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देवघर एम्स में कालाजार पर कार्यशाला : जटिल मामलों के प्रभावी इलाज पर जोर,6 जिलों के डॉक्टरों को दिया गया प्रशिक्षण

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रांची/देवघर: झारखंड में कालाजार (विसरल लीशमैनियासिस) उन्मूलन के लक्ष्य को बनाए रखने के उद्देश्य से एम्स देवघर में राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में कालाजार एवं पीकेडीएल (पोस्ट-कालाजार डर्मल लीशमैनियासिस) के निदान और प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की.

6 जिलों के डॉक्टरों की भागीदारी

कार्यशाला में दुमका, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज, देवघर और जामताड़ा के चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए. एम्स देवघर और पीजेएमसीएच के डॉक्टरों ने भी भाग लिया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाना था, ताकि जटिल मामलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जा सके.

उन्मूलन के बाद नियंत्रण बनाए रखने पर जोर

कार्यक्रम में मौजूद राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (VBD) डॉ. बिरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि झारखंड ने वर्ष-2023 में कालाजार उन्मूलन का लक्ष्य हासिल कर लिया है, लेकिन इसे बनाए रखना अब बड़ी चुनौती है. उन्होंने समन्वित प्रयास और तकनीकी दक्षता को जरूरी बताया.

विशेषज्ञों ने दिए तकनीकी सुझाव

एम्स देवघर के कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. गंगाने ने मेडिकल कॉलेजों की भूमिका को अहम बताया. वहीं, आईसीएमआर-आरएमआरआईएमएस, पटना के डॉ. कृष्णा पांडे ने जटिल मामलों में सटीक निदान और प्रोटोकॉल आधारित उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया. आईपीजीएमईआर, कोलकाता की प्रो. (डॉ.) मिताली चटर्जी ने पीकेडीएल की समय पर पहचान को जरूरी बताया.

आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से होगा लाभ

डॉ. रोशन टोपनो ने QPCR जैसी आधुनिक तकनीकों को कालाजार निदान में उपयोगी बताया. कार्यशाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन, पिरामल स्वास्थ्य और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के प्रतिनिधियों सहित 60 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. इस तरह के प्रशिक्षण से जमीनी स्तर पर उपचार और प्रबंधन की गुणवत्ता में सुधार होगा।