Hindi News / कौन फर्जी, कौन फटेहाल, जांच में होगा क्या खुलासा ?

मदरसे और संस्कृत स्कूलों की हकीकत क्या? : कौन फर्जी, कौन फटेहाल, जांच में होगा क्या खुलासा ?

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What is the reality of Madrasas and Sanskrit schools? What is the reality of Madrasas and Sanskrit schools?

बिहार में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बदहाली के दौर से उबारने को लेकर उत्क्रमित किए जाने का उपाय आजमाया गया, यानि उपलब्ध संसाधनों का सधा हुआ उपयोग करते हुए सिस्टम को अपग्रेड कर दिया जाए। समय के साथ आवश्यक्ता अनुसार उसमें सुधार जारी है। हर वर्ग के लिए भवन में अलग-अलग कक्षाओं की व्यवस्था हो, पढ़ाने के लिए पर्याप्त योग्य शिक्षक हों, जिससे छात्र शिक्षक अनुपात के राष्ट्रीय औसत वाली आवश्यक्ता पूरी हो, ब्रेक में बढ़िया पोषक आहार मिले, पठन-पाठन में कोई प्रॉब्लम ना हो। ये तो मुख्य धारा की बात हुई जो हर समय सबकी नज़र में अभिभावकों के रडार परअधिकारियों की निगरानी में मंत्री की मॉनिटरिंग के रेंज में रहता है, लेकिन थोड़ा किनारे देखें तो और दो धारा का पता चलेगा, संस्कृत विद्यालय और मदरसा और दोनो सामाजिक रूप से अपने-अपने समुदाय विशेष के लिए विशेष महत्व रखने और चर्चा के केन्द्र में रहने के बाद भी उपेक्षित रहे हैं।

ऐसे नहीं है कि सरकार ने उन्हें नजरअंदाज कर रखा है। दोनो के लिए अलग से बोर्ड गठित है। बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड और बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड फिर अनुदान और वजीफा आसानी से और बहुतायत से उपलब्ध कराया जाता रहा है, फिर भी संस्कृत विद्यालयों और मदरसों से संबंधित आबादी की पारंपरिक पठन-पाठन में रूची, शौक्षणिक प्रक्रिया को लेकर उनकी संवेदनशीलता, सरकार पर व्यवस्था में गुणवत्तापूर्ण सुधार के लिए दबाब बनाने का दम, शौक्षणिक गुणवत्ता को समानुपातिक रूप से प्रभावित करता है। करीब 3500 मदरसो में से करीब 2 हजार सरकारी अनुदान प्राप्त हैं, तो करीब 658 संस्कृत विद्यालयो में 531 अनुदानित हैं। जिसका महीनों भुगतान लंबित ही रहता है। मुख्यधारा के साथ नई सरकार में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने संस्कृत विद्यालयों और मदरसों की व्यवस्था बेहतर करने की बात कही है।

उसके लिए जांचा जाएगा उनका बही खाता, उनकी संबद्धता, सुधार को लेकर संचालकों की इच्छाशक्ति। वैसे बिहार सरकार मदरसों में दीनी तालीम के साथ-साथ आधुनिक विषयों को भी बढ़ावा दे रही, डिजिटल बुनियादी ढांचे और स्मार्ट क्लास की भी शुरुआत की गई है। इतना होने के बावजूद शिक्षा मंत्री को लगता है कि लूप लाइन में चलने वाली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा लूपहोल है। जिसकी पड़ताल की जाएगी तभी आगे कदम उठाया जाएगा। अब जांच में किसकी कहां कहा गड़बड़ी उजागर होगी, ग़ड़बड़ी करने वाले संचालको से लेकर सरकार और सिस्टम तक जांच की आंच पहुंच सकती है, कहां ताला लगेगा कहां हथकड़ी, इस बात से खलबली मची है। ऐसे में संस्कृत विद्यालय मदरसों की जांच में किस पर आएगी आंच सवाल तो बनता है।

पटना से दीपक शर्मा की स्पेशल रिपोर्ट