नारी वंदन अधिनियम पर सियासी संग्राम : बीजेपी पर साजिश करने का आरोप,कहा-बिल पास नहीं होने पर कांग्रेस को बताया महिला विरोधी
रांची: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार पर हमला बोला है. उनहोंने कहा कि साल 2023 का नारी वंदन अधिनियम सदन से सर्वसम्मति से पारित हुआ था, जिसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिली थी. उन्होंने कहा कि बिल में जातीय सर्वेक्षण और जनगणना के बाद परीक्षण की बात स्पष्ट रूप से अंकित थी, लेकिन इसके बावजूद विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण बिल उस वक्त फिर से लाया गया, जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे.
कांग्रेस को बदनाम करने की साजिश–केशव महतो
केशव महतो कमलेश ने आरोप लगाया है कि जब सदन में यह बिल पास नहीं हुआ तो कांग्रेस को महिला विरोधी बताकर बदनाम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले ही पांच महिलाओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना चुकी है, इसके बावजूद बीजेपी जानबूझकर कांग्रेस की छवि खराब करने में लगी हुई है. साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि एससी/एसटी की तरह ओबीसी को भी लोकसभा और राज्यसभा में आरक्षण मिले.
'परिसीमन की राजनीति के लिए लाया गया बिल'
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि बीजेपी महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति कर रही है. उनके मुताबिक, इस बिल को अचानक सामने लाने का मुख्य उद्देश्य परिसीमन कराना था. उन्होंने कहा कि जनगणना के बाद सभी जातियों को उनके अनुपात में आरक्षण देना होगा और कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के समर्थन में रही है. उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन को मिले समर्थन के लिए धन्यवाद दिया है.
2029 की सत्ता के लिए रणनीति– दीपिका पांडेय सिंह
सूबे की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि महिलाओं को सम्मान आजादी से पहले और बाद दोनों समय मिला है. उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कई बार कांग्रेस का नाम लिया और बीजेपी महिलाओं को आगे कर परिसीमन का रास्ता साफ करना चाहती है. उन्होंने कहा कि बीजेपी 2029 में सत्ता में लौटने की रणनीति के तहत यह कदम उठा रही है. उन्होंने ओबीसी हिस्सेदारी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि 2023 में जब बिल आया था, तब कांग्रेस ने जातीय सर्वेक्षण के आधार पर इसका समर्थन किया था.
रांची से संवाददाता राहुल कुमार की रिपोर्ट





