BIHAR NEWS : सरकारी सेवा में बैकडोर नियुक्ति को नियमित करने का दावा लंबे समय तक काम करने पर नहीं स्वीकारा जा सकता- पटना HC
Patna : पटना हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि सरकारी सेवा में बैकडोर तरीके से हुई नियुक्ति को नियमित करने का दावा केवल लंबे समय तक काम करने के आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक पदों पर नियुक्ति दैनिक वेतनभोगी या संविदाकर्मी के रूप में कार्य करने मात्र से नियमित नियुक्ति का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं हो जाता।
जस्टिस कुमार मनीष की एकलपीठ ने वैशाली निवासी आनंद कुमार सिन्हा की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने वर्ष 1995 से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य करने का दावा करते हुए चतुर्थवर्गीय पद पर नियमितीकरण और वर्ष 2016 की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित त्रुटियों को दूर करने की मांग की थी।
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि विज्ञापन संख्या 01/2016 के तहत प्रकाशित रिक्तियों को जिला चयन समिति ने 9 मई 2018 की बैठक में निरस्त कर दिया था। ऐसे में उस विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका स्वतः निष्प्रभावी हो गई।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी में नियुक्ति के लिए खुला विज्ञापन,सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया अनिवार्य है। नियमों के विपरीत अथवा बैकडोर तरीके से हुई नियुक्ति को नियमितीकरण के माध्यम से वैध नहीं बनाया जा सकता।
चूंकि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि उनकी प्रारंभिक नियुक्ति विधिसम्मत चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी,इसलिए नियमितीकरण की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-





