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BIG NEWS : निगरानी ने 4 हजार रुपये रिश्वत लेते बिजली कंपनी के जेई को किया गिरफ्तार, इस वर्ष का 80वां मामला

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पटना:निगरानी ब्यूरो के अधिकारियों ने बीते मंगलवार भागलपुर जिले के कौटिल्य नार्थ पावर सब-स्टेशन परिसर स्थित कार्यालय से 4 हजार रुपये रिश्वत लेते बिजली वितरण कंपनी के जूनियर इंजीनियर (जेई) अमित कुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. इनके साथ इस निजी कंपनी के तकनीशियन सौरभ कुमार को भी गिरफ्तार किया. इस वर्ष अब तक निगरानी ब्यूरो के स्तर से ट्रैप के 80 मामले दर्ज किए जा चुके हैं,जिसमें विभिन्न स्तर के 80 लोकसेवकों को घूस लेते रंगे हाथ दबोचा जा चुका है.

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (वीआईबी) ने भागलपुर वितरण क्षेत्र के कचहरी रोड स्थित कौटिल्य नॉर्थ पावर सब-स्टेशन में पदस्थापित जूनियर इंजीनियर अमित कुमार के खिलाफ नया बिजली कनेक्शन देने के एवज में 4 हजार रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत पर कार्रवाई की गई है. एक अन्य कर्मी सौरभ कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है. वे इस मामले में नामजद (एफआईआर) आरोपी नहीं हैं. जीनस कंपनी में तकनीशियन के रूप में कार्यरत हैं. यह कंपनी स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य करती है.

भागलपुर जिले के ही बरारी थाना क्षेत्र स्थित सहदेव एंक्लेव,झौवा कोठी,खंजरपुर निवासी संतोष कुमार ने निगरानी ब्यूरो में इस मामले की शिकायत की थी. मामले की शुरुआती जांच में जब यह सच साबित हुआ,तब निगरानी ब्यूरो के स्तर से डीएसपी मिथिलेश कुमार के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर ट्रैप की कार्रवाई को अंजाम दिया गया.

भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत ब्यूरो ने वर्ष 2026 में बिहार में भ्रष्टाचार से संबंधित यह 86वीं प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है. जबकि सिर्फ ट्रैप की कार्रवाई में यह 80वां मामला है. ट्रैप के इन मामलों में अब तक कुल 29.18 लाख रुपये रिश्वत की राशि बरामद की जा चुकी है. वर्ष 2025 में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने 101 ट्रैप के मामलों में 37.80 लाख रुपये रिश्वत की राशि के तौर पर बरामद की थी. जबकि इस वर्ष के शुरुआती साढ़े छह महीने में ही सिर्फ ट्रैप के 80 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. वर्ष के अंत तक इनकी संख्या पिछली बार से कहीं अधिक बढ़ने की संभावना है.

इस वर्ष अब तक ट्रैप की कार्रवाई जिन विभागों में सर्वाधिक हुई है,उसमें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पहले स्थान पर है. जबकि इसके बाद पुलिस महकमा,पंचायती राज विभाग,स्वास्थ्य,खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग,खान एवं भूतत्व,शिक्षा,ग्रामीण विकास विभाग,कृषि और युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का स्थान आता है. भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सबसे ज्यादा शिकायतें भी इन्हीं विभागों से निगरानी ब्यूरो को मिलती हैं.