BIHAR NEWS : बिहार में जल-जीवन-हरियाली से बदली गांवों की तस्वीर, तालाबों में मछली पालन से सालाना 25 लाख तक कमाई

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पटना : जलवायु परिवर्तन से निपटने और पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए बिहार में शुरू किया गया'जल-जीवन-हरियाली'अभियान अब नए रोजगार के कई अवसर उपलब्ध करा रहा है. इस अभियान के तहत हाल के कुछ वर्षों में राज्य में तेजी से तालाब और पोखर का निर्माण हो रहा है जहां मत्स्य पालन के व्यवसाय को नई ऊंचाई मिल रही है. किसान आज इस व्यवसाय से प्रति वर्ष औसतन20-25लाख रुपए तक की विशुद्ध कमाई कर रहे हैं.

बंजर जमीन से हो रही सालाना20-25लाख की कमाई

कैमूर जिले में रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत जमुराना के रहने वाले बसंत कुमार को माता-पिता की देखरेख के लिए करीब पांच वर्ष पहले विदेश की नौकरी छोड़ अपने घर वापस लौटना पड़ा. गांव में उनके पास जो भी जमीन उपलब्ध थी,वह खेती योग्य नहीं थी. उन्होंने इस बंजर प्राय जमीन का इस्तेमाल मत्स्य पालन में करने का निर्णय लिया. विभाग से संपर्क साधने के बाद उन्हें योजनाओं की जानकारी दी गई. उन्होंने अपनी जमीन पर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनांतर्गत नया तालाब और बायोफ्लॉक टैंक का निर्माण करवाया. आज वह इस तालाब से प्रति वर्ष करीब35टन पंगास एवं इंडियन मेजर कार्प (आईएमसी) मछली का उत्पादन कर रहे हैं. इससे गांव में ही करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हो गया है. बसंत खुद20-25लाख रुपए तक की सालाना कमाई कर ले रहे हैं.

मत्स्य पालन बन रहा कई परिवारों के लिए जीविका का साधन

कैमूर जिले के ही रामपुर प्रखंड अंतर्गत बेलांव के रहने वाले किशोर कुमार ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद गांव में खेती शुरू की. उनके इस पारंपरिक खेती से मुनाफा कम होता था. साथ ही कई बार फसल प्राकृतिक आपदा की भेंट चढ़ जाती थी. हर तरफ से परेशान किशोर ने अपने निजी जमीन में तालाब और फिश किऑस्क का निर्माण कराया. किशोर बताते हैं कि शुरू में उनके पास व्यवसाय जहां शून्य था,आज मत्स्य पालन के रूप में उनके पास एक बड़ा कारोबार खड़ा हो चुका है. इससे गांव में8-10परिवार को स्थाई रोजगार मिल चुका है. साथ ही इस मत्स्य पालन के व्यवसाय से वह खुद प्रति वर्ष16-20लाख रुपए का मुनाफा आसानी से कमा ले रहे हैं.

तालाबों से रोजगार की लहर

2 अक्तूबर 2019 से शुरू जल-जीवन- हरियाली अभियान के तहत ग्रामीण विकास विभाग कुल 11 अवयव पर कार्य कर रहा है. इसमें मुख्य रूप से पुराने जलस्रोत का संरक्षण, संवर्धन जीर्णोद्धार और नवनिर्माण शामिल है. आंकड़ों पर गौर करें तो अभियान के अवयव-6 के तहत करीब छह वर्षों में राज्य भर में चार हजार 310 नए तालाबों का निर्माण किया गया. आज इन तालाबों के सहारे ग्रामीण हिस्सों में मत्स्य पालन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है. इस व्यवसाय से किसान प्रति वर्ष करीब 20-25 लाख रुपए तक मुनाफा कमा रहे हैं. साथ ही दूसरे परिवारों को भी गांव में रोजगार का नया अवसर तैयार हो गया है. मत्स्य पालन के सहारे आमदनी में इजाफा होने से ग्रामीणों की न सिर्फ आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है बल्कि उनका जीवन स्तर भी तेजी से सुधर रहा है.