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बिहार के शहरों का बदलेगा भूगोल : नगर निकायों के पुनर्गठन की तैयारी

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पटना: बिहार सरकार राज्य में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बढ़ती आबादी को देखते हुए नगर निकायों के बड़े स्तर पर पुनर्गठन की तैयारी में जुट गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिए सभी जिलाधिकारियों से 30 अगस्त 2026 तक प्रस्ताव मांगे हैं। इन प्रस्तावों के आधार पर नगर निकायों का विलय, शहरों की सीमा का विस्तार, नए नगर निकायों का गठन तथा नगर पंचायतों और नगर परिषदों का दर्जा बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

सरकार की योजना के तहत जहां दो या अधिक नगर निकायों की आबादी और बुनियादी ढांचा आपस में जुड़ चुके हैं, वहां उन्हें मिलाकर एक नया नगर निकाय बनाया जा सकता है। इसके अलावा शहरों से सटे ग्रामीण इलाकों को भी संबंधित नगर निकाय में शामिल कर शहरों का विस्तार करने की तैयारी है।

नगर विकास एवं आवास विभाग ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या, कामगारों की संख्या, कृषि कार्य से जुड़े लोगों की संख्या, क्षेत्रफल, जनसंख्या घनत्व, सीमा, चौहद्दी, थाना और नक्शे सहित विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेजें।

सरकार नए नगर निकायों के गठन के साथ-साथ नगर पंचायतों को नगर परिषद और नगर परिषदों को नगर निगम का दर्जा देने की संभावना भी तलाश रही है। इसके लिए बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित मानकों के अनुसार 12 हजार से 40 हजार आबादी वाले क्षेत्र नगर पंचायत, 40 हजार से 2 लाख आबादी वाले क्षेत्र नगर परिषद और दो लाख या उससे अधिक आबादी वाले क्षेत्रों को नगर निगम का दर्जा दिया जा सकता है।

जनगणना-2027 के बाद इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पुनर्गठन से तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास होगा, नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा और शहरी प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।