BIHAR NEWS : बिहार में महिला उद्यमिता को पंख, ‘शक्ति बाजार’ से खुल रहे नए बाजार
पटना : बिहार में महिला उद्यमिता तेजी से बढ़ रही है. छोटे स्तर पर काम कर रही उद्यमियों को व्यवसाय , तकनीक, ब्रांडिंग इत्यादि की समझ से सीमित बाजार की जगह अब वैश्विक मंच मिलने लगा है. यह पंचायती राज विभाग और निजी संस्था सेंटर फॉर कैटलाइजिंग चेंज (सी 3) की छोटी मगर महत्वपूर्ण कोशिशों की बदौलत सफल हो पाया है. पिछले वर्ष से महिला जनप्रतिनिधियों को ‘शक्ति धारा’ कार्यक्रम के तहत विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे अपने पंचायत में मौजूद स्थानीय महिला उद्यमियों को वैश्विक बाजार में पहचान बनाने का मौका दे रही हैं. मुजफ्फरपुर, रोहतास और नालंदा जिले में से कुल 132 महिला जनप्रतिनिधियों को इससे जोड़कर विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया.
शक्ति धारा के तहत शक्ति बाजार का भी आयोजन किया गया है. इसमें महिलाओं के लिए संरचित बाजार, डिजिटल कौशल, वित्तीय जानकारी और नेतृत्व समर्थन मिल रहा है. बीते वर्ष मुजफ्फरपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम में 3 महिलाओं ने मिलकर 5 लाख रुपये से अधिक के लोकल उत्पादों की रिकॉर्ड बिक्री की थी. ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं में तकनीकी समझ उत्पन्न कर रहे हैं. इसके सकारत्मक परिणाम से ग्रामीण कलाओं को वैश्विक पहचान मिली, उत्पादों की रेंज बढ़ी, कारोबार विस्तार से नए ग्रामीण रोजगार सृजित हुए और नवाचार से बाजार सज रहा है.
केस1:मधुबनी से मुंबई तक मधुबनी पेंटिंग का सफर
मुजफ्फरपुर जिले के मुसहरी ब्लॉक की 45 वर्षीय अंजना लाभ एक कुशल मधुबनी कलाकार हैं. 25 वर्षों से मधुबनी कला से जुड़े होने के बावजूद उनका काम सीमित क्षेत्रों तक ही सिमटा हुआ था, जिससे आय भी कम थी. शक्ति बाजार की ट्रेनिंग और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अंजना ने उत्पाद प्रस्तुतीकरण, पैकिंग, ग्राहक संबंध और डिजिटल मार्केटिंग में महारत हासिल कर ली. आज वो अपने उत्पादों को दूसरे राज्य जैसे मुंबई, लखनऊ और वाराणसी में भी बेच रहीं हैं. वे महज एक कलाकार नहीं, बल्कि एक सफल महिला उद्यमी हैं. उनके पास जीएसटी सर्टिफिकेशन, कलाकार कार्ड और उद्यम रजिस्ट्रेशन है. सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी आय सालाना लगभग चार लाख रुपये तक पहुंच गई है.
केस2:मखाना स्नैक्स का खादी मॉल में स्थायी स्टॉल
शक्ति बाजार से जुड़ने के बाद मेरे व्यापार में बड़ा बदलाव आया है. अब मेरा जीएसटी रजिस्ट्रेशन हो गया है और खादी मॉल में स्थायी स्टॉल भी मिल गया है. ये बातें मुजफ्फरपुर की बीरपुर पंचायत की नीतू कुमारी बताती हैं,जो वोम्पो की संस्थापक हैं. पिछले छह वर्षों से वे घर से ही मखाना आधारित स्नैक्स,अचार व अन्य स्थानीय उत्पादों का व्यवसाय चला रही थीं. लेकिन बाजार की कम समझ के कारण वो आसपास की दुकानों तक ही सीमित थी. सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिलने के बाद अब उनकी सालाना आय ढाई लाख से बढ़कर चार लाख रुपये हो गई है.
केस3:ग्लोबल मार्केट में छा रही बावन बूटी
30 वर्षीय गुड़िया देवी नालंदा जिले के बावन बूटी कला में निपुण हैं. गोवारा पंचायत के नेप्पुरा गांव की गुड़िया ने शक्ति धारा की ऑनलाइन ट्रेनिंग के दौरान उद्यमिता के गुर सीखे और अपने उत्पादों को डिजिटल दुनिया तक पहुंचाया. ग्लोबल बाजार में अपनी कला को स्वीकारा जाते देख उनका आत्मविश्वास बढ़ा. उन्होंने बेंगलुरु में आयोजित इंट्रेप्रेनारी मेला 2.0 में अपनी कला का प्रदर्शन किया, जहां उनकी खूब सराहना हुई. अपनी झिझक को दूर कर आज गुड़िया पहले से दोगुनी कमाई कर रही हैं और अपनी बुनाई कला को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं. यह पहल साबित कर रही है कि महिलाओं को सही मंच, प्रशिक्षण और समर्थन मिले तो वे न सिर्फ स्वावलंबी बनती हैं, बल्कि पूरे समुदाय के आर्थिक विकास की इंजन भी बन जाती हैं.





