BIHAR NEWS : बक्सर में जेके सीमेंट और कोका-कोला प्लांट से 1 करोड़ नौकरी-रोजगार की दिशा में बड़ा कदम–सम्राट चौधरी
पटना/बक्सर : बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बक्सर जिले में करीब 1,700 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित दो प्रमुख औद्योगिक इकाई-कोका-कोला बॉटलिंग प्लांट और जेके सीमेंट यूनिट-का भव्य उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि ये दोनों परियोजनाएं राज्य में औद्योगिक विकास और एक करोड़ नौकरी और रोजगार सृजन की दिशा में बड़ा कदम है.
ब्रह्मपुर औद्योगिक क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये की लागत से स्थापितJK Cementकी अत्याधुनिक सीमेंट यूनिट का लोकार्पण करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह संयंत्र 100 एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसकी उत्पादन क्षमता 3 एमटीपीए है. इससे बिहार और आसपास के क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले सीमेंट की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित होगी. उन्होंने कहा कि पहले कंपनी को प्रयागराज स्थित इकाई से आपूर्ति करनी पड़ती थी,लेकिन अब स्थानीय उत्पादन से समय और लागत दोनों में कमी आएगी.
नवानगर में 1,200 करोड़ रुपये की लागत से 65 एकड़ में स्थापितCoca-Colaबॉटलिंग प्लांट का भी शुभारंभ किया गया. यह प्लांट प्रतिदिन 3.24 लाख केस (सीएस) उत्पादन क्षमता रखता है. इस इकाई का निर्माण कोका-कोला की फ्रेंचाइजी मेसर्स एसएलएमजी बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कराया गया है. इस अवसर पर उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल भी उपस्थित रहे.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार राज्य में नई औद्योगिक नीति के तहत बड़े निवेश आकर्षित कर रही है. इन परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार और नौकरी के अवसर सृजित करना है. जेके सीमेंट और कोका-कोला जैसी औद्योगिक इकाइयां इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगी.
सम्राट चौधरी ने कहा कि उद्योग और सरकार मिलकर बिहार को औद्योगिक रूप से सशक्त बना सकते हैं. बक्सर में स्थापित ये अत्याधुनिक संयंत्र राज्य की बढ़ती अवसंरचना जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देंगे.
उन्होंने कहा कि परियोजना से हजारों लोगों को सीधे रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. जबकि परिवहन,लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक क्षेत्रों से भी हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे. अब राज्य में पेय पदार्थों की आपूर्ति स्थानीय स्तर पर ही संभव होगी,जिससे परिवहन लागत घटेगी और राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी.
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्लांट में अपशिष्ट जल शोधन की व्यवस्था की गई है,पीईटी रीसाइक्लिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है और परिसर का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है. यह परियोजना राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है.
पटना से राजीव रंजन की रिपोर्ट--





