॉर्ड और कानूनी स्थिति की जांच करना आसान होगा। सरकार पुराने रजिस्ट्री रिकॉर्ड को स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की तैयारी कर रही है। इससे पुराने कागजात के खोने, फटने या खराब होने का खतरा कम होगा और जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड को आसानी से देखा जा सकेगा।
जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने के लिए 565.50 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड को अधिक सुरक्षित, सुलभ और पारदर्शी बनाना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भू-आधार या ULPIN जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण नहीं होगा। जमीन का स्वामित्व संबंधित राज्य के वैध भूमि रिकॉर्ड और वहां लागू कानूनों के आधार पर ही तय किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक डिजिटल और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। इससे जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाने और रिकॉर्ड से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट





