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BIHAR NEWS : बिहार में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर, किसानों ने दिए अहम सुझाव

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पटना : रासायनिक तरीके से उगाए गए अनाज और फल-सब्जियों के माध्यम से हम जहर खा रहे हैं. इससे कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो रही हैं. सरकार का प्रयास है कि प्राकृतिक तरीके से खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि लोगों को शुद्ध उत्पाद मिल सकें. हमें समझना होगा कि जैविक उत्पाद हमारे बेहतर जीवन के लिए जरूरी है. ये बातें कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने मीठापुर स्थित कृषि भवन में सोमवार को कही. वे यहां जैविक खेती के विकास के लिए आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान बोल रहे थे.

इस मौके पर उन्होंने कहा कि बाजार में जैविक उत्पाद मिल नहीं पा रहे हैं. यदि मिल भी रहे हैं, तो उन पर भरोसा करना मुश्किल है. इसे देखते हुए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है. जैविक उत्पाद महंगे होने के बावजूद स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं और अंततः फायदेमंद साबित होते हैं. जैविक उत्पादन को कैसे बढ़ाया जाए, इसके लिए प्रयास किए जाएंगे. साथ ही, सही प्रमाणित (सर्टिफाइड) जैविक उत्पाद उपलब्ध कराना हमारा लक्ष्य है.

जैविक उत्पादन की संभावना,समस्याएं एवं समाधान विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों और जैविक खेती करने वाले किसानों ने अपनी उपलब्धियों और सुझावों को साझा किया. इस दौरान कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. बीरेंद्र प्रसाद यादव,कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव,अपर सचिव कल्पना कुमारी सहित विभाग के वरीय अधिकारी मौजूद थे.

किसानों ने दिए अपने सुझाव

वैशाली से आए किसान कामेश्वर सिंह कुशवाहा ने कहा कि जैविक खेती में शुरुआत में उत्पादन कम होता है,लेकिन अगले दो-तीन वर्षों में उत्पादन बढ़ने लगता है. साथ ही,उत्पादित फसलों का अधिक मूल्य मिलता है. उन्होंने बताया कि देश के11राज्यों में वे अपने उत्पाद बेचकर लाभ कमा रहे हैं.

वहीं,सारण से आए नर्मदेश्वर गिरी ने कहा कि वे एक साथ कई फसलों की खेती करते हैं,जो आपस में प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं और अधिक उत्पादन देती हैं. वैशाली से आए नवीन कुमार सिंह ने सोशल मीडिया पर इसके प्रचार-प्रसार और सरकारी सहयोग की मांग की. सिवान के किसान अंकित कुमार,सारण से आए रंजीत कुमार सिंह समेत कई किसानों ने अपनी बात रखी.