बजट पर प्रतिक्रिया : चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने बजट को बताया समावेशी,राज्य के समग्र विकास के लिए ठहराया प्रतिकूल

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रांची:केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के आम बजट पर फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से मिली जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है. फेडरेशन ऑफ झारखंड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट समावेशी है. इसमें जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में कमी, हेल्थ सेक्टर और आयुर्वेद पर विशेष फोकस किया गया है. रांची में निम्हांस-2 की स्थापना भी एक सकारात्मक कदम है. हालांकि, झारखण्ड के उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों के अनुरूप विशेष ध्यान अपेक्षित था.

राज्य के समग्र विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन नेटवर्क, एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं और रेलवे नेटवर्क के व्यापक विस्तार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी. वनों की रक्षा के कारण राज्य अपने कई संसाधनों का उपयोग नहीं कर पा रहा है, इसलिए इसके एवज में केंद्र सरकार द्वारा झारखण्ड को विशेष केंद्रीय फंड उपलब्ध कराना न्यायसंगत होता. थर्मल पावर, अतिरिक्त स्टील प्लांट्स, डिफेंस मटेरियल यूनिट्स, उच्च शैक्षणिक संस्थान, स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन, महुआ बोर्ड और बायोफ्यूल निवेश जैसी पहलें राज्य में रोजगार और औद्योगिक विकास को तेज कर सकती थीं, लेकिन इनका उल्लेख बजट में नहीं है. झारखण्ड के आदिवासी बहुल इलाके आज तक रेल की सुविधा से वंचित हैं

बजट में हेल्थ, टूरिज्म, आयुर्वेद, बच्चियों के छात्रावास, छोटे शहरों का विकास, जीवनरक्षक दवाओं में छूट, जलमार्ग, स्पीड कॉरिडोर, बुद्धिस्ट सर्किट एवं उत्पादन प्रोत्साहन जैसे विषय शामिल हैं. परंतु योजनाओं की स्पष्ट रूपरेखा का अभाव दिखता है, जो विस्तृत अध्ययन के बाद ही स्पष्ट होगी. झारखण्ड के परिप्रेक्ष्य में जलमार्ग, खनिज या स्पीड कॉरिडोर को कोई विशेष तवज्जो नहीं मिली जबकि विकसित भारत 2047 के विज़न में झारखण्ड अपनी अपार संसाधन क्षमता से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. यह उपेक्षा बजट में प्रथम दृष्टया दिखाई देती है. निमहांस 2 की स्थापना स्वागत योग्य है. हम मांग करते हैं कि जलमार्ग व स्पीड कॉरिडोर विकास के साथ-साथ, वन आच्छादित क्षेत्रों की अधिकता को देखते हुए प्रस्तावित तीन आयुर्वेद संस्थानों में से एक झारखण्ड में स्थापित किया जाए. जिससे मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिले और राज्य वैश्विक मानचित्र पर उभरे.