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JHARKHAND NEWS : लोहरदगा में अल्पसंख्यक महासभा के गठन को लेकर मंथन, जुटे बड़ी संख्या में समाज के लोग

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झारखंड में अल्पसंख्यक समाज को संगठित करने और उनकी समस्याओं को राजनीतिक एवं सामाजिक मंच पर मजबूती से उठाने की दिशा में पहल तेज होती नजर आ रही है। इसी क्रम में शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा के युवा और फायरब्रांड नेता रिजवान क्रांतिकारी लोहरदगा पहुंचे। यहां उन्होंने प्रस्तावित झारखंड अल्पसंख्यक महासभा के गठन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में लोहरदगा जिले के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समाज के लोग शामिल हुए।बैठक के दौरान प्रस्तावित संगठन के स्वरूप, उद्देश्य और आगामी रणनीति को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित लोगों ने अल्पसंख्यक समाज को एकजुट करने, समाज के लोगों की समस्याओं को चिह्नित करने तथा उनके अधिकारों और हितों की आवाज को उचित मंच तक पहुंचाने को लेकर अपनी राय रखी। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती के लिए उसका संगठित होना जरूरी है। संगठन के माध्यम से समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जा सकता है।

बैठक में रांची के पूर्व मेयर प्रत्याशी प्रवीण कच्छप तथा झामुमो के वरिष्ठ नेता समीम बड़ेहार भी मौजूद रहे। नेताओं ने संगठन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रस्तावित महासभा का उद्देश्य किसी एक वर्ग तक सीमित न रहकर अल्पसंख्यक समाज के लोगों के सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार और अन्य बुनियादी मुद्दों को मजबूती से सामने लाना होना चाहिए।बैठक में वक्ताओं ने कहा कि अल्पसंख्यक समाज के सामने शिक्षा, रोजगार, आर्थिक विकास, सरकारी योजनाओं का लाभ, सामाजिक सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए समाज के लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने और सरकारी स्तर पर उनकी समस्याओं को प्रभावी तरीके से रखने की जरूरत है। संगठन के माध्यम से समाज के जरूरतमंद लोगों को सरकारी योजनाओं और उनके अधिकारों की जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

रिजवान क्रांतिकारी ने बैठक में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन की सफलता उसके कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी पर निर्भर करती है। इसके लिए गांव से लेकर प्रखंड और जिला स्तर तक लोगों को जोड़ने तथा उनकी समस्याओं को समझने की जरूरत है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आपसी एकजुटता बनाए रखने और समाजहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।बैठक में शामिल लोगों ने भी प्रस्तावित महासभा के गठन को लेकर उत्साह दिखाया। लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और अपेक्षाओं को सामने रखते हुए संगठन को मजबूत एवं प्रभावी बनाने के लिए सुझाव दिए। कई लोगों ने कहा कि यदि संगठन का गठन मजबूत आधार पर होता है तो आने वाले दिनों में अल्पसंख्यक समाज की समस्याओं को सामूहिक रूप से उठाने में मदद मिलेगी।बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। झारखंड में अल्पसंख्यक समाज की बड़ी आबादी को देखते हुए प्रस्तावित महासभा के गठन को सामाजिक के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि संगठन का अंतिम स्वरूप, पदाधिकारियों का चयन और इसकी आगामी कार्ययोजना को लेकर तस्वीर आने वाले दिनों में और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

लोहरदगा में आयोजित यह बैठक अल्पसंख्यक समाज को संगठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखी जा रही है। बैठक में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से प्रस्तावित झारखंड अल्पसंख्यक महासभा को लेकर समाज के बीच रुचि का संकेत मिला है। अब देखना होगा कि महासभा का गठन किस स्वरूप में होता है और आने वाले समय में यह संगठन अल्पसंख्यक समाज की सामाजिक एवं राजनीतिक आवाज को कितना मजबूत बना पाता है।