बड़ी उपलब्धि : स्वास्थ्य सेवा में बिहार का रिकॉर्ड प्रदर्शन, 17वीं बार टॉप पर राज्य
पटना : सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने के मामले में बिहार को एक बार फिर से देश में पहला स्थान मिला है. यह लगातार17वें महीने से बिहार देश में पहला स्थान प्राप्त करता आ रहा है. इसकी घोषणा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय,भारत सरकार की ओर से हर महीने जारी होने वाले डैशबोर्ड की रैकिंग में की गई है. इस रैकिंग के अनुसार जनवरी2026में80.89अंकों के साथ राजस्थान को पछाड़ते हुए बिहार ने लगातार17वें महीने अपनी अव्वलता दर्ज कराई है. इससे पहले सितंबर2024में बिहार ने पहली बार77.20अंकों के साथ देश भर में पहला स्थान हासिल किया था.
सरकारी अस्पतालों में रोगियों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने को लेकर ड्रग एंड वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम (डीवीडीएमएस) सेंट्रल डैशबोर्ड की ओर से राज्यों को हर महीने अंक जारी किए जाते हैं. डैशबोर्ड की इस कसौटी पर बिहार लगातार17महीने से खरा उतर रहा है. हाल ही में डैशबोर्ड की ओर से जारी स्कोर में80.89अंकों के साथ बिहार पहला, 77.65अंकों के साथ राजस्थान दूसरे और71.31अंक के साथ के पंजाब तीसरे स्थान पर बताया गया है.29राज्यों के लिए जारी इस रैकिंग में नागालैंड,केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप और मणिपुर सबसे निचले पायदान पर हैं. इन राज्यों का स्कोर क्रमशः28.21, 29.46और31.02है.
कुछ दिन पहले तैयार की गई थी वृहद कार्ययोजनाः
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों में मरीजों को दवा उपलब्ध कराने की दिशा में कुछ दिन पहले वृहद कार्ययोजना तैयार की गई. इसमें मुख्य रूप से राज्य भर के अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवा की सूची (ईडीएल) का निर्धारण,तिथिवार औषधि निवारण नियमावली का अनुपालन,स्वास्थ्य जांच के लिए स्थानवार सूची का निर्धारण,रोगियों को छोटे स्वास्थ्य केंद्रों से बड़े संस्थानों में रेफर करने के लिए रेफरल पॉलिसी और इसकी निचले स्तर पर जवाबदेही तय करने, डीवीडीएमएस पोर्टल से दवा उपलब्ध कराने में दवा भंडारपाल,अस्पताल प्रबंधक और अस्पताल प्रभारी के लिए सख्त नियम,राज्य में आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) एप से मरीजों का रजिस्ट्रेशन और अस्पतालों में दवा पहुंचाने के लिए वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने आदि योजनाओं को लागू करने से बिहार के हाथों सफलता की चाबी हाथ लगी है.
सभी स्वास्थ्य संस्थानों में क्यूआर कोड की सुविधाः
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता की जानकारी मरीजों को भी मिले, इसके लिए हर स्वास्थ्य केंद्र पर क्यूआर कोड की सुविधा दी गई है. इस क्यूआर कोड से मरीज और उनके परिजनों को यह जानकारी आसानी से मिल पा रही है.
गरीब और पिछड़े वर्ग को सबसे अधिक फायदाः
बिहार में करीब10हजार626सरकारी स्वास्थ्य केंद्र हैं, जिनमें मेडिकल कॉलेज से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र तक शामिल हैं. इन केंद्रों पर हर साल लगभग6.5करोड़ मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं,जिनमें से बड़ी संख्या में मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. इस व्यवस्था से गरीब और पिछड़े वर्ग के उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है,जिन्हें अक्सर महंगी दवाएं खरीदने में दिक्कत होती थी. अब उन्हें आसानी से और मुफ्त में दवाएं मिल रही हैं,जिससे उनके इलाज का बोझ काफी कम हो गया है.
किस अस्पताल में कितनी तरह की दवाएं मिल रहीं मुफ्त
मेडिकल कॉलेज अस्पताल (ओपीडी में356,आईपीडी में255दवाएं यानी611प्रकार की दवाएं)
जिला अस्पताल (ओपीडी में287,आईपीडी में169दवाएं)
अनुमंडलीय अस्पताल (ओपीडी में212,आईपीडी में101दवाएं)
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (ओपीडी में212,आईपीडी में97दवाएं)
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (ओपीडी में201,आईपीडी में93दवाएं)
शहरी पीएचसी (ओपीडी में180दवाएं)
अतिरिक्त पीएचसी (ओपीडी में140,आईपीडी में53दवाएं)
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (151दवाएं)
स्वास्थ्य उपकेंद्र (97दवाएं)
पारदर्शिता,प्रबंधन और सतत निगरानी का सुखद परिणाम
सरकारी अस्पतालों में दवा वितरण के क्षेत्र में बिहार का प्रदर्शन पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुका है. लगातार17महीनों से बिहार का प्रथम स्थान पर बने रहना इस बात का प्रमाण है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था न केवल मजबूत हुई है,बल्कि पारदर्शिता,दक्ष प्रबंधन और सतत निगरानी के साथ प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है. बिहार स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस उत्कृष्ट प्रदर्शन को निरंतर बनाए रखना अपने आप में एक बड़ी और प्रेरणादायक उपलब्धि है.





