JHARKHAND NEWS : पुरानी नौकरी छोड़ी, नई मिली तो रद्द हो गई! JSSC CGL पर संकट, अब कोर्ट जाएंगे अफसर
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग—यानी JSSC की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा और उससे जुड़ी चयन प्रक्रियाओं को लेकर राज्य सरकार के हालिया फैसलों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस निर्णय का सीधा असर पाकुड़ जिले समेत राज्यभर में हाल ही में नियुक्त हुए कई युवा अधिकारियों के भविष्य पर पड़ने की संभावना है। राज्य सरकार ने CGL के साथ-साथ TDPL के माध्यम से वर्ष 2014 से अब तक आयोजित कई परीक्षाओं और उनकी चयन प्रक्रियाओं को जांच के दायरे में रखा है। इस कदम के बाद जिले में CGL के जरिए विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे नव-नियुक्त अधिकारियों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बन गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकेले पाकुड़ जिले के सभी छह प्रखंडों में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी यानी MO ने योगदान किया है। इनमें—
पाकुड़ में संजय किस्कु
हिरणपुर में सचिन कुमार
महेशपुर में इंद्रजीत राउत
अमड़ापाड़ा में बुलु कुमार
लिट्टीपाड़ा में संजय कुमार राय और
पाकुड़िया में मणिकांत तिवारी शामिल हैं।इसके अलावा, जिले में चार श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी—अनुप्रिया सोरेन, पिंटू कुमार, प्रशांत गुप्ता और अंकित कुमार भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। साथ ही, चार अंचल निरीक्षक और चार प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों ने भी इसी प्रक्रिया के तहत योगदान किया था। परीक्षा और चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद अब इन अधिकारियों का भविष्य सरकार के अगले निर्देशों पर टिक गया है। कई अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया पार करने के बाद निष्ठापूर्वक पद संभाला है। उनका तर्क है कि यदि प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी थी, तो उसकी जांच और सजा दोषियों को मिलनी चाहिए, न कि सभी को एक साथ प्रभावित किया जाए। स्थिति यह है कि इनमें से कई ऐसे अधिकारी भी हैं जिन्होंने अपनी पूर्व की नौकरी छोड़कर यहां योगदान दिया था। ऐसे में अनिश्चितता के इस दौर में कुछ अधिकारियों ने न्याय के लिए न्यायालय की शरण लेने की भी तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का यह कदम भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच के उद्देश्य से उठाया गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार नए सिरे से परीक्षा और नियुक्ति को लेकर क्या नया निर्देश जारी करती है।





