रक्तदान की अपील : SNMMCH में रक्त संकट, थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों की बढ़ी परेशानी

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धनबाद:जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SNMMCH) में इन दिनों ब्लड की भारी कमी हो गई है. मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ गई है. 600 बेड वाले इस अस्पताल के ब्लड बैंक में महज 42 यूनिट ही रक्त उपलब्ध है. ऐसे में अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ-साथ बाहर से आने वाले मरीजों को भी ब्लड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को हो रही है, जिन्हें नियमित अंतराल पर ब्लड चढ़ाना जरूरी होता है. कई मरीजों को ब्लड के लिए घंटों नहीं बल्कि दो से चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है.

ब्लड के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार

SNMMCH के पीडियाट्रिक वार्ड में कई ऐसे बच्चे मिले हैं,जिनके परिजन कई दिनों से ब्लड मिलने का इंतजार कर रहे हैं.गिरिडीह जिले के जमुआ से पहुंचे दिलीप सिंह ने बताया कि उनकी सात वर्षीय बेटी थैलीसीमिया से पीड़ित है. उन्होंने बताया कि 10 मार्च वे अपनी बच्ची को ब्लड चढ़ाने के लिए SNMMCH लेकर आए थे. दो दिन बीत गए, लेकिन अभी तक ब्लड नहीं मिला है. ब्लड बैंक में खून नहीं होने की बात कही जा रही है. जबकि, मेरी बेटी को महीने में दो बार ब्लड चढ़ाना पड़ता है.

थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों की बिगड़ी हालत

वहीं, गिरिडीह से ही आए मो.सलीम ने बताया कि उनके बेटे जुबेर अहमद भी थैलीसीमिया पीड़ित है. उन्होंने कहा कि चार दिनों से ब्लड मिलने का इंतजार कर रहे हैं. मेरे बेटे को महीने में तीन यूनिट ब्लड चढ़ाना पड़ता है. एक यूनिट भी ब्लड मिल जाने पर राहत मिल जाती है. ब्लड नहीं मिलने पर वह खाना, चलना और बोलना भी बंद कर देता है और उसकी हालत बिगड़ने लगती है.गिरिडीह के ही मो.सलामत अंसारी ने बताया कि उनके बच्चे को भी थैलीसीमिया है. उन्होंने कहा किहम कल ही ब्लड के लिए अस्पताल पहुंचे हैं, लेकिन अभी तक ब्लड नहीं मिल पाया है. ब्लड नहीं मिलने से उसकी हालत बिगड़ती जा रही है.धनबाद के गांधी नगर निवासी अरुण कुमार ने कहा कि उनके बच्चे को भी थैलीसीमिया है और उन्हें भी ब्लड के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि आज दूसरा दिन है, लेकिन अभी तक ब्लड नहीं मिल पाया है. अगर जल्द ब्लड नहीं मिला तो बच्चे की स्थिति बिगड़ सकती है.

पढ़िएशिशु रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर का ने क्या कहा

इधर, SNMMCH के शिशु रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शांभवी ने बताया कि अस्पताल में करीब 200 थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चे रजिस्टर्ड हैं, जिनमें धनबाद के साथ-साथ गिरिडीह, बोकारो और अन्य जिलों के मरीज शामिल हैं.उन्होंने कहा कि थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को नियमित रूप से ब्लड चढ़ाना जरूरी होता है. कोशिश रहती है कि उनके शरीर में ही मोग्लोबिन का स्तर 9.5 ग्राम से ऊपर बना रहे हैं. अगर समय पर ब्लड नहीं चढ़ाया गया तो बच्चे का शारीरिक विकास रूक सकता है.

SNMMCHब्लड बैंकमें 42 यूनिट रक्त उपलब्ध

SNMMCH ब्लड बैंक के सुपरिटेंडेंट डॉ. बीके पांडा ने बताया कि फिलहाल ब्लड बैंक में 42 यूनिट रक्त ही उपलब्ध है. जबकि इसकी क्षमता 900 यूनिट की है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में रोजाना दुर्घटना और अन्य मरीजों के लिए औसतन 40 से 50 यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है. थैलीसीमिया के करीब 25 मरीज नियमित रूप से आते हैं. सभी ग्रुप का ब्लड उपलब्ध है, लेकिन थोड़ा समय लग रहा है. सभी जरूरतमंदों को ब्लड उपलब्ध कराया जा रहा है. रक्त की कमी दूर करने के लिए वोलेंटियर डोनर तैयार किए जा रहे हैं और लोगों से रक्तदान करने की अपील की जा रही है.

लोगों से रक्तदान करने की अपील

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि रक्त की कमी दूर करने के लिए सामाजिक संस्थाओं और लोगों को आगे रक्तदान करना चाहिए, ताकि जरूरतमंद मरीजों की जान बच जा सके.SNMMCH जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में ब्लड की कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई है. नियमित रूप से ब्लड की जरूरत वाले थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक साबित हो सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि समय पर रक्त नहीं मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. ऐसे में जरूरत है कि लोग स्वेच्छा से आगे आएं और रक्तदान करें, ताकि अस्पताल के ब्लड बैंक में पर्याप्त रक्त उपलब्ध हो सके और जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सके.