फाइल गुम होने पर कोर्ट नाराज : पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को गुम हुई संचिका का पुनर्निर्माण कर मंत्रिमंडल को देने का दिया निर्देश

Edited By:  |
file gum hone per court naraaj file gum hone per court naraaj

Patna: पटना जिले में मसौढी स्थित द्वारका नाथ कॉलेज को मगध विश्वविद्यालय से अंगीभूत करने का राज्य सरकार का 37 साल पुराना निर्णय फाइल गुम हो जाने के कारण आज तक लागू नहीं हो सका. इस बात पर नाराजगी जताते हुए पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि गुम हुई पूरी संचिका का विधिवत पुनर्निर्माण कर इसे राज्य के मंत्रिमंडल को दें,ताकि वो इस मामले पर विधिवत निर्णय ले सके.

जस्टिस हरीश कुमार की एकलपीठ ने जय प्रकाश सिंह व अन्य की रिट याचिकायों को निष्पादित करते हुए इस प्रक्रिया को अगले तीन महीने में पूरी करने का भी आदेश दिया है.

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता चक्रपाणि ने कोर्ट को बताया कि 1987 में तत्कालीन राज्य सरकार ने कॉन्स्टीच्यूएंट कॉलेज स्कीम के चौथे चरण में सूबे के 36 कॉलेजों को अलग अलग विश्वविद्यालयों के अधीन अंगीभूत करने का निर्णय लिया,जिसमें ये कॉलेज भी था.

आश्चर्य की बात रही कि सरकार के निर्णय लेने के बावजूद द्वारका नाथ कॉलेज जत्ती ( मसौढ़ी) को अंगीभूत इसलिए नहीं बनाया जा सका,क्योंकि संबंधित फाइल की सरकारी दफ्तर में गुम हो गई.

मामला विधानमंडल के सदन तक पहुंचा,जिसमें इस तथ्य को स्वीकार किया गया. बाद में बिहार विधान परिषद में विधानमंडल की आश्वासन समिति ने यह घोषणा किया कि इस कॉलेज को मगध यूनिवर्सिटी का अंगीभूत करने का 1987 के निर्णय को जल्दी ही लागू किया जाएगा. लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला.

बाद में 2006 में तत्कालीन महाधिवक्ता कार्यालय से इस मसले पर परामर्श लिया गया, जो अंततः कॉलेज को अंगीभूत करने के पक्ष में ही हुआ.

इसके आगे की कार्य राज्य सरकार के वित्त और शिक्षा विभाग करने के लिए बढ़े,लेकिन पेंच फिर फंसा रहा क्योंकि सरकार के 1987 में लिए गए निर्णय की संचिका गुम ही रही.

राज्य सरकार की तरफ से स्थायी सलाहकार सुनील कुमार मंडल ने रिट याचिका का विरोध किया,वहीं पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी की तरफ से राणा विक्रम सिंह ने कोर्ट को बताया कि मार्च 2018 से प्रश्नगत विश्वविद्यालय की संबद्धता मगध विश्वविद्यालय से हटकर,उनके मुवक्किल क्षेत्राधिकार में आ गई है.

लेकिन इससे जुड़ी संचिकाएं मगध यूनिवर्सिटी से आज तक नहीं मिली.

जस्टिस हरीश कुमार ने कहा कि सरकारी दफ्तर में फाइल गुम हो जाने का खामियाजा कॉलेज नहीं भुगत सकती. 37 साल पहले यदि सरकार का निर्णय इसे अंगीभूत करने का हुआ था, तो कॉलेज व उसके कर्मियों के अधिकारों का हनन नहीं हो सकता.