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विजिलेंस जांच में बड़ी बाधा : 3545 नियोजित शिक्षकों के फोल्डर नहीं मिले, शिक्षा विभाग से मांगी गई जानकारी भी अधूरी

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पटना: बिहार में नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान एक बड़ा मामला सामने आया है. निगरानी (विजिलेंस) विभाग को राज्य के विभिन्न जिलों से कुल3545नियोजित शिक्षकों के फोल्डर अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. इन फोल्डरों के अभाव में शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच प्रभावित हो रही है और पूरी प्रक्रिया में देरी हो रही है. वहीं, शिक्षा विभाग ने अब तक यह स्पष्ट जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई है कि कितने शिक्षकों की सेवा समाप्त की गई है या कितनों पर कार्रवाई की गई है.

जानकारी के अनुसार, निगरानी विभाग वर्ष2015से नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों की जांच कर रहा है. इस दौरान सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को संबंधित शिक्षकों के मूल अभिलेख और फोल्डर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे. हालांकि कई वर्षों के बाद भी हजारों शिक्षकों के फोल्डर उपलब्ध नहीं हो सके हैं, जिससे जांच कार्य अधूरा बना हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार कुछ जिलों ने सभी फोल्डर उपलब्ध करा दिए हैं, जबकि कई जिलों में बड़ी संख्या में फोल्डर अभी भी गायब हैं. सबसे अधिक फोल्डर नहीं मिलने वाले जिलों में सीवान, मधेपुरा, रोहतास, वैशाली, शिवहर, कटिहार और पूर्णिया सहित कई जिले शामिल हैं. वहीं दरभंगा, सहरसा, अरवल, मुंगेर और सुपौल जैसे कुछ जिलों ने सभी उपलब्ध फोल्डर निगरानी विभाग को सौंप दिए हैं.

निगरानी विभाग का कहना है कि फोल्डर उपलब्ध नहीं होने के कारण कई मामलों की जांच पूरी नहीं हो पा रही है. विभाग लगातार जिला शिक्षा कार्यालयों से संपर्क कर आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने का आग्रह कर रहा है. जिन शिक्षकों के प्रमाणपत्रों और अभिलेखों में गड़बड़ी मिलेगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. यदि किसी शिक्षक के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाते हैं तो उनकी सेवा समाप्त करने के साथ-साथ सार्वजनिक धन की वसूली भी की जा सकती है.

बताया गया है कि नियोजन इकाइयों और जिला शिक्षा कार्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी लंबित फोल्डर शीघ्र उपलब्ध कराएं ताकि जांच प्रक्रिया पूरी की जा सके. निगरानी विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अभिलेख उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है.

राज्यभर में नियोजित शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच लंबे समय से चल रही है. ऐसे में3545 फोल्डरों का अब तक उपलब्ध नहीं होना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है. माना जा रहा है कि सभी अभिलेख मिलने के बाद जांच में तेजी आएगी और फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--