Hindi News / पुलिसिया बर्बरता पर तत्कालीन थानाध्यक्ष कमल नयन पर FIR का आदेश,जाति पूछने के...

पटना हाईकोर्ट सख्त : पुलिसिया बर्बरता पर तत्कालीन थानाध्यक्ष कमल नयन पर FIR का आदेश,जाति पूछने के बाद पिटाई का आरोप

Edited By:  |
patna highcourt khakhi ki gundagardi par sakht patna highcourt khakhi ki gundagardi par sakht

पटना:पटना हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ ने एक बेहद गंभीर मामले की सुनवाई की है. बक्सर जिले के मुरार थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष (SHO) कमल नयन पांडे के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है.कोर्ट ने इस मामले की जांच बिहार पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग सीआइडी को सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं.

कोर्ट ने राज्य के.पुलिसया रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि नाजी जर्मनी जैसी पुलिस नहीं बन सकती हैं. बिहार में खाकी के बढ़ते खौफ और खाकीधारियों की गुंडागर्दी पर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है.

ये मामला भोजपुर जिले के गंगहर निवासी पीड़ित मनीष कुमार (पिता: शिवशंकर यादव) ने कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. 4 जुलाई, 2024 को मनीष बक्सर जिले के चौगाईं गांव में अपने दोस्त की दुकान पर गए थे.दोपहर करीब 2 बजे जब वह शौच के लिए जा रहे थे,तभी मुरार पुलिस स्टेशन की गाड़ी वहां पहुंची. आरोप है कि थानाध्यक्ष कमल नयन पांडे ने उनका नाम और जाति पूछा.जाति का पता चलते ही थाना प्रभारी और पुलिसकर्मियों ने गाली-गलौज करते हुए लाठियों से उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी,जिससे उनके दोनों पैर टूट गए.

पुलिस ने कोर्ट में दलील दी थी कि पीड़ित बारिश के मौसम में फिसलकर गिर गया था,जिससे उसके पैर टूटे थे. हालांकि,कोर्ट में पेश किए गए एक्स-रे रिपोर्ट और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस की इस कहानी को सिरे से खारिज कर दिया.कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई के दौरान जस्टिस जितेंद्र कुमार ने कानून व्यवस्था पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाते हुए कहा किअगर पुलिस के इस तरह के आचरण को नियंत्रित नहीं किया गया,तो देश में कानून का शासन और नागरिकों की जीवन व स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा खत्म हो जाएगी. राष्ट्रीय पुलिस नाजी जर्मनी जैसी बन सकती है.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी द्वारा नागरिक पर किया गया ऐसा बर्बर हमला किसी भी स्थिति में 'सरकारी ड्यूटी' का हिस्सा नहीं माना जा सकता.इसलिए इसके लिए धारा 197 CrPC / 218 BNSS के तहत किसी पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं है.

कोर्ट ने बिहार पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि वह मुरार थाने से प्राथमिकी दर्ज होने की रिपोर्ट लें और मामले की निष्पक्ष जांच सीआईडी को सौंपें. साथ ही,30 दिनों के अंदर इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष पेश करने को कहा है.

कोर्ट ने पीड़ित को यह छूट भी दी है कि यदि वह सीआईडी की जांच से संतुष्ट नहीं होता है,तो वह सीबीआई जांच के लिए पुन याचिका दायर कर सकता है.