Hindi News / कंपनियों से 14 करार , विकास का नया रास्ता तैयार

रास्ते से भटकने का डर कैसे होगा दूर ? : कंपनियों से 14 करार , विकास का नया रास्ता तैयार

Edited By:  |
14 contracts signed with the company a new path for development paved 14 contracts signed with the company a new path for development paved

हमारे प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। उसका संभल कर सदुपयोग करने के बजाए अंधाधुंघ दोहन, हमे जल्द उस दहलीज पर ला खड़ा करेगा, जब हमारे खदान खाली होंगे और हाथ भी। इसलिए हेमंत सोरेन सरकार इस बार निवेश के क्षेत्र को विस्तार देते हुए, जब दावोस के बाद दिल्ली में उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ संभावनाओं पर विचार विमर्श कर रहे थे, तो साफ कहा माइन्स से आगे बढ़ कर झारखंड को माइन्डस में इनवेस्ट पर फोकस करना होगा। दो दिनों के कंसल्टेशन के दौरान कंपनियों ने सरकार की इच्छाशक्ति देखी। निवेशकों के लिए लगाए गए रेड कार्पेट को देखा। नीतियों को लेकर सरकार का जनहितकारी लचीलापन रवैया देखा। सिस्टम से जुड़े कामों को समय पर, सुचारू तरीके से सम्पन्न कराने का समर्पण देखा और हेमंत सोरेन का भरोसा दिलाना देखा। जिससे उन्हें भी हौसला मिला।

14 एमओयू पर हस्ताक्षर

जिसका परिणाम रहा कि नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन कार्यक्रम के दौरान दिल्ली में ज्ञान, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और ह्यूमन कैपिटल पर फोकस कर रहे सीएम के भरोसा दिलाने पर इंडस्ट्री, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और पर्यटन जैसे सेक्टर में 99 हजार करोड़ से अधिक के 14 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।

इनमें से 10 समझौते इंडस्ट्री विभाग ने, दो इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग ने और दो पर्यटन विभाग ने किए। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यटन, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर शामिल हैं। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के विकास का अगला चरण सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों पर नहीं, बल्कि इनोवेशन-आधारित विकास पर टिका होगा। हम सिर्फ नई नीतियां ही नहीं ला रहे हैं, बल्कि अवसर, निवेश और टिकाऊ विकास के नए रास्ते भी खोल रहे हैं।

दावोस से दिल्ली, धरातल पर कब ?

हेमंत सोरेन सरकार लगातार प्रयासरत है। जिसका परिणाम है कि सूबे के विकास के रास्ते तो खुल रहे हैं। रास्तो पर चलने की चाहत भी है, लेकिन पुराना अनुभव ये भी बताता है कि रास्ता भटकने का डर तब तक बना रहेगा जब तक मंजिल की झलक नहीं मिलेगी। दावोस और यूके में भी कई समझौते हुए थे। हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों को प्राथमिकता के साथ जमीन पर उतारा जाए इसको लेकर हेमंत सोरेन ने हाल ही मे बैठक भी की। उन्होंने टेक्सटाइल, उच्च शिक्षा, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, क्रिटिकल मिनरल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। संबंधित अधिकारियों से कहा था कि निवेशकों के प्रस्तावों को तेजी से क्रियान्वित करने के लिए बेहतर कार्ययोजना बनाई जाए। टेक्सटाइल सेक्टर पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार, खासकर महिलाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। बैठक की जानकारी भी उन्होने खुद सोशल मीडिया पर साझा की थी।

विकास का नया रास्ता है तैयार

लेकिन महीनो गुजर जाने के बाद भी बैठक में प्रस्तावों के क्रियान्वयन को लेकर कार्ययोजना बनाए जाने पर ही बात होने से, कार्ययोजना के अमल में आने और धराताल पर कुछ ठोस होता दिखने में कितना समय लगेगा, इस सवाल को आधार बनाकर सरकार के इरादों की मजबूती पर विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिल जाता है। अब सरकार को अपना ट्रैक रिकार्ड बेहतर करने के साथ आगे काम की गति तेज करने की जरूरत होगी। ताकि माइन्स से माइन्डस का सफर सुहाना हो। झारखंड के लिए फायदेमंद हो और झारखंड वासियों के लिए हेंमत सोरेन जो सपना संजो रहे हैं, उसे साकार करने में सक्षम हो। जिसके आधार पर विपक्ष को जवाब देने के साथ सरकार की ओर से भी ये कहा जा सके कि दावोस यूके के बाद दिल्ली में कंपनियों से हुआ 14 करार, विकास का नया रास्ता है तैयार। इतना ही नहीं सरकार की मंशा भांप कर संदेह के बादल छंट जाएंगे और साफ होगा कि अब भटकने का डर बेबुनियाद है।

दीपक शर्मा, सीनियर एंकर