

रविवार, 20 सितंबर 2026
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शिव कुमार की उमर बीत गई लेकिन जीवन में कभी 100 नोटो वाली गड्डी सपने में भी हाथ में आई हो ये याद नहीं। लेकिन शुक्रवार डिजिटल इंडिया का शिव कुमार ने वो कमाल देखा जो मरते दम तक नहीं भूलेंगे। सुबह घर से नास्ता पानी कर ई – रिक्शा चलाने निकलने वाले शिव कुमार रात भूखे पेट न सोना पड़े इसके लिए दिन भर मेहनत करते। उम्र आराम की मांग करता पर पेट समझाता आराम हराम है, काम कर, दाम मिलेगा तो रोटी दाल का इंतजाम होगा। बस दाल रोटी के लिए दिन भर की मशक्कत थी, और न उससे ज्यादा की जरूरत बची थी, न उससे ज्यादा की चाह रखने की हिम्मत बची थी।गिनती याद करनी पड़ी !थोड़ी राहत सीएम सम्राट चौधरी के वादे से मिला था कि हर महीने की 10 तारीख को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थियों के खाते में उनकी पेंशन राशी आ जाएगी। शिव कुमार के मोबाइल पर भी शुक्रवार को खाते में वृद्धावस्था पेंशन की राशी आने का मेसेज आया। थोड़ी राहत और थोड़ी उम्मीद के साथ अगले दिन यानि शनिवार को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के बागेश्वरी स्थित सी.एस.पी केंद्र पहुंचे और जरूरत के अनुसार 1000 रूपये की निकासी की, जिसकी जानकारी फौरन उनके खाते से लिंक मोबाइल नम्बर पर पहुंच गई। सी.एस.पी संचालक ने चेक किया और चौंक गया। मोबाइल पर आया मेसेज बता रहा था कि शिव कुमार के खाते में 1000 रूपये निकालने के बाद इतनी राशी बची है, जितनी पढ़ने के लिए संचालक को इकाई, दहाई, सैकड़ा, हजार, दस हजार, करोड़, दस करोड़, अरब तक की गिनती याद करनी पड़ी। बैलेंस देख उड़ गए तोते !गया जी शहर के डेल्हा थाना क्षेत्र के बागेश्वरी मोहल्ले निवासी ई-रिक्शा चालक शिव कुमार पटेल भी हैरान परेशान। सी.एस.पी संचालक के चेहरे पर उनका मोबाइल देखने के बाद भूत देख भक्क मार देने वाले हाव-भाव देख शिव कुमार भी एक बार को भयभीत हो गए। आखिर मोबाइल में आए मेसेज में ऐसा क्या था जो सी.एस.पी संचालक को सांप सूंघ गया। शिव कुमार ने फौरन मोबाइल लेकर देखा तो वो भी भक्क रह गए। हजार रूपये निकालने के बाद बचत के कुछ सौ हजार ही खाते में होने चाहिए थे, लेकिन मेसेज बता रहा कि खाते में इतना पैसा है, जितना सोचना तो दूर जोड़ कर पढ़ समझ पाना भी उसके बस का नहीं। निरहुआ रिक्शावाला भी फिसड्डी!अब किसी के खाते में 7,596,951,951.16 क्या आप एक बार में समझ गए, कितनी राशी दिख रही है। 759 करोड़ 69 लाख 51 लाख 951 रुपये और 16 पैसे शेष जमा राशि खाते में दिखे तो खोपड़ी खुजलाते रह जाए एक आम आदमी। शिव कुमार भी हैरान होने से ज्यादा परेशान हो गए। बात जंगल की आग की तरह फैल गई। परिचित अरबपति रिक्शे वाला बताने लगे। कोई निरहुआ को शिव कुमार के सामने पानी कम बताने लगा, कोई पार्टी देने की बात। इन सब से अलग परेशान शिव कुमार ने सम्पर्क किया बैंक के मैनेजर से। वीडियो देखने के लिए यहां CLICK करेंशिव पटेल ने बताया कि उन्होंने पड़ोसी की मदद से बैंक की स्टेशन रोड शाखा के प्रबंधक से फोन पर संपर्क किया। बैंक प्रबंधक ने उन्हें किसी भी प्रकार का लेनदेन न करने और मोबाइल में कोई छेड़छाड़ न करने की सलाह दी। मामला शनिवार का था और दूसरा शनिवार होने के बाद रविवार को भी बैंक बंद रहता है तो मैनेजन ने उन्हें सोमवार को शाखा में आकर मिलने को कहा।फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि खाते में इतनी बड़ी राशि कैसे आ गई। किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण या बैंक के स्तर पर कोई चूक हुई है। इसका पता तो सोमवार को ही चलेगा। तबतक आप सोचिए और बताई इतनी राशी आपके खाते में आ जाती है तो आप कहां कहां कैसे किस काम के लिए खर्च करेंगे।रिपोर्ट गया जी से प्रदीप, आलेख – दीपक शर्मा
हमारे प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। उसका संभल कर सदुपयोग करने के बजाए अंधाधुंघ दोहन, हमे जल्द उस दहलीज पर ला खड़ा करेगा, जब हमारे खदान खाली होंगे और हाथ भी। इसलिए हेमंत सोरेन सरकार इस बार निवेश के क्षेत्र को विस्तार देते हुए, जब दावोस के बाद दिल्ली में उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ संभावनाओं पर विचार विमर्श कर रहे थे, तो साफ कहा माइन्स से आगे बढ़ कर झारखंड को माइन्डस में इनवेस्ट पर फोकस करना होगा। दो दिनों के कंसल्टेशन के दौरान कंपनियों ने सरकार की इच्छाशक्ति देखी। निवेशकों के लिए लगाए गए रेड कार्पेट को देखा। नीतियों को लेकर सरकार का जनहितकारी लचीलापन रवैया देखा। सिस्टम से जुड़े कामों को समय पर, सुचारू तरीके से सम्पन्न कराने का समर्पण देखा और हेमंत सोरेन का भरोसा दिलाना देखा। जिससे उन्हें भी हौसला मिला।14 एमओयू पर हस्ताक्षर जिसका परिणाम रहा कि नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन कार्यक्रम के दौरान दिल्ली में ज्ञान, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और ह्यूमन कैपिटल पर फोकस कर रहे सीएम के भरोसा दिलाने पर इंडस्ट्री, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और पर्यटन जैसे सेक्टर में 99 हजार करोड़ से अधिक के 14 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।<blockquote class="twitter-tweet"><p lang="hi" dir="ltr">औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में ₹99, 000 करोड़ से अधिक के निवेश वाले MoU को मुख्यमंत्री <a href="https://x.com/HemantSorenJMM?ref_src=twsrc%5Etfw">@HemantSorenJMM</a> की उपस्थिति में अंतिम रूप दिया गया…<a href="https://x.com/jhr_doi?ref_src=twsrc%5Etfw">@jhr_doi</a> <a href="https://x.com/VisitJharkhand?ref_src=twsrc%5Etfw">@VisitJharkhand</a> <a href="https://x.com/hashtag/National?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#National</a> <a href="https://x.com/hashtag/Stakeholders?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Stakeholders</a> <a href="https://x.com/hashtag/Consultation?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#Consultation</a> <a href="https://x.com/hashtag/JharkhandSeJohar?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#JharkhandSeJohar</a> <a href="https://t.co/9hDUz2RTFx">pic.twitter.com/9hDUz2RTFx</a></p>&mdash; Office of Chief Minister, Jharkhand (@JharkhandCMO) <a href="https://x.com/JharkhandCMO/status/2075253901234978975?ref_src=twsrc%5Etfw">July 9, 2026</a></blockquote> इनमें से 10 समझौते इंडस्ट्री विभाग ने, दो इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग ने और दो पर्यटन विभाग ने किए। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पर्यटन, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर शामिल हैं। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के विकास का अगला चरण सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों पर नहीं, बल्कि इनोवेशन-आधारित विकास पर टिका होगा। हम सिर्फ नई नीतियां ही नहीं ला रहे हैं, बल्कि अवसर, निवेश और टिकाऊ विकास के नए रास्ते भी खोल रहे हैं।दावोस से दिल्ली, धरातल पर कब ?हेमंत सोरेन सरकार लगातार प्रयासरत है। जिसका परिणाम है कि सूबे के विकास के रास्ते तो खुल रहे हैं। रास्तो पर चलने की चाहत भी है, लेकिन पुराना अनुभव ये भी बताता है कि रास्ता भटकने का डर तब तक बना रहेगा जब तक मंजिल की झलक नहीं मिलेगी। दावोस और यूके में भी कई समझौते हुए थे। हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों को प्राथमिकता के साथ जमीन पर उतारा जाए इसको लेकर हेमंत सोरेन ने हाल ही मे बैठक भी की। उन्होंने टेक्सटाइल, उच्च शिक्षा, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, क्रिटिकल मिनरल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। संबंधित अधिकारियों से कहा था कि निवेशकों के प्रस्तावों को तेजी से क्रियान्वित करने के लिए बेहतर कार्ययोजना बनाई जाए। टेक्सटाइल सेक्टर पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में रोजगार, खासकर महिलाओं के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। बैठक की जानकारी भी उन्होने खुद सोशल मीडिया पर साझा की थी। <blockquote class="twitter-tweet"><p lang="hi" dir="ltr">आज आवास में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ World Economic Forum, दावोस तथा United Kingdom में राज्य में निवेश को लेकर विभिन्न कंपनियों के साथ हुई बैठकों के पश्चात प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।<br>निवेश प्रस्तावों को शीघ्र धरातल पर उतारने तथा समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए… <a href="https://t.co/yTqFlDerVr">pic.twitter.com/yTqFlDerVr</a></p>&mdash; Hemant Soren (@HemantSorenJMM) <a href="https://x.com/HemantSorenJMM/status/2047711421908345123?ref_src=twsrc%5Etfw">April 24, 2026</a></blockquote> विकास का नया रास्ता है तैयारलेकिन महीनो गुजर जाने के बाद भी बैठक में प्रस्तावों के क्रियान्वयन को लेकर कार्ययोजना बनाए जाने पर ही बात होने से, कार्ययोजना के अमल में आने और धराताल पर कुछ ठोस होता दिखने में कितना समय लगेगा, इस सवाल को आधार बनाकर सरकार के इरादों की मजबूती पर विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिल जाता है। अब सरकार को अपना ट्रैक रिकार्ड बेहतर करने के साथ आगे काम की गति तेज करने की जरूरत होगी। ताकि माइन्स से माइन्डस का सफर सुहाना हो। झारखंड के लिए फायदेमंद हो और झारखंड वासियों के लिए हेंमत सोरेन जो सपना संजो रहे हैं, उसे साकार करने में सक्षम हो। जिसके आधार पर विपक्ष को जवाब देने के साथ सरकार की ओर से भी ये कहा जा सके कि दावोस यूके के बाद दिल्ली में कंपनियों से हुआ 14 करार, विकास का नया रास्ता है तैयार। इतना ही नहीं सरकार की मंशा भांप कर संदेह के बादल छंट जाएंगे और साफ होगा कि अब भटकने का डर बेबुनियाद है।दीपक शर्मा, सीनियर एंकर
बिहार लोक भवन में राज्यपाल-सह-कुलाधिपति की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उच्च शिक्षा मंत्री भी उपस्थित रहे।बैठक में राज्य के विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, दक्षता और डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। सभी विश्वविद्यालयों को 31 दिसंबर 2026 तक “समर्थ” पोर्टल के सभी मॉड्यूल पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया गया, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और वित्तीय बचत सुनिश्चित होगी। नवनिर्मित 211 सरकारी डिग्री कॉलेजों के लिए संविदा आधारित सहायक प्राध्यापकों की केंद्रीकृत नियुक्ति प्रक्रिया, बेहतर वेतनमान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की नियुक्ति पर भी चर्चा हुई। साथ ही फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रमों को अनिवार्य बनाने तथा शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों को और अधिक सक्रिय करने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अद्यतन, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने, पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप और शोध छात्रवृत्ति योजनाओं पर भी सहमति बनी। बैठक में लंबित डिग्रियों के समयबद्ध वितरण, शिक्षक एवं कर्मियों के स्थानांतरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने तथा विश्वविद्यालयों के लिए नए आधुनिक कानून के मसौदे पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया। राज्यपाल ने कहा कि इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही, डिजिटलीकरण और शैक्षणिक गुणवत्ता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इन सुधारों का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक सशक्त और प्रतिस्पर्धी बनेगी।आज बिहार लोक भवन में राज्यपाल-सह-कुलाधिपति की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उच्च शिक्षा मंत्री भी उपस्थित रहे। बैठक में राज्य के विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता, दक्षता और डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। सभी विश्वविद्यालयों को 31 दिसंबर 2026 तक “समर्थ” पोर्टल के सभी मॉड्यूल पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया गया, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और वित्तीय बचत सुनिश्चित होगी। नवनिर्मित 211 सरकारी डिग्री कॉलेजों के लिए संविदा आधारित सहायक प्राध्यापकों की केंद्रीकृत नियुक्ति प्रक्रिया, बेहतर वेतनमान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की नियुक्ति पर भी चर्चा हुई। साथ ही फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रमों को अनिवार्य बनाने तथा शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों को और अधिक सक्रिय करने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अद्यतन, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने, पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप और शोध छात्रवृत्ति योजनाओं पर भी सहमति बनी। बैठक में लंबित डिग्रियों के समयबद्ध वितरण, शिक्षक एवं कर्मियों के स्थानांतरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने तथा विश्वविद्यालयों के लिए नए आधुनिक कानून के मसौदे पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया। राज्यपाल ने कहा कि इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही, डिजिटलीकरण और शैक्षणिक गुणवत्ता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इन सुधारों का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक सशक्त और प्रतिस्पर्धी बनेगी।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
कुछ रफा दफा करना हो तो कहते हैं मिट्टी डालो लेकिन राजनीति में किसी की मिट्टी पलीद करने के लिए गड़े मुर्दे उखाड़ने का खूब प्रचलन रहा है। बीजेपी का प्रयास रहा है कि कांग्रेस की साख को मिट्टी के मोल जितना कर देना है। उसके नाम को मिट्टी में मिला देने की चाहत के साथ मिट्टी खोद कर 50 साल से भी अधिक पुराने मुद्दे को निकाला जाता रहा है।संविधान हत्या दिवस कांग्रेस विरोधी दल साल दर साल, हर साल आपातकाल को याद करते हैं। पकड़ पकड़ कर कैम्प में ला कर जैसा लोगों के साथ किया गया, वैसे ही संविधान, नागरिक अधिकार, मीडिया की स्वतंत्रता जैसी प्रदत्त शक्तियों की, जबरिया नसबंदी कर दिया गया था। न्यायपालिका के निर्देश को रद्द करते हुए राजशाही अंदाज में, कुर्सी पर कब्जा करने के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को पस्त करने के लिए, सिस्टम की शक्ति का दुरूपयोग करने का कांग्रेस को दोषी ठहराते हुए, बीजेपी संविधान हत्या दिवस मना रही है।उल्टे बीजेपी पर संविधान बदलने का आरोप !आपातकाल के दौरान चार बार सुविधा अनुसार संविधान संशोधन किया गया। लेकिन कांग्रेस भी दुर्लभ मिट्टी की गढ़ी है। उल्टे वही बीजेपी पर चुनावी अभियान के दौरान संविधान बदलने को तैयार बताते हुए आरोपों की बौछार करती रही है। मिट्टी पलीद करने से मिट्टी में मिलाने तक के इस सियासी प्रयास को देख सुन समझ रहे मतदाता मिट्टी के माधव तो हैं नहीं, जो किसी ने कुछ कहा और उसे मान लिया। वो भी मिट्टी और सोना में फर्क जानते हैं। परीक्षण निरीक्षण करते हैं। विवेक से निर्णय लेते हैं। कांग्रेस के ताबूत में आखरी कील !उसमें एक महत्वपूर्ण कड़ी है उनकी स्मरण शक्ति। जीवन यापन के जद्दोजहद में जनता कुछ भी जल्दी भूल जाती है ऐसे में बीजेपी जनता को बार बार आपातकाल की याद दिलाती रहती है हर साल उसी दिन देशव्यापी कार्यक्रम का आयोजन कर कांग्रेस के ताबूत में आखरी कील ठोकने की ठसक में उसे लोकतंत्र का विरोधी करार देती रही है ऐसे में हम भी सवाल तो पूछेंगे आपातकाल का जिक्र वोट की फसल या लोकतंत्र की फिक्र ?सवाल तो पूछेंगे वीडियो देखने के लिए यहां CLICK करेंदीपक शर्मा, सीनियर एंकर
फर्क होता है किसी की हत्या और वध में। फर्क हथियार में नहीं होता। फर्क होता है हथियार को थामने वाले हाथ में। हथियार को चलाने वाली सोच में और फर्क होता है हथियार चलाने वाले हाथ को नियंत्रत करने वाली सोच के पीछे की मंशा में। स्वार्थ के लिए या समाज के लिए, सरकार के आदेश पर, कानून तोड़ने के लिए या कानून की रक्षा के लिए, आम जनो की सुरक्षा के लिए, कहर बरपाने के लिए या फर्ज निभाने के लिए, हथियार चलाने में फर्क होता है।सवालों के दायरे में पुलिस यही फर्क वो फासला है जो बताता है कि पुलिस कौन और अपराधी कौन। जबकि हथियार दोनो रखते हैं और दोनो ही चलाते हैं, लेकिन जब अपराध नियंत्रण के नाम पर पुलिस नियंत्रण में न रहे, सरकार से मिली छूट को कानून के दायरे से छूट निकलने का परमिट मानते हों, तो पुलिस वाले भी कानून के दायरे की देहरी पार कर सवालों के दायरे में आ जाते हैं।अपराध पर एक्शन का एनकाउंटर ही ऑपशन ?सवाल तब उठते हैं जब अपराध नियंत्रण के लिए हथियार का उपयोग संदेह के दायरे में आ जाता है। आरोप लगते हैं कि पुलिस इंकाउटर का प्रयोग कर रही है कभी अपनी छवी सुधारने के लिए, कभी स्वार्थ के लिए। कभी अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए तो कभी पद की हनक दिखाने के लिए। कभी अपने अहम की संतुष्ठी के लिए तो कभी सरकार की सराहना के लिए, न कि कानून और समाज की रक्षा के लिए हथियार का प्रयोग करते हैं।सवाल तो पूछेंगे, वीडियो देखने के लिए यहां CLICK करेंऐसे में यादा आता है फिल्मी पुलिस का फिल्मी डायलाग नो FIR, नो टॉक फैसला ऑन द स्पॉट। तो ऐसे में कोर्ट कचहरी जज वकील क्या करने के लिए हैं? जब फैसला पुलिस ऑन द स्पाट करने लगेगी? समस्या तभी होती है और सवाल तभी उठता है ऐसे में हम भी सवाल तो पूछेंगे कि अपराध पर एक्शन का क्या एनकाउंटर ही ऑपशन है।दीपक कुमार शर्मा, सीनियर एंकर
मास्टर साहब समय से स्कूल पहुंचे, पारिवार से दूर रहने की परेशानियों को परे रख पठन पाठन पर पूरो फोकस करें। अनजाने माहौल और अनजान जगह की अनजानी आफतों से खुद को अलग रखते हुए, अपने घरेलू माहौल में गृह जिला या प्रखंड पंचायतो के स्कूलो में पढ़ाने के लिए भेजे जाएं तो उनकी उपयोगिता और उत्पादक्ता उच्च क्षमता पर दिखेगी। इसी संभावना को देखते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि शिक्षकों को उनकी सुविधा अनुसार उनके गृह क्षेत्र में, उनके घर के जितने नजदीक संभव हो वहां ट्रांसफर कर पोस्टिंग देने को लेकर नियमावली को सरकार अगली कैबिनेट बैठक में स्वीकृति देने की तैयारी में लगी है। साथ ही सीएम की कही एक और बात मास्टर साहब के मन को छलनी करने वाली लगी!हम आपकी सुने, आप हमारी सुनिए !सम्राट चौधरी का विशेष रूप से ये कहना कि ट्रांसफर पोस्टिंग की उनकी मांग सरकार मान रही तो सरकार भी चाहती है कि मास्टर साहब सिर्फ बच्चों को पढ़ाने लिखाने में मन लगाएं। न राजनीति करें, न कामचोरी, और न ही स्कूल से हाजरी बनाकर लापता रहें, या स्कूल में सोते मिले। सीएम के कहे शब्दों का ये भाव शिक्षको पर भारी पड़ने वाला लगता है और मास्टर साहब की छवि को हल्का करने वाला। वो छवि जो पहले से बच्चों और अभिभावकों के बीच हल्की हुई है। बायोमेट्रिक एटेंडेंस को बायपास करने के शातिर तरीकों को लेकर। साथ ही सायकल, पोशाक या मध्याहन भोजन में गड़बड़ी के आरोपों और विभागीय अधिकारियों की जांच में पकड़े जाने के कारण। शिष्टाचार सिखाने वाले शिक्षक स्कूलो में होने वाली गड़बडियों के कारण भष्टाचार के उदाहरण बनने लगे। ऐसे में सीएम उनकी समस्या को मुंहमागी पोस्टिंग देकर दूर करना चाहते हैं और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बेहतर कर समस्या को दूर करना चाहते हैं।घर के पास पोस्टिंग से घटेगी परेशानी या बढ़ेगी लापरवाही ?वैसे गृह क्षेत्र की सुविधा अपने साथ पहले की समस्याओं के समाधान के अलावे भविष्य की सम्भावित समस्याओं को भी साथ लाता है। जैसे मास्टर साहब की मंशा पर सवाल, कार्य-अवधि में विद्यालय में मौजूदगी पर संदेह। उनकी कार्यशैली, उनकी कर्त्व्यनिष्ठा पर नजर कैसे रखी जाए ? वो हाजरी लगा कर पठन पाठन के काम से कक्षा में मौजूद हैं या घर परिवार के काम में लग जाते हैं ये कौन और कैसे देखेगा जांचेगा? फिर किसी जिला में आने और जाने वाले शिक्षकों की संख्या और उस जिले के विद्यालयों में विषयवार रिक्त पदों की संख्या को समायोजित करना भी अपने आप में एक चुनौती होगी। सरकार कैबिनेट की बैठक में नीतिगत निर्णय लेकर शिक्षकों को अपनी सकारात्म मंशा का संदेश तो दे सकती है, लकिन ऐसी व्यवहारिक चुनौतियों से पार पाना आसान नहीं होगा। ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए बहुतायत से आने वाली अर्जी का निपटारा चुनौती होगी, क्योंकि पहले भी एक बार सरकार ने प्रयास किया था, पर उसमें पुरी तरह से कामयाबी नहीं मिली। ऐस में सवाल तो पूछेंगे ट्रांसफर की खत्म टेंशन, तो होगा पढ़ाई पर अटेंशन?सवाल तो पूछेंगे, वीडियो देखने के लिए यहां CLICK करेंदीपक कुमार शर्मा, सीनियर एंकर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था न खाएंगे न खाने देंगे और लोक व्यवहार में शिष्टाचार समझे जाने वाले भ्रष्टाचार के शिकार लोगों को आधार मिला, मोदी के नाम का। कल्पना से परे हो चले भ्रष्ट व्यवस्था में सुधार को लेकर कही इस बात पर ऐतबार करने का विचार और भारत के विकसित होने का सपना साकार करने को साथ आने का सहारा मिला। बिहार में कुछ उसी अंदाज में डबल इंजन वाली सरकार के ड्राइविंग सीट पर बैठे, बीजेपी नेता सम्राट चौधरी उनसे उम्मीद लगाए पीछे बैठे पैसेंजर को रफ्तार पकड़ने से पहले कमर की पेटी बांध कर तैयार हो जाने को कहते दिख रहे हैं।लालटेन से 15 साल बिहार की चमक मद्धम हुई !गया जी में सम्राट चौधरी ने बिहार की कांति में कमी का जिम्मेदार लालटेन को बताया। जिसकी एक तो मद्धम लौ उसपर से शीशे पर जमी भ्रष्टाचार की कालिख। जिसके कारण बिहार की जो थोड़ी बहुत आभा थी उसे भी मलिन कर लोगों को अंधकार में धकेल देने का आरोपी ठहराया। समाज भगवान भरोसे, सुस्त-पस्त होता चला गया और सपने साकार करने वाले लोग सपने देखने से डरने लगे और सच में सो गए, सपने खो गए। फिर सरकार बदली, समय के साथ व्यवस्था में बदलाव आया। विकास के गीत गाए-गुनगुनाए जाने लगे। जिसे सुनकर सोए लोग जागने लगे, लेकिन अब सम्राट चौधरी कह रहे कि लालटेन की टिमटिमाती लौ में 15 साल गंवाकर बिहार का बड़ा नुकसान हो चुका है। इसकी भरपाई के लिए जरूरी है कि हम न सोए न सोने दें।सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देतेकभी मिसाइल मैन ने कहा था सपने वो नहीं जो हम नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने में सम्राट चौधरी बिहार की बड़ी भूमिका देख रहे हैं। दिल्ली से बैठक कर लौटे हैं तो बिहार के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का साहस दिखा रहे हैं। बिहारियों के हर सपने को साकार करने का सामर्थ देख रहे हैं। जैसे मोदी ने कहा था यही समय है, सही समय है। बिहार के लिए सीएम सम्राट चौधरी समय का पुरा सदुपयोग करने और उनके अनुसार जो समय गंवाया उसकी भरपाई करने का अवसर देख रहे हैं। इसके लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल तो पूछेंगे कि सीएम सम्राट का ये कहना कि न सोएंगे न सोने देंगे का लक्ष्य क्या, निशाना किस पर? सवाल तो पूछेंगे, वीडियो देखने के लिए यहां CLICK करेंदीपक कुमार, सीनियर एंकर
लत लक्षण बाय तीनो मरले पर जाए लेकिन नीतीश कुमार ने प्रयास किया कि बिहार के लोगों की शराब की लत दूर की जाए नशे में धुत शराबियों के जो लक्षण दिखते हैं जिसकी वजह से परिवार में क्लेश हुआ करता था सड़क पर शराबियों का उत्पात दिखता था गलियों में नालियों में बेसुध पड़े लोग नजर आते थे जो कमाई का अधिकांश हिस्सा परिवार की परवरिश में खर्च करने के बजाए शराब पीने में खर्च कर अपना भी बेड़ा गर्क करते थे उनके लक्षण में सुधार हो इसका प्रयास नीतीश कुमार ने किया। बिहारियों को इस बाय यानि बुरी आदत से बचाने के लिए नीतीश कुमार ने सरकारी खजाने पर पड़ने वाला भार स्वीकार किया और शराबबंदी लागू कर दिया। नीतीश कुमार ने बिहारवासियों को मरने से पहले शराब के लत लक्षण और बाय से छुटकारा दिलाने के लिए करीब 3150 करोड़ का नुकसान बर्दाश्त किया।आंकड़ो से समझे कितना महंगा पड़ा फैसलाआंकडो की बात करें तो 2010-11 में एक्साइज़ ड्यूटी से 1,523 करोड़ रुपये खजाने में आया, जो 2014-15 में बढ़कर 3,217 करोड़ हो गया। हालांकि 2016 में शराबबंदी के बाद एक्साइज ड्यूटी शून्य हो गया, शराबबंदी के बाद सरकार के कर राजस्व में गिरावट हुई। 2014-15 में कर राजस्व आय के स्रोतों का 21.99% था, 2024-25 में कर राजस्व घट कर 18.81 फ़ीसदी रह गया और 2026-27 के बजट में कर राजस्व 18.92% रहने का अनुमान जताया गया है।सवाल तो पूछेंगे वीडियो देखने के लिए यहां CLICK करेंइतने कर में नुकसान के बाद भी समय के साथ समाज खास कर निचले तबके में शराबबंदी का सकारात्मक असर दिखने लगा। पुलिस रिकार्ड और दूसरे माध्यमों से मिलने वाले आंकड़ो से पता चला कि शऱाबबंदी के बाद नशे में परिवार की महिलाओं से मारपीट, कलह कम होने लगी, हिंसा, अपराधिक घटनाओं में कमी आई। पहले शराब के लत के कारन कमाई का जो बड़ा हिस्सा पैमाना छलकाने में बर्बाद होता था वो बच्चों की पढ़ाई-परवरिश में काम आने लगा। घर परिवार में खुशियां आई नीतीश के नाम एक और चुनावी वादा पूरा करने का श्रेय जुड़ा और ये सिर्फ सियासी नहीं, समाज सुधार कि दिशा में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार का बड़ा प्रयास था। इसकी सफलता के शुरुआती लक्षण जल्द दिखने लगे लेकिन साथ ही शुरू हुआ शराब का अवैध कारोबार। शराबबंदी से बढ़ा अवैध कारोबार !जिन पाउच और बोतलों की बिक्री से सिर्फ सरकारी खजाने को 3000 करोड़ से अधिक की आय हो, उसका बाजार कुछ नहीं तो 6000 करोड़ का जरूर रहा होगा और इतनी बड़ी राशि के लेन देने से जुड़े लोग अचानक से सब बंद कर फांका-कशी से संतोष कर लें ये संभव नहीं। तो फिर शुरू हुआ और बढता ही चला गया शराब बंदी के बाद बिहार में शराब का अवैध कारोबार हेरा फेरी करने वालों को संरक्षण देने में सरकारी व्यवस्था में शामिल लोगों पर आरोप लगा चाहे खाकी वाले हों या खादी वाले लेकिन शराबबंदी के 10 साल बाद इसकी सफलता पर सवाल उठ रहे हैं। समीक्षा की बात हो रही है। यहां तक कि इसे खत्म करने की भी मांग होती रही है। शराबबंदी पर सवाल, वर्दी वालों पर ठीकरा !ऐसे में मंत्री मदन सहनी ने शराबबंदी की सफलता पर उठते सवाल का ठीकरा मद्य निषेध विभाग की टीम के संख्या बल से लेकर सहयोगी पुलिस पर फोड़ा है। विभागीय टीम को कार्रवाई में पुलिस से सही और पर्याप्त सहयोग मिले इसे जरूरी बताया गया। सहयोग के लिए अपील भी करने की बात कह रहे हैं। कशिश न्यूज के साथ खास बातचीत में मंत्री मदन सहनी ने शराब की अवैध बिक्री और तस्करी पर चिंता जताते हुए डीजीपी को पत्र लिखकर अधिक सहयोग की मांग करने की बात कही है। इसके बाद भी सवाल तो बनता है कि क्या वाकई में पुलिसकर्मियों की वजह से शराबबंदी प्रभावी नहीं हो रहा, या विभाग की टीम कम है, कमजोर है या सरकार की इच्छाशक्ति में कमी है ?दीपक कुमार, सीनियर एंकर
पटना। खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञानबिंदु कोचिंग विवाद से जुड़े चर्चित मामले में ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद को अदालत से जमानत मिल गई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है। जमानत मिलने के बाद रौशन आनंद अपने छोटे भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकेंगे, जिनकी हाल ही में नेपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। आपको बता दें, कोचिंग संस्थानों के बीच हुए विवाद और उससे जुड़े हिंसक घटनाक्रम के बाद पुलिस ने रौशन आनंद को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। यह मामला बिहार के शिक्षा जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना रहा। इसी बीच रौशन आनंद के छोटे भाई प्रिंस यादव की नेपाल के एक होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद नेपाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। हालांकि अब तक मौत के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। परिजनों और समर्थकों ने प्रिंस यादव की मौत की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सभी पहलुओं की गहन जांच आवश्यक है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।रौशन आनंद की जमानत के बाद अब वे अपने परिवार के साथ रह सकेंगे और भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। परिवार इस समय शोक में है, जबकि ज्ञान बिंदु कोचिंग की गतिविधियां भी इस घटनाक्रम से प्रभावित हुई हैं। वहीं, खान ग्लोबल स्टडीज और ज्ञानबिंदु विवाद से जुड़े अन्य मामलों की जांच अभी जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल, रौशन आनंद को मिली जमानत और प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत ने एक बार फिर इस पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब लोगों की नजरें नेपाल पुलिस की जांच रिपोर्ट और मामले से जुड़े आगामी कानूनी घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, कोचिंग संचालन को लेकर शिक्षा विभाग को सीएम सम्राट चौधरी की ओर से निर्देशित किया गया है कि विभाग शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करे। इसके लिए प्रभावी नियम कानून के साथ नियमन के लिए जरूरी कदम उठाने की कार्रवाई की जाए। गाइडलाइन के तौर पर सीएम ने विभाग को ये सुनिश्चित करने को कहा कि सभी विद्यार्थियों की लिस्ट जिला स्तर पर जमा करायी जाए, साथ ही स्कूल कॉलेज में पढ़ाई के समय कोचिंग के संचालन पर प्रतिबंध रहे। इसके बाद जो जरूरी कदम हों वो उठाए जाए।बच्चों से जुड़ा हैमामला संवेदनशील है, बच्चों से जुड़ा है, जो किसी भी विषय को लेकर बड़े प्रतिक्रियाशील रहते हैं। खास कर जब विषय को उनके भविष्य से जोड़ कर प्रोजेक्ट किया जाए तो कई बार कठपुतली के तौर पर संस्थानों के संचालकों के निजी हित के लिए उन्हें नचाया जा सकता है।विषय कोचिंग संस्थानों से जुड़ा है जो शिक्षा के कारोबार के कुछ छोटे और कुछ बड़े स्टेक होल्डर हैं। लाखों करोड़ों के कारोबार के प्रॉफिट मेकिंग ग्रुप होने के साथ प्रचार प्रसार से ज्यादा प्रॉफिट और नेम-फेम वाला फायदातो बोनस की तरह होता है।सब पैकेज डील में आता हैफिर आते हैं वो पैरेंट्स जो कभी गाढ़ी कमाई लुटा कर, कभी गहने गिरवी रखकर, तो कभी खेत बेच कर, शिक्षा के बाजार में प्रचार के प्रभाव में, भविष्य के सुनहरे सपनों के सम्मोहन में, खींचे चले आते हैं शिक्षा के इस बाजार में। इस बाजार में कोई 100, तो कोई 1000, तो कोई लाख का लेबल लगाए बैठा होता है। बड़ा बैनर, बड़ा नाम, बड़ा दाम, बेहतर रिजल्ट, बच्चों की बल्ले, सब पैकेज डील में आता है। इसके बाद ट्रैक रिकार्ड को कौन ट्रैक करता है, वो तो बस बैनर पोस्टर और प्रचार के प्रभाव में ट्रैप होते नजर आते हैं। लाखों की भीड़ में रेस में दौड़ते बच्चे पिछड़ते हैं, रिजल्ट के दबाव में निराशा हाथ लगने पर हताश होते दिखते हैं, कुछ रास्ता बदलते हैं, कुछ संभलते हैं, तो कुछ भीड़ में गुम हो गुमसुम घर लौटते हैं।शिकायतों का पहाड़ खड़ा हुआ !साल दर साल शिकायतों का पहाड़ खड़ा हुआ तो किरकिरी हुई सरकार की आंखो में। चुभन हुई तो छात्र हित का ध्यान आया और आदेश किया गया कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर नकेल कसने का, लेकिन कोचिंग संस्थान भी कोई विलेन तो हैं नहीं। सरकारी सुविधा की समुचित व्यवस्था न होने पर खाली स्पेस को वो भर रहे हैं। बच्चों को सेवा दे रहे और बदले में थोड़ा सेवा शुल्क ले रहे हैं। ये अलग बात है कि कुछ संस्थानों के संचालक सेवा और सेवा शुल्क से आगे बढ़ कर, कोचिंग संस्थानों के सजे बाजार में, शिक्षा को बड़ा कारोबार बना कर मेवा खाने में लग गए, और शुरू हुआ संस्थानों के बीच कॉरपोरेट स्टाइल वाला संघर्ष, अपने यहां ज्यादा से ज्यादा बच्चों की लुभाने का और यहीं वो उद्देश्य से भटकते नजर आने लगे। उद्देश्य नहीं भटकना चाहिए नहीं तो स्वभाविक रूप से खटकने लगेंगे और शायद कुछ ऐसा हुआ, कोचिंग संस्थानों के बीच वरचस्व की लड़ाई ऐसे मोच पर आई जहां सरकार की आंखो में बिगड़ते हालात खटकने लगे। तभी तो कार्रवाई की बात हो रही है। ऐसे में हम भी सवाल तो पूछेंगे कि कोचिंग पर सख्त सरकार शिक्षा मे होगा सुधार ?दीपक कुमार, सीनियर एंकर
गोपालगंज- बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षक अभ्यर्थियों और कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य में TRE-4 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार ने निर्णय ले लिया है और इसकी तैयारी अंतिम चरण में है। जुलाई महीने में BPSC को अधियाचन भेज दिया जाएगा, जिसके बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। समाहरणालय परिसर में आयोजित बीस सूत्री समिति की बैठक में शामिल होने पहुंचे शिक्षा मंत्री ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार काम कर रही है।शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर भी अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जून महीने के अंत तक ट्रांसफर से जुड़े सभी मामलों का निपटारा कर दिया जाएगा। राज्य सरकार शिक्षकों को राहत देने के उद्देश्य से स्थानांतरण नीति को अधिक सुविधाजनक बना रही है।उन्होंने बताया कि महिला शिक्षकों को उनके नजदीकी पंचायतों में पदस्थापित करने की व्यवस्था की जा रही है, जबकि पुरुष शिक्षकों को उनके गृह जिले में नियुक्ति देने की दिशा में काम चल रहा है।मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसी भी शिक्षक को दूसरे जिले में कार्यरत न रहना पड़े। नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों की पोस्टिंग उनके अपने जिले में सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।उन्होंने विश्वास जताया कि नई भर्ती प्रक्रिया और संशोधित स्थानांतरण नीति से शिक्षकों को काफी सुविधा मिलेगी। साथ ही विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में भी मदद मिलेगी।TRE-4 भर्ती का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए शिक्षा मंत्री का यह बयान बड़ी राहत और उम्मीद लेकर आया है।गोपालगंज से नमो नारायण मिश्रा की रिपोर्ट
दो दिन पहले तक अपने वीडियो के वायरल होने को लेकर विख्यात कोचिंग संचालक खान सर अक्सर 2 से लेकर 10 मुस्टंडो के बीच संगीनो के साए में दिख जाया करते थे, वो अचानक से मीडिया के सामने दुखड़ा रोने आ गए। बताया कि उनके कोचिंग पर प्रतिस्पर्धी संस्थान के संचालन ने गुंडे भेज कर हमला करवाया, उनपर गोलियां चली और वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि खान ग्लोबल में पढ़ने वाले बच्चों से नाम मात्र की फीस ली जाती है। दूसरे कोचिंग माफिया जैसे बच्चों को लूटते नहीं। इतना ही नहीं मौका देख खान सर उर्फ फैसल खान ने दूसरे प्रतिस्पर्धी संस्थान को लेकर खूब भड़ास निकाली। मानो मन में यही चल रहा हो बिंदु कोचिंग वाले के खिलाफ कि बाप का, दादा का, भाई का सबका बदला लेगा यह फैसल। फैसल ने आधी हकिकत और आधा फसाना ऐसा सुनाया कि पुलिस रेस हो गई। त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपों के आधार पर बिंदु कोचिंग संस्थान के संचालक समेत कुछ अन्य सहयोगियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।वीडियो ने पूरे मामले की जांच का रूख ही बदल दियाक्राइम पर जीरो टॉलरेंस वाली पुलिस ने शिक्षा जगत में अपराधिक गतिविधियों को लेकर आरोपों को गंभीरता से लिया और जांच को गति दी गई। जांच जैसे जैसे आगे बढ़ी नए खुलासे होने लगे, फैसल के आरोप में हकिकत कितनी और फसाना कितना ये आरोपी पक्ष की प्रेस कॉन्फ्रेंस और जारी किए गए वीडियो ने पूरे मामले की जांच का रूख ही बदल दिया। बयान वीर खान सर के शुरूआती बयान और शिकायती पत्र में ही विरोधाभास दिखा। मीडिया के सामने गोली चलाने के आरोपों को खान सर ने पुलिस के सामने नहीं दोहराया। बिंदु कोचिंग वाले के जारी किए गए वीडियो में खान ग्लोबल के गेट पर खान सर की मौजूदगी में गार्ड बंदूक लहराते और फायर करते साफ नजर आए।बिंदु कोचिंग संचालक के समर्थन में सैकड़ों छात्र सड़क पर उतरेबिंदु कोचिंग संचालक को फंसाने की बात कहते हुए सैकड़ों छात्र सड़क पर उतरे और पुलिस से न्याय की गुहार लगाई। नए वीडियो के कारण पुराने आरोप आधारहीन और विद्वेषपूर्ण लगने लगे। पुलिस ने पहले गार्ड के गिरेबां पर हाथ डाला, जरा सा जोर लगाया और गार्ड पूरा फसाना गाने लगे, बताने लगे कि गोली चलाई गई, पर खान सर के निर्देश पर, उन्होंने तो बस अपना काम किया। इधर ग्लोबल कोचिंग की गलियों से ये बात भी उड़ाई जाने लगी की जान पर आफत आई तो गार्ड से गोलियां चलवाई। तब तक पुलिस ने खान ग्लोबल के संचालक के खिलाफ कदमकुंआ थाने में FIR दर्ज करते हुए उड़ती उड़ती आ रही बातों की सच्चाई जानने के लिए टीम रवाना किया। पुलिस की हलचल की हवा लगते ही फैसल खान हवा हो गए!अब ये सच्चाई थी या ये भी फसाना जरूरी था इसका जांचा जाना, लेकिन पुलिस की हलचल की हवा लगते ही फैसल खान हवा हो गए। पता चला कि ग्लोबल कोचिंग संस्थान में जांच के लिए पुलिस आने की सूचना मिलते ही अपने वकीलों को बुलाया, राय मश्वरा किया और फिर गायब। अब पुलिस अलग अलग संभावित ठिकानों पर खान सर को तलाश रही है, वो मिले तो पता चले कि बिंदु कोचिंग के संचालक ने उन्हें प्रताड़िता किया, वो पीड़ित हैं या प्रतिस्पर्धी के नेम फेम में परेशान हो कर ये फसाना गढ़ा...पुलिस से आखिर कब तक फरार रहेंगे फैसल खान ... TO BE CONTINUED दीपक कुमार, सीनियर एंकर
होटल से लेकर हॉस्पिटल तक हादसों ने हाहाकार मचा रखा है। आराम के पल आफत के पल बन गए, स्वास्थ्य लाभ करते लोगों की सांसे उख़ड़ गई, लापरवाही की आग के आगोश में आए लोगों का दर्दनाक अंजाम दुनिया ने देखा। मृतात्मा की शांति की कामना की, दुख जताया, सांत्वना दी, मुआवजा घोषित किया और फिर आगे बढ़ गए। जबकि जरूरत थी ऐसे हादसों को उदाहरण बनाने की, तैयारी पुख्ता करने की, नियमों के अनुपालन से लेकर फायर फायटिंग तक की।सरकारी, संस्थागत और निजी स्तर पर आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्था बेहतर हो, कारगर हो। ऐसे हादसे को उदाहरण बनाया जाए, ये सुनिश्चित करने के लिए कि जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो और तय हो जवाबदेह के जिम्मेदारी का समुचित पालन न करने पर किन किन लोगों को हर स्तर पर क्या सजा मिले।हॉस्पिटल में हुआ हादसा तो हृदयविदारक है ही अभी-अभी होने के कारण देख सुन कर रोंगटे खड़े हो जाएं लेकिन पटना जंक्शन के सामने होटल में जो हुआ था उस हादसे की तपिश लोग भूल गए हों ऐसा भी नहीं है। दिल्ली के होटल में हुए हादसे ने वो याद फिर ताजा कर दी। होटल में हुई लापरवाही की बात चल ही रही थी कि तभी हॉस्पिटल में हुए हादसे ने हमारी तैयारी पर और हादसों से हमने क्या सबक लिया इस पर और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।ऐसे भी नहीं की हम अग्निकांड को लेकर सचेत नहीं। बिहार अग्निशमन सेवा और बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सभी जिलों में आग से बचाव के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाता रहा है। स्कूलो में बच्चों को बचाव के तरीके हर शनिवार सिखाए जा रहे हैं। कॉलनी में कार्यक्रम के जरिए लोगों को भी तैयार किया जा रहा। सब होने के बाद भी लापरवाह लोगों का क्या इलाज हो इसका जवाब किसी के पास नहीं है। नियम बताते हैं कि संस्थानों में आपात स्थिति से निपटने की सुविधा की जांच को लेकर गाइडलाइन निर्धारित है, जांच करने वाले लोग तय हैं, पर ये व्यवस्था कारगर है तो हादसों में लोग हताहत क्यों हो रहे और कारगर नहीं को उन पर क्या कार्रवाई हो रही है ये बड़ा सवाल है। ऐसे में सवाल तो पूछा जाएगा कि कि अस्पताल में चीख पुकार, अग्निकांड का कौन जिम्मेदार ? दीपक कुमार, सीनियर एंकर
पटना। राजधानी के मुसल्लहपुर हाट जहां हर दिन हजारों छात्र, दर्जनो कोचिंग संस्थानों में, भविष्य संवारने के सपने संजोए पहुंचते हैं। हर छात्र का अपना संघर्ष होता है, जिसका कोचिंग संस्थान के सहयोग से सामना करते हुए इतनी कोशिश जरूर होती है कि भले सबसे आगे नहीं निकल पाएं पर कम कम किसी नियुक्ती प्रक्रिया के मेरिट लिस्ट में जगह बना लें। अलग स्तर पर कोचिंग संस्थानों का संघर्षछात्रों के संघर्ष जहां खत्म होते हैं और सपने जहां पूरे होते हैं, वहां से कोचिंग संस्थानों के संचालक सपने संजोने लगते हैं। एक अलग स्तर पर उनके संघर्ष की शुरूआत होती है। संघर्ष सबसे ज्यादा रिजल्ट देने की, सपना सबसे सफल कोचिंग संस्थान होने का ताकि अगले बैच में सबसे ज्यादा स्टूडेंट उनके यहां एडमिशन कराएं। कोचिंग संस्थानों के इस संपने और संघर्ष के कारण मुसल्लहपुर हाट हॉट जोन बन चुका है। संघर्ष साजिश तक पहुंच चुका है। रिजल्ट रार की वजह बन चुका है। मेरिट लिस्ट को बड़ा दिखाने के चक्कर में बम चलने लगे हैं। क्या सरकार को पड़ता है फर्क !कभी जिन सड़कों पर छात्रों की बचकानी हरकतों के कारण हाथापाई दिखती थी वहां अब कोचिंग संचालकों के बीच सपनों के बाजार में, शिक्षा की दुकान पर, प्रचार की चकाचौंध में, छात्र जो उनके लिए ग्राहक मात्र हैं उन्हें लुभा कर अपने काउंटर तक ले आएँ दूसरे के नाम पर किचड़ उछालें और अपना नाम चमकाएं, बैंक बैलेंस बढ़ाएं और इस चक्कर में दो चार बम चल ही जांए, दो चार सिर फट ही जाएं, कुछ हड़्डियां टूट ही जाएं तो किसे फर्क पड़ता है। ऐसा भले कोचिंग संचालक सोचते रहे हों लेकिन फर्क पड़ता है। सरकार को फर्क पड़ता है। कोचिंग माफिया पर होगा वारछात्र हित को लेकर सचेत शिक्षा मंत्री को फर्क पड़ता है और अब कोचिंग संचालकों को भी जल्दी फर्क का पता चलेगा जब सरकार उनकी मनमानी पर सेंसर लगाएगी। कोचिंग संस्थानों को लेकर नियमन लाएगी और निगरानी में रखेगी। जिसकी शुरूआत पहले भी जारी हो चुके एक आदेश को फिर से जारी कर कोचिंग संचालकों को सचेत होने का इशारा कर दिया गया है। राजधानी में प्रशासन ने कोचिंग संचालको को स्कूल टाइम में कोचिंग खोलने पर रोक लगाने का निर्देष जारी कर दिया है। ये भी साफ किया गया है कि गर्मी की छुट्टियों के बाद इस आदेश के अनुपान को कड़ी निगरानी के माध्यम से मॉनिटर किया जाएगा और उलंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में सवाल तो बनता है कि नई नीति कबतक होगी तैयार और क्या सच में अब कोचिंग माफिया पर होगा वार ? पटना से दीपक शर्मा की रिपोर्ट
आम जनता मैंगो पिपल की जीवन गाथा में तमाम उतार चढ़ाव के बीच जो चीज अनवरत बनी रहती है वो है संघर्ष। आम जनता को ये संघर्ष सूट भी करता है। यही तो उनकी पहचान है, यही तो अंतर है, आम और खास में। लेकिन जब एक मंत्री संघर्ष की बात करें और मंच से साफ कहे कि विभाग कोई भी हो जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रहेगा, तो समझना चाहिए कि विजय के विजय में विघ्न है। समस्या विकराल है। इतना कि विजय सिन्हा को विजय बिहारी बनना पड़ रहा है। बिहार की आम जनता के लिए, किसानों के लिए, विजय-पथ से कांटो को चुन चुन कर हटाते हुए हाथ लहूलुहान भी हो जाए तो परवाह नहीं। संघर्ष करेंगे, वो भी उस सिस्टम से जो पग पग पर रोड़ा अटकाने, रास्ता भटकाने और काम लटकाने को लेकर कुख्यात हो चुका है। विजय पथ को उनसे सुरक्षित करते हुए जनता के लिए सुगम्य, सुलभ, सहज बनाए रखना विजय सिन्हा के लिए भी सरल नहीं। एक बार पहले भी उन्होंने प्रयास किया, लेकिन बताते हैं कि परीक्षा की तैयारी के बाद प्रश्नपत्र ही बदल गया।विभाग में कार्रवाई और कतिपय कारणों से विभाग बदलने को लेकर जो भी विवाद विजय सिन्हा से जुड़ा, वो अब पुरानी बात हो गई है लेकिन उन्होंने उसे यूं ही भूला दिया ऐसा भी नहीं। कुछ कसक होगी ही जो बात भुलाए नहीं भुलती, पर वहां रूकना भी मुनासिब नहीं। संघर्ष पथ के आगे ही विजय-पथ की शुरूआत होती है। विभाग भले बदल दिया गया पर अब किसानों के हक के लिए उसी सिस्टम से संघर्ष को विजय सिन्हा तैयार हैं। बात इशारो में भले हुई पर इरादे साफ साफ झलक रहे। नए विभाग के नाते उन्हें बड़ा बाबू कुछ भी पढ़ा लिखा कर परीक्षा में बिठा दें, ऐसे विद्यार्थी वो नहीं, संघर्ष करेंगे, सीखेंगे, समझेंगे और फिर कांटो की सफाई भी करेंगे, शिकायतों पर कार्रवाई भी करेंगे पर जब जज्बा सिस्टम हिला देने वाला हो तो कंपन सरकार और समाज तक महसूस होना स्वभाविक है। ऐसे में फिर थोड़ा संदेह होता है कि कहीं परीक्षा में प्रश्न ही न बदल जाए। ऐसे में सवाल तो पूछेंगे कि ‘विजय-पथ’ में कौन रूकावट डाल रहा है?पटना से दीपक शर्मा की स्पेशल रिपोर्ट
पटना : विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता देव ज्योति ने बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट और उद्योग विभाग के स्पष्ट आदेशों के बावजूद उद्यमियों को न्याय नहीं मिल रहा, जिससे बिहार में निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है।देव ज्योति ने बताया कि मेसर्स जय माता दी कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड को वर्ष 2012 में पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र, पटना में एक स्टार होटल परियोजना के लिए भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन आज तक कंपनी को जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि आवंटित भूमि के एक हिस्से पर PHED का अवैध कब्जा होने के कारण BIADA न तो आवंटन पत्र जारी कर सका और न ही जमीन का हस्तांतरण कर पाया। इस मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट और बिहार सरकार के उद्योग विभाग की अपीलीय प्राधिकरण में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली।देव ज्योति ने कहा कि 27 अगस्त 2021 को उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव ने आदेश दिया था कि BIADA तीन महीने के भीतर जमीन का खाली कब्जा उपलब्ध कराए या समान क्षेत्रफल का वैकल्पिक भूखंड दे। इसके बावजूद अब तक न तो जमीन सौंपी गई और न ही वैकल्पिक भूखंड उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि इस देरी के कारण कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। साथ ही प्रस्तावित निवेश और रोजगार सृजन की योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।VIP प्रवक्ता ने कहा कि बिहार सरकार निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता निवेशकों के विश्वास को तोड़ रही है। उन्होंने उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर BIADA को आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की।देव ज्योति ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन उद्यमियों की समस्याओं के समाधान में तत्परता नहीं दिखाएंगे, तो बिहार में निवेश आकर्षित करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से भी इस मामले में हस्तक्षेप कर उद्यमियों के हितों की रक्षा करने की अपील की।इस संबंध में देव ज्योति ने उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह को ज्ञापन भी सौंपा है।
पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को अधिवेशन भवन में राज्य के सभी जिलों के जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला एवं समीक्षात्मक बैठक का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। बैठक में विभिन्न योजनाओं की प्रगति, विधि-व्यवस्था की स्थिति तथा जनसेवा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत समीक्षा की गई। इस अवसर पर कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक एवं अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है, जिसमें आप सब उपस्थित हैं। इस कार्यशाला में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक ने अपनी बातें रखी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा 27 वर्षों का राजनीतिक अनुभव है। 19 मई, 1999 को पहली बार सदन पहुंचा। मंत्री, विधायक रहते हुए प्रशासन के साथ-साथ जनता की समस्याओं से अवगत हुआ। जनप्रतिनिधि के तौर पर इस बात का अनुभव हुआ कि जिले के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक अगर अच्छा काम करते हैं तो जनप्रतिनिधियों के पास लोगों की समस्याओं से जुड़े कम मामले आते हैं। जिले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के बेहतर कार्य का सीधा लाभ वहां की जनता को मिलता है। आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तथा गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में देश में कई अप्रासंगिक कानूनों को रद्द किया गया। प्रशासन को पारदर्शी एवं सुलभ बनाया गया। आदरणीय नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में पिछले 20 वर्षों में बिहार विकास के पथ पर आगे बढ़ा है। कानून-व्यवस्था, बिजली, सड़क सहित सभी क्षेत्रों में प्रगति हुई। राज्य में सुशासन स्थापित रहने से इसका लाभ राज्यवासियों को मिला है।क्राइम, करप्शन और कम्युनिलिज्म से कोई समझौता नहीं-CM मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों की प्राथमिकता है राज्य में कानून का राज कायम रहे और जनता को इसका सीधा लाभ मिले। सुशासन तभी स्थापित दिखेगा जब इसका लाभ त्वरित रूप से समय पर मिलेगा। क्राइम, करप्शन और कम्युनिलिज्म से कोई समझौता नहीं होगा। लोगों के बीच सुशासन का परसेप्शन स्थापित करना है। कोई व्यक्ति बाहर से बिहार में आए उसे सुशासन का प्रभाव दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार में उद्योग स्थापित करने के लिए आनेवाले लोगों को हर प्रकार की सुविधा सरकार उपलब्ध करवा रही है। 20 नवंबर, 2025 तक राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट का लक्ष्य रखा गया है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक अगर किसी इंडस्ट्रीलिस्ट को सुरक्षा और सुविधा की गारंटी अपने जिले में निजी तौर पर उपलब्ध कराते हैं तो उद्योगपति पूरी तन्मयता से अपना उद्योग लगाएगा और उसको विस्तार देगा। सरकार कानून बनाती है, नयी-नयी योजनाएं बनाती है उसे जमीन पर उतारने का काम आप सबको करना होता है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाएं और जो भी कानून है और योजनाएं बनाई गई हैं उसे जमीन पर ठीक ढंग से लागू करें। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक अपने कार्यालय में निश्चित रूप से सुबह 10 से दिन में 1 बजे तक बैठें, लोगों से मिलें और उनकी समस्याओं का समाधान करें। आप जितने लोगों से मिलेंगे जिले के बारे में उतनी अधिक जानकारी होगी और जिले के विकास में आपको सुविधा होगी। बिहार में काम करनेवाले लोगों और यहां पर रहनेवाले लोगों को बिहार में क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं, ये पता होना चाहिए। लोगों के लिए ईज ऑफ लिविंग स्टैंर्ड होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के कई मामले आ रहे हैं, आपदा प्रबंधन विभाग से पीड़ित परिवारों को 4 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इस पर व्यवस्थित ढंग से काम करें।बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा पर किसी तरह की कोताही नहीं-CM मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा पर किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। पुलिस दीदी का कॉन्सेप्ट लाया गया है उसको बेहतर ढंग से क्रियान्वित करें। बच्चियां सुरक्षित स्कूल आएं और जाएं ये सुनिश्चित करें। भागलपुर में कार्यपालक पदाधिकारी के साथ जो घटना हुई यह दुःखद है। उन्होंने बहादुरी के साथ अपराधियों का मुकाबला किया और अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनके आश्रित को 25 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान राज्य सरकार द्वारा प्रदान किया जा रहा है और उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। सरकार ऐसे कर्तव्यनिष्ठ पदाधिकारियों के परिजनों के साथ है। अपराधी किसी प्रकार का दुस्साहस न करें इसको लेकर पुलिस मुस्तैदी के साथ कार्य करे।शराब के अवैध कारोबार को ध्वस्त करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने शराबबंदी कानून लागू किया है। शराबबंदी के सफल क्रियान्वयन को लेकर बेहतर ढंग से कार्य करें। शराब बेचनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। जो कारोबार अवैध है उसे पूरी तरह ध्वस्त करें। नारकोटिक्स के खिलाफ सघन अभियान चलाएं। शराब और मादक पदार्थों की तस्करी में पुलिस और प्रशासन के जो लोग संरक्षण प्रदान कर रहे हैं उन्हें चिह्नित कर सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि हमलोग पंचायत स्तर पर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर लगाएंगे जिसमें समस्याओं से संबंधित जो भी आवेदन आएगा उसमें संबंधित अधिकारी को निश्चित तौर पर 30 दिन के अंदर उस आवेदन पर निर्णय देना होगा। लटकाने भटकाने की प्रवृत्ति नहीं रखें, अधिकारी और पुलिस जनता के सहयोगी की भूमिका में रहें। ब्लॉक, अंचल और थाना की रियल मॉनीटरिंग और समीक्षा पर जोरमुख्यमंत्री ने कहा कि ब्लॉक, अंचल एवं थाना का मुख्यमंत्री कार्यालय प्रतिदिन रियल मॉनीटरिंग करेगा और कार्यों की समीक्षा की जाएगी। ब्लॉक, अंचल एवं थाने में सी०सी०टीवी अवश्य लगाएं ताकि वहां की गतिविधियों और अवांछित लोगों पर नजर रखी जा सके। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई गयी है जिस पर तेजी से काम करें। जमीन चिह्नित कर उसपर आगे की कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने की जरूरत है। मरीजों को रेफर करने की प्रवृत्ति खत्म करें, लोगों को इलाज करने की प्रवृत्ति विकसित करें। अगर बीमारी का इलाज वहां संभव नहीं है तभी जिला से बाहर मरीज को रेफर करना चाहिए। 1 जुलाई तक सभी जिला अस्पताल और 15 अगस्त तक अनुमंडल अस्पताल को और विशिष्ट बनाएं और यह सुनिश्चित करें कि मरीजों को बाहर रेफर नहीं किया जाय। उन्होंने कहा कि मॉडल स्कूल को नेतरहाट और सिमुलतला विद्यालय की तर्ज पर विकसित करें। सभी 533 प्रखंड में मॉडल स्कूल बनाने के लिए पूर्णरूपेण कार्य करें। विद्यालय को ऐसा विशिष्ट बनाएं कि वहां बच्चे को पढ़ाने के लिए लोग उत्सुक रहें। सभी प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोले जा रहे हैं वहां ठीक ढंग से पढ़ाई की व्यवस्था रखें।अगले 5 वर्षों में 1 करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने अगले 5 वर्षों में 1 करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। अगर हम सब ठीक से काम करें तो 5 करोड़ तक लोगों को रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं। श्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में हमलोगों की सरकार ने जाति आधारित गणना कराई थी। अब जनगणना का कार्य केंद्र सरकार के द्वारा कराया जा रहा है उसमें सभी हाऊस होल्ड को ठीक से चिह्नित करें। कौन कहां से आया है, यहां का निवासी कैसे है, इन सब चीजों की जानकारी प्राप्त करें। किसी भी धर्म के लोग हों, वे भारत के निवासी हैं तो उन्हें सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी लेकिन किसी भी धर्म के हों अगर घुसपैठिया है तो उन्हें बिहार से बाहर किया जाएगा।बिहार दर्शन के लिए दो दिन की छुट्टी-मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के पदाधिकारियों/कर्मचारियों को बिहार दर्शन के लिए दो दिन की छुट्टी दी जाएगी। जिस दौरान वे बिहार के गौरवशाली अतीत, इतिहास और यहां की विरासत को ठीक ढंग से जानेंगे। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में कम-से-कम 50 डेस्टिनेशन स्पॉट को चिह्नित कर उसे और विकसित करें। उन्होंने कहा कि भारत तभी समृद्ध बनेगा जब बिहार समृद्ध बनेगा। आप सभी का अपना-अपना अनुभव है, अपने अनुभव से बिहार को समृद्ध बनाइए। सुशासन, विकास, न्याय, पर्यटन, बिहार के नौजवानों को रोजगार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की अपराधियों द्वारा हत्या की जाती है या कोई आपराधिक घटना होती है तो दोषियों को चार्जशीट दायर कर उसे 48 घंटे के अंदर अरेस्ट करें। 12 से 13 दिनों के अंदर सख्त कार्रवाई हो जो लोगों को दिखे। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता की सेवा ही हमारा सर्वोच्च दायित्व है। सुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के माध्यम से विकास की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे ये हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम उम्मीद करते हैं कि सभी अधिकारी संवेदनशीलता, तत्परता और पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ जनसेवा सुनिश्चित करेंगे। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने दिया प्रजेंटेशन कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिदेशक, ऑपरेशन कुंदन कृष्णन ने विधि व्यवस्था, अपराध नियंत्रण को लेकर प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी।कार्यक्रम को मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत एवं पुलिस महानिदेशक श्री विनय कुमार ने भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री को मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने हरित पौधा भेंटकर स्वागत किया।बैठक में मौजूद रहे ये तमाम पदाधिकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी, पुलिस महानिदेशक, ऑपरेशन कुंदन कृष्णन, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, वाणिज्य कर विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ० चंद्रशेखर सिंह सहित अन्य वरीय पदाधिकारीगण, प्रमंडलीय आयुक्त, विभिन्न प्रक्षेत्रों के पुलिस महानिरीक्षक/पुलिस उप महानिरीक्षक, सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक / पुलिस अधीक्षक उपस्थित थे।रिपोर्ट-संजय कुमार
रोहतास। नर्सिंग होम में मरीजों के साथ अनहोनी का मामले थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला रोहतास जिला अंतर्गत लालगंज नहर स्थित समर्पण हॉस्पिटल का है। यहां बीते 8 अप्रैल को एक जीएसटी अधिकारी के नवजात बच्चे की मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने नर्सिंग होम पर लगाया लापरवाही का आरोपवही पीड़ित परिवार ने इसके लिए समर्पण नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप लगाया है। हालांकि नर्सिंग होम संचालक डॉ कमलेश कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। बचाव में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से रोहतास जिला अध्यक्ष डॉ केएन तिवारी सहित संगठन से जुड़े अन्य चिकित्सकों ने प्रेसवार्ता की और सारी बातें रखी। हालांकि एक कराहती मां बहन ने अपनी सूनी गोद को लेकर निजी नर्सिंग होम की लापरवाही पर शिकायत दर्ज कराई है।जांच पड़ताल के लिए मेडिकल टीम गठितइसके बाद सासाराम एसडीएम डॉक्टर नेहा कुमारी के नेतृत्व में गठित मेडिकल टीम ने पिछले तीन दिन समर्पण हॉस्पिटल में जांच पड़ताल की। जांच पड़ताल में कई तरह की खामियों के संकेत मिले हैं, जिसके बाद सासाराम एसडीएम डॉ नेहा कुमारी ने जांच पड़ताल के साथ प्रतिवेदन को आगे भेजने की बात कही है। खबरों की माने तो संबंधित नर्सिंग होम पर प्रशासन की कार्रवाई सुनिश्चित है। फिलहाल मामले में नर्सिंग होम के संचालक डॉक्टर कमलेश कुमार तथा चिकित्सक अरविंद कुमार पर एफआईआर दर्ज की गई है। जिसकी पुष्टि सासाराम एसडीपीओ -2 कुमार वैभव ने भी की है। बहरहाल जरूरत है रोहतास जिले में इस तरह के नर्सिंग होम पर लगातार कार्रवाई करने की ताकि आगे किसी मां की गोद सूनी न हो पाए। रोहतास से कशिश न्यूज के लिए दयानंद तिवारी की रिपोर्ट
पटना। बिहार राजस्व सेवा महासंघ के संयुक्त मोर्चा ने प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को फिलहाल स्थगित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है। यह हड़ताल 09 मार्च 2026 से शुरू हुई हड़ताल को 50 दिनों के बाद स्थगित कर दिया गया है। संयुक्त मोर्चा ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और जनता को असुविधा से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है।4 मई से पदस्थापन स्थल पर वापस योगदान देंगे राजस्व कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के सभी सदस्य 04 मई 2026 को अपने-अपने पदस्थापन स्थल पर वापस योगदान देंगे। संगठन ने राज्य सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर पूर्ण आस्था और विश्वास व्यक्त किया है। साथ ही उम्मीद जताई है कि सरकार राजस्व सेवा संवर्ग को सुदृढ़ बनाने के लिए जल्द ठोस कदम उठाएगी और 05 मार्च 2026 को प्रस्तुत 11 सूत्री मांग पत्र पर गंभीरता से विचार करेगी।मुख्य मांगों में भूमि सुधार उप समाहर्ता के पद को पूर्ण रूप से राजस्व विभाग के प्रशासनिक और कार्यात्मक नियंत्रण में लाने तथा सेवा संवर्ग के सभी अधिसूचित पदों पर राजस्व सेवा अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करना शामिल है। संयुक्त मोर्चा ने कहा कि इन मांगों के समाधान से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनेगी।मांगें नहीं मानी गईं तो फिर जायेंगे हड़ताल पर- संयुक्त मोर्चाहालांकि, संगठन ने स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि यदि दो महीने के भीतर मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे पुनः लोकतांत्रिक और वैधानिक तरीके से हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे। संयुक्त मोर्चा ने संवाद और सहयोग के माध्यम से समाधान निकालने की प्रतिबद्धता दोहराई है।रिपोर्ट- संजय कुमार