Hindi News / कलश स्थापना के साथ पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना में भक्त लीन

चैत्र नवरात्र की शुरुआत : कलश स्थापना के साथ पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना में भक्त लीन

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रांची चैत्र शुक्ल प्रतिपद संवत 2083 आज से शुरु हो गया. हिन्दू मान्यता के अनुसार आज से नव वर्ष की शुरुआत होती है. वहीं आज चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिन भी है. कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है.

हिन्दू पंचांग के अनुसार आज19मार्च2026को चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है और नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा- अर्चना करने का विधान है. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है,जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है. वहीं उसके बाद मां शैलपुत्री की पूजा करते हैं.मां दुर्गा के शैलपुत्री रूप को गाय के घी और दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है.

हिन्दू मान्यताओं एवं शास्त्रों के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं. मां शैलपुत्री सफेद वस्त्र धारण किए हुए हैं और उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल शोभायमान है, उनके माथे पर चंद्रमा सुशोभित है. यह नंदी बैल पर सवार संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं. शैलपुत्री मां को वृषोरूढ़ा और उमा के नामों से भी जाना जाता है. देवी के इस रूप को करुणा और स्नेह का प्रतीक माना गया है. घोर तपस्या करने वाली मां शैलपुत्री सभी जीव-जंतुओं की रक्षक मानी जाती हैं.

मां शैलपुत्री के मंत्र

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

माता शैलपुत्री देवी कवच

ओमकार:में शिर: पातुमूलाधार निवासिनी।

हींकार,पातुललाटेबीजरूपामहेश्वरी॥

श्रीकार:पातुवदनेलज्जारूपामहेश्वरी।

हूंकार:पातुहृदयेतारिणी शक्ति स्वघृत॥

फट्कार:पातुसर्वागेसर्व सिद्धि फलप्रदा।

माता शैलपुत्री को इन चीजों का लगाएं भोग