BIHAR NEWS : बिहार के कृषि उत्पादों पर देश-दुनिया का भरोसा, क्लस्टर खेती से बढ़ेगी किसानों की आय – मंत्री राम कृपाल यादव

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पटना : बिहार सरकार क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए कृषि विभाग का उद्यान निदेशालय लगातार काम कर रहा है. कई तरह की सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं,ताकि किसान ऐसी फसलों की खेती करें,जिससे उनकी आय बढ़े. ये बातें शुक्रवार को होटल लेमन ट्री में क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कही.

कृषि विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जो कृषि रोड मैप बनाया है,उसके कारण कृषि उत्पादन काफी बढ़ा है. अब हमारी कोशिश किसानों को उनकी फसल का बेहतर मूल्य दिलाना है,ताकि उनकी आय बढ़े और वे खुशहाल हों.

बिहार के कृषि उत्पादों की बढ़ी अंतरराष्ट्रीय साख

उन्होंने कहा कि शाही लीची,मिथिला मखाना,जर्दालु आम जैसे कृषि उत्पाद इसी बिहार की धरती से निकले हैं. इसे जीआई टैग मिला है और देश-दुनिया में इसकी पहचान और गुणवत्ता पर लोग भरोसा कर रहे हैं. उद्यान के क्षेत्र में निवेश करने वालों को बिहार सरकार हरसंभव मदद करेगी.

क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम से बिहार की कृषि को नई दिशा

कार्यक्रम में कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि कृषि विभाग किसानों की आय बढ़ाने के लिए काम कर रहा है. विभाग उद्यान से जुड़ी ऐसी फसलों को बढ़ावा दे रहा है,जिनको बेचकर किसान ज्यादा से ज्यादा कमाई कर सकें. इसके लिए जिलों के आधार पर क्लस्टर बनाए गए हैं और उस इलाके में खास तरह की फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि आने वाला समय उद्यानिक फसलों का है. बिहार में इसकी बड़ी संभावना है. इसको बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है. निवेशक और किसान इसका लाभ उठाएं.

अब मूल्य और आय बढ़ाने पर फोकस

कार्यक्रम में उद्यान निदेशक अभिषेक कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा संचालित क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत पटना में इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है. उद्यान से जुड़े कई तरह के क्लस्टर बिहार में हैं. उदाहरण के लिए पटना,वैशाली,समस्तीपुर में सब्जी का बड़ा क्लस्टर है,तो कोसी और मिथिलांचल में मखाना का,वहीं रोहतास और कैमूर के इलाके स्ट्रॉबेरी–ड्रैगन फ्रूट के क्लस्टर हैं. कार्यशाला में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड,कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय,भारत सरकार सहित निवेशकों,बैंकों और किसान उत्पादक संगठनों की सहभागिता रही.