बिहार में नया बजट खर्च नियम लागू : चार महीनों में सीमित खर्च, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
पटना: बिहार सरकार ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से बजट खर्च के लिए नया ढांचा लागू किया है. वित्तीय वर्ष2026-27के तहत अब सभी विभागों को तय सीमा के भीतर ही योजना मद की राशि खर्च करने की अनुमति दी गई है. इस नए नियम के अनुसार अप्रैल से जुलाई तक केवल33प्रतिशत राशि ही खर्च की जा सकेगी. इससे सरकारी खर्च को संतुलित रखने और अनावश्यक खर्च पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है.
वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों,जिलाधिकारियों और कोषागार अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं. सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से बजट के उपयोग में पारदर्शिता आएगी और वित्तीय प्रबंधन अधिक प्रभावी बनेगा.
नए नियम के तहत अगस्त से नवंबर के बीच32प्रतिशत अतिरिक्त राशि खर्च करने की अनुमति होगी. इस प्रकार नवंबर तक कुल65प्रतिशत बजट उपयोग किया जा सकेगा. तय सीमा से अधिक राशि की निकासी पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी,जिससे खर्च पर नियंत्रण बना रहेगा.
हालांकि,सरकार ने वेतन,पेंशन,भत्ते और अन्य जरूरी स्थापना व्यय को इस सीमा से बाहर रखा है. इन मदों में खर्च के लिए कोई कठोर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है,ताकि सरकारी कामकाज प्रभावित न हो.
वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण यानि दिसंबर से मार्च के बीच शेष35प्रतिशत राशि खर्च करने की अनुमति दी गई है. इससे वर्ष के अंत में योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.
सरकार का कहना है कि यह कदम वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने,बजट के बेहतर उपयोग और विकास कार्यों को समय पर पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--





