BIHAR NEWS : बिहार में 2005 में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत 75 यूनिट, अब 401 यूनिट
पटना : बिहार में एनडीए शासन के दौरान पिछले दो दशकों में बिजली के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शासन की बागडोर संभालने के बाद इसमें रिकॉर्ड उपलब्ध दर्ज हुई है. प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत बढ़कर 401 यूनिट तक पहुंच गई है. यह बढ़ोतरी अब तक की सर्वाधिक है और पिछले 21 वर्षों के दौरान इसमें सवा पांच गुणा की बढ़ोतरी दर्ज हुई है.
ऊर्जा विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार,वर्ष 2005 में जब राज्य में पहली बार एनडीए सरकार सत्ता में आई थी,तब वार्षिक प्रति व्यक्ति बिजली खपत महज 75 यूनिट थी,जो वर्ष 2026 में बढ़कर 401 यूनिट हो गई है. वर्ष 2012 में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 134 यूनिट थी.
प्रति व्यक्ति खपत बढ़ने का मतलब यह
प्रति व्यक्ति बिजली खपत बढ़ने का अर्थ है किसी क्षेत्र में एक व्यक्ति के स्तर से एक वर्ष में औसतन उपयोग की गई बिजली,जिसकी गणना कुल बिजली खपत को कुल बिजली उपभोक्ताओं की संख्या से विभाजित करके की जाती है. इससे लोगों के जीवन स्तर में बिजली की वजह से आए साकारात्मक बदलाव के साथ ही समृद्धि,सुविधा और आर्थिक उन्नति का परिचायक है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक,गांवों और घरों का व्यापक स्तर पर विद्युतीकरण,शहरीकरण तथा औद्योगीकरण में बढ़ोतरी के कारण भी प्रति व्यक्ति बिजली खपत बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. गौरतलब है कि राज्य सरकार ने अक्टूबर 2018 में "हर घर बिजली" योजना के तहत राज्य के हर गांव तथा हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया था. वर्तमान में राज्य में विद्युतीकृत गांवों की संख्या 39 हजार 073 है. वर्ष 2005 में यह संख्या 14 हजार 020 थी,जो 2012 में बढ़कर 33 हजार 850 हो गई.
बिजली आपूर्ति के घंटों में वृद्धि
वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में औसतन 23 से 24 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 23 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है. वर्ष 2012 में शहरी क्षेत्रों में 14 से 16 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 8 से 10 घंटे प्रतिदिन बिजली आपूर्ति होती थी. जबकि वर्ष 2005 में शहरी क्षेत्रों में औसतन 10 से 12 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिलती थी.
बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 17.3 लाख से बढ़कर 2.22 करोड़
वर्ष 2005 में राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 17.3 लाख थी,जो अब बढ़कर 2.22 करोड़ हो गई है. वर्ष 2012 में यह संख्या 38 लाख थी. 2.22 करोड़ उपभोक्ताओं में से अब तक लगभग 90 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं. इनमें घरेलू और व्यावसायिक दोनों प्रकार के बिजली उपभोक्ता शामिल हैं.
जुलाई 2026 में बिहार ने 9,426 मेगावाट बिजली की रिकॉर्ड मांग दर्ज की
कभी बिजली संकट से जूझने वाले इस प्रदेश अब 4 जुलाई 2026 को 9,426 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति (पावर ड्रॉअल) का गवाह बना,जो वर्ष 2005 की तुलना में 13 गुना से अधिक है. इसी प्रकार राज्य की राजधानी पटना ने भी 21 जून 2026 को 933 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति (पावर ड्रॉअल) दर्ज की. वर्ष 2005 में राजधानी की अधिकतम बिजली मांग लगभग 400 मेगावाट थी,जो वर्ष 2015 में बढ़कर लगभग 550 मेगावाट हो गई थी. इसी तरह राज्य की राजधानी पटना ने भी 5 जुलाई 2026 को 961 मेगावाट बिजली की रिकॉर्ड आपूर्ति दर्ज की. वर्ष 2005 में पटना की बिजली मांग लगभग 400 मेगावाट थी,जो वर्ष 2015 में बढ़कर लगभग 550 मेगावाट हो गई थी.
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार,इस गर्मी में राज्य और राजधानी पटना के अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ने की संभावना को देखते हुए दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड तथा उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को और मजबूत कर आवश्यक तैयारियां कर ली. पर्याप्त बिजली उपलब्ध होने के कारण सरकार ने राज्य के 1.86 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का निर्णय लिया. यह फैसला जुलाई 2025 में लिया गया था.
वर्ष 2005 में सत्ता संभालने वाली एनडीए सरकार ने बिजली क्षेत्र सहित लगभग सभी क्षेत्रों में नई शुरुआत की और बिजली आपूर्ति बढ़ाने,प्रति व्यक्ति बिजली खपत में वृद्धि,उपभोक्ताओं की संख्या में उल्लेखनीय विस्तार,एटी एंड सी (AT&C)हानियों में कमी तथा ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाए.
बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए नए जीएसएस और पीएसएस की स्थापना
बेहतर,निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य में ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस) और पावर सब-स्टेशन (पीएसएस) स्थापित किए गए. वर्ष 2005 में जहां केवल 45 ग्रिड सब-स्टेशन थे और वर्ष 2012 में भी इनकी संख्या 45 ही रही,वहीं वर्ष 2026 में इनकी संख्या लगभग चार गुना बढ़कर 175 हो गई है. इसी प्रकार पावर सब-स्टेशनों की संख्या 3.5 गुना बढ़कर 1 हजार 283 हो गई है. वर्ष 2005 में इनकी संख्या 368 तथा वर्ष 2012 में 545 थी. डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मरों (डीटी) की संख्या 10.6 गुना बढ़कर 3,80,185 हो गई है. साथ ही ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार बढ़ाकर 21 हजार 822 सर्किट किलोमीटर तक किया गया है. डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (डीटी) वही उपकरण है,जिससे उपभोक्ताओं के घरों तक बिजली की आपूर्ति की जाती है.





