जल संरक्षण की नई मिसाल : भोजपुर के फिंगी गांव में बिहार सरकार की पहल से बदली तस्वीर
भोजपुर: पानी पृथ्वी पर जीवन का आधार है और मानव जीवन के हर क्षेत्र से सीधे जुड़ा हुआ है. शारीरिक स्वास्थ्य से लेकर सामाजिक और आर्थिक विकास तक, पानी के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती. ऐसे में बदलते समय के साथ जल संरक्षण की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है.
भूजल स्तर में लगातार गिरावट और बढ़ते जल संकट के बीच अब पानी की हर बूंद को बचाने और उसके बेहतर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है. इसी दिशा में गंदे पानी, जिसे अपशिष्ट जल या वेस्ट वाटर कहा जाता है, को साफ कर दोबारा उपयोग में लाने की पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है.
आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपशिष्ट जल का शोधन कर उसे विभिन्न कार्यों के लिए दोबारा उपयोग योग्य बनाया जा रहा है. इस प्रक्रिया को जल पुनर्चक्रण (वाटर रीसाइक्लिंग) या सीवेज ट्रीटमेंट कहा जाता है. जल संकट से निपटने और भविष्य के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने में यह व्यवस्था एक प्रभावी कदम के रूप में उभर रही है.
इसी कड़ी में भोजपुर जिले के बिहिया प्रखंड स्थित फिंगी गांव में घरेलू गंदे पानी के वैज्ञानिक प्रबंधन की एक अनूठी पहल की गई है. कभी घरों से निकलने वाला गंदा पानी गांवों में जलजमाव और गंदगी की बड़ी समस्या बनता था, लेकिन अब यही पानी शोधन के बाद खेती के काम आ रहा है.
गांव मेंABR-AF (Anaerobic Baffled Reactor and Anaerobic Filter) आधारित ग्रे वाटर मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए घरों से निकलने वाले गंदे पानी का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जा रहा है. शोधन के बाद प्राप्त उपचारित पानी का उपयोग कृषि कार्यों में किया जा रहा है. इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों को भी लाभ हो रहा है.
पूरी प्रक्रिया जानिए
ग्रामीणों के मुताबिक घरों से निकलने वाला गंदा पानी100फीट लंबे ड्रेनेज के जरिएABR सिस्टम तक पहुंचाया जाता है. इसके बाद41फीट लंबे और16फीट चौड़े ढांचे में पानी को विभिन्न चरणों में फिल्टर किया जाता है. इस पहल से गांव के करीब200घरों को लाभ मिल रहा है. पहले घरेलू गंदे पानी का निस्तारण एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब उसी पानी का उपचार कर उसे खेती के लिए उपयोगी बनाया जा रहा है.
रौशन कुमार, जिला सलाहकार, CB & IES, भोजपुर, बिहार बताते हैं कि, “घरेलू जल प्रबंधन के लिएABR तकनीक का उपयोग करते हुए एक संरचना का निर्माण किया गया है. इसके लिए100मीटर लंबी आरसीसी नाली बनाई गई है. मुख्य संरचना में छह फिल्टर लगाए गए हैं. इसके अलावा दो चैंबर बनाए गए हैं, जिनमें एक इनलेट और दूसरा आउटलेट चैंबर है. आउटलेट चैंबर में ग्रेवल की परत दी गई है, जिससे पानी छनकर बाहर निकलता है. इस तरह साफ किए गए पानी का उपयोग कृषि कार्यों के लिए किया जाता है.” करीब14लाख57हजार की लागत से इस परियोजना का निर्माण किया गया है.
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और माइनिंग विभाग के सहयोग से संचालित यह पहल स्वच्छता, बेहतर जल प्रबंधन और सतत विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो रही है. फिंगी गांव का यह मॉडल दिखाता है कि वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए अपशिष्ट जल को भी एक उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है. वाकई बदलते बिहार की तस्वीर गांवों से देखने को मिल रही है.





