Hindi News / राज्य को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर सीएम हेमंत का फोकस

झारखंड मंत्रालय में समीक्षा बैठक : राज्य को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर सीएम हेमंत का फोकस

Edited By:  |
jharkhand mantralay mein samiksha baithak jharkhand mantralay mein samiksha baithak

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विभागीय समीक्षा को लेकर एक्शन मोड में है. सोमवार को प्रोजेक्ट भवन मेंवित्त और वाणिज्य कर विभाग की समीक्षा बैठक हुई. राज्य की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई. बैठक में राजस्व व्यवस्था, केंद्र से मिलने वाली बकाया फंड, मनरेगा, नल-जल योजना और CSR फंड जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में अधिकारियों को कहा गया कि मुख्यमंत्री की सोच स्पष्ट है कि झारखंड सिर्फ केंद्र सरकार पर निर्भर ना रहे, बल्कि राज्य में उपलब्ध संसाधनों के जरिए राजस्व संग्रह बढ़ाकर आर्थिक मजबूती हासिल करे. बताए कि सीएम हेमंत सोरेन लगातार 11 जून तक सभी विभागों की समीक्षा करेंगे.

मनरेगा का नाम बदलने से राज्य पर बढ़ा वित्तीय बोझ

सरकार की ओर से बताया गया कि केंद्र सरकार के पास झारखंड का करीब पांच हजार करोड़ रुपये जीएसटी बकाया है, जिसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है. वहीं, मनरेगा योजना में बदलाव और “GRAM G” व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ने की बात भी सामने आई। पहले 90-10 अनुपात में राज्य को सीमित अंशदान करना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था के बाद राज्य सरकार पर करीब छह हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ने की संभावना जताई गई. इसके अलावा नल-जल योजना को लेकर भी कहा गया कि शुरुआत केंद्र सरकार ने की लेकिन बाद में वित्तीय जिम्मेदारी राज्य पर डाल दी गई, जिससे राज्य का खर्च और बढ़ा है.

कमर्शियल टैक्स विभाग में संसाधनों की कमी पर चर्चा

बैठक में कमर्शियल टैक्स विभाग की स्थिति पर भी चर्चा हुई. अधिकारियों ने बताया कि विभाग राज्य को करीब 25 हजार करोड़ रुपये टैक्स के रूप में देता है, लेकिन विभाग में 125 पद अब भी खाली हैं. अधिकारियों ने यह भी बताया कि विभाग के पास चार पहिया वाहनों की कमी है, जिससे फील्ड कार्य प्रभावित हो रहा है. इस पर मुख्यमंत्री ने विभाग से पूरी सूची उपलब्ध कराने को कहा ताकि आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें.

CSR फंड खर्च में पारदर्शिता लाने की तैयारी

बैठक में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई. सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य में बड़ी कंपनियां केवल 12 जिलों में CSR राशि खर्च कर रही हैं, जबकि कंपनियों के मुनाफे और वास्तविक खर्च का पूरा विवरण सरकार के पास नहीं है। सरकार ने कहा कि नियम के मुताबिक कंपनियों को अपने मुनाफे का दो प्रतिशत CSR मद में खर्च करना अनिवार्य है. हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वहां मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही CSR राशि खर्च की जाती है. झारखंड सरकार भी ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है ताकि CSR फंड के उपयोग में पारदर्शिता लाई जा सके.

ट्रेजरी घोटाले को वित्त मंत्री ने बताया ‘वेतन घोटाला’

बैठक में ट्रेजरी घोटाले का मुद्दा भी उठा. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसे “वेतन घोटाला” बताते हुए कहा कि इस मामले पर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा हुई है. उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में DDO की सहमति के बाद ही वेतन भुगतान होता है, लेकिन इसी प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका सामने आई है. वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस प्रक्रिया में बदलाव किया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके.

रांची से संवाददाता राहुल कुमार की रिपोर्ट