BIHAR NEWS : अपराधियों को सजा दिलाने की बढ़ी रफ्तार, 4 महीने में 453 को आजीवन कारावास
पटना : राज्य में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए इन्हें सजा दिलाने की रफ्तार तेज हो गई है. इस वर्ष जनवरी से अप्रैल तक 7 हजार 624 अपराधियों को सजा दिलाई गई है. इसमें 453 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा दी गई. 253 अभियुक्तों को 10 वर्ष या उससे अधिक वर्ष की सजा सुनाई गई है. पॉक्सों एवं रेप के 218 कांडों में 267 अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा दिलाई गई है. यह जानकारी एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में दी.
एडीजी कुमार ने कहा कि जनवरी से अप्रैल तक जिन कुछ प्रमुख अपराधों में अपराधियों को सजा दिलाई गई है,उसमें आर्म्स एक्ट के 252 मामलों में 318 अपराधी,हत्या के 213 मामलों में 508,डकैती के 17 में 34,लूट के 59 में 66,अपहरण के 51 मामलों में 62 अपराधियों को सजा दिलाई गई है. इसके अलावा सभी अपराधों में कुल सजा दिलाने वाले अपराधियों में 10 वर्ष से कम सजा पाने वाले अपराधियों की संख्या 651,2 वर्ष से कम सजा पाने वालों की संख्या 981 और जुर्माना या बंदपत्र के आधार पर छोड़े गए अभियुक्तों की संख्या 68 हजार 284 है. फरवरी महीने में दो अपराधियों को फांसी की सजा भी दी गई है.
प्रेस वार्ता के दौरान एडीजी (विधि-व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने बताया कि मोतिहारी,समस्तीपुर,वैशाली,सीवान और मधुबनी में एसपी (ग्रामीण) का पद सृजन किया गया है. यह पद इन जिलों में विधि-व्यवस्था को सुचारू तरीके से संचालित करने के उदेश्य से किया गया है. इससे कांडों का निष्पादन तेजी से होगा.
साइबर अपराध में शामिल 1200 म्यूल खाते कराए गए बंद
प्रेस वार्ता के माध्यम से आईजी (साइबर) रणजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि सर्वाधिक ऑनलाइन शिकायत और एफआईआर दर्ज करने में बिहार का स्थान देश में चौथा है. राज्य में साइबर अपराध में संलिप्त 1200 म्यूल बैंक खातों को चिह्नित कर बंद करा दिया गया है. इसमें 122 एफआईआर दर्ज की गई है. फर्जी दस्तावेज की मदद से खोले गए इन खातों का उपयोग साइबर अपराध में ठगी गई राशि के लेन-देन के लिए प्रयोग किया जाता था. इसमें संलिप्त पाए गए 5 बैंक कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि राज्यभर में 199 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी के मामले सामने आ चुके हैं. इसमें 51 करोड़ 84 लाख रुपये को होल्ड कराया जा चुका है, जो कुल राशि का 26.04 प्रतिशत है. इसमें 7 करोड़ 6 लाख रुपये होल्ड कराए गए हैं. इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर आने वाली कॉल की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. इस वर्ष फरवरी तक रोजाना 5500 फोन कॉल आते थे, इसके बाद यह संख्या बढ़कर 8100 कॉल प्रतिदिन के औसत से हो गई है. जनवरी से अप्रैल तक 9 लाख से अधिक कॉल का उत्तर दिया गया, जो कुल आए कॉल का 99 फीसदी है. साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में दर्ज शिकायतों की संख्या 59 हजार 579 है. इस दौरान 602 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी भी की गई है. पिछले वर्ष 2025 में 1098 अपराधियों की गिरफ्तारी हुई थी. साइबर अपराध पर नकेल कसने के लिए साइबर प्रहरार 2.0 अभियान चलाया गया है. साइबर अपराध में शामिल 4 हजार 147 मोबाइल नंबर और 638 मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर को ब्लॉक कराया जा चुका है. इसके अलावा फर्जी या गलत दस्तावेज पर सिम बेचकर इसे चालू कराने वाले 162 पीओएस एजेंट को भी चिन्हित कर कार्रवाई की गई है.





