JHARKHAND NEWS : JSSC CGL विवाद: परीक्षा से पहले ही हाथ लग गया था प्रश्नपत्र—अभय तिवारी का सनसनीखेज दावा
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर से बहुत बड़े सवाल खड़े हो गए हैं! रांची से एक सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को लेकर टीडीपीएल (TDPL) कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने सीआईडी के सामने जो खुलासे किए हैं, उसने हर किसी को चौंका दिया है। अभय तिवारी का दावा है कि उसे परीक्षा से पहले ही प्रश्न और उत्तर मिल गए थे, जिसके दम पर उसका और उसके परिवार का चयन हुआ। हालांकि, सीआईडी ने अभी तक इस बयान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस खुलासे से जांच में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है।सीआईडी की पूछताछ में अभय तिवारी ने बताया कि पहले जेएसएससी की परीक्षाओं के संचालन का काम टीडीपीएल कंपनी के पास था। लेकिन कम दर पर काम करने से इनकार करने के बाद टीडीपीएल ने यह काम छोड़ दिया और जेएसएससी ने कंपनी को डी-इंपैनल कर दिया।
इसके बाद परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबल (Webel) नामक एजेंसी को दी गई। अभय तिवारी का आरोप है कि इसी वेबल एजेंसी से जुड़े लोगों ने उसे सीजीएल परीक्षा के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराए थे।अभय के मुताबिक, वेबल एजेंसी के मालिक पटना के मिथिलेश सिंह और खूंटी के उमाकांत प्रमाणिक थे। इन्हीं के जरिए उसे प्रश्न-उत्तर मिले। इतना ही नहीं, मिथिलेश सिंह के सहयोगी राकेश सिंह ने बोकारो के एक आवास में 15 अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर रटवाए थे। आरोप है कि एजेंसी ने 65 प्रश्नों के बदले सभी 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये वसूले थे.अभय तिवारी ने यह भी स्वीकार किया कि इसी फिक्सिंग के कारण उसका, उसके भाई अक्षय तिवारी और उसकी पत्नी सुषमा कुमारी का चयन हुआ।वर्तमान में अक्षय तिवारी महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, धुर्वा में कार्यरत हैं।सुषमा कुमारी निगरानी विभाग में पदस्थापित हैं।जबकि अभय तिवारी खुद प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के रूप में पोडैयाहाट में नियुक्त हुआ था।
दूसरी तरफ, टीडीपीएल के अकाउंटेंट रक्षक सिंह पर भी सीआईडी ने शिकंजा कस दिया है। रक्षक सिंह को 6 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि आरोप है कि उसने कंपनी में रहते हुए गलत तरीके से जेपीएससी पीटी परीक्षा दी और पास भी हो गया। रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद उसे सोमवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।





