पटना : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसी माह यानि सितंबर में घोषणा की थी कि नये वकीलों को प्रति माह पांच हजार रुपये का स्टाइपेंड दिया जायेगा. महाधिवक्ता एसडी संजय ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि 1 जनवरी, 2024 के बाद बिहार स्टेट बार काउंसिल में पंजीकृत हुए सभी नये वकीलों को स्टाइपेंड योजना के शर्तो को पूरा करने पर लाभ दिया जायेगा.
उन्होंने बताया कि आय के सम्बन्ध में कुछ प्राथमिकताएं रहेंगी. अक्टूबर प्रथम सप्ताह ये योजना प्रारम्भ हो जायेगी. सन 2020 के बाद विधि पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं हुई. उन्होंने कहा कि मैंने मुख्य कार्य 119 विधि पदाधिकारियों को नियुक्त किया. मैं चयन समिति का अध्यक्ष था.
उन्होंने जानकारी दी कि शीघ्र ही वरीय लोक अभियोजक व लोक अभियोजक नियुक्त किये जायेंगे. इस सन्दर्भ में शीघ्र एक विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि शीघ्र ही विधि पदाधिकारियों की सहायता के लिए करीब पांच सौ सहायक भी नियुक्त किये जायेंगे.
इन तथ्यों की जानकारी एडवोकेट जनरल एस डी संजय ने मीडियाकर्मियों को अपने कान्फ्रेंस रूम में दिया. उन्होंने बताया कि स्पीडी ट्रायल के विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की जायेगी. उन्होंने जानकारी दी कि रीतलाल यादव मामले में स्पीडी ट्रायल के लिए अधिवक्ता राम विनय सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि नई योजना है. शुरुआती दौर में छोटी मोटी समस्या सामने आ सकती है. लेकिन सरकार नये वकीलों को स्टाइपेंड योजना का लाभ देना सुनिश्चित कर चुकी है.
सरकार कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं की है. 1 जनवरी, 2024 से नामांकित नए वकीलों को 3 साल तक पांच हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड के साथ साथ अधिवक्ता संघों को ई-लाइब्रेरी के लिए पांच लाख की सहायता देगी.
इस आवेदन के साथ मैट्रिक परीक्षा का प्रमाण पत्र, वकील के रूप में पंजीकृत प्रमाण पत्र, अनुभव एवं सक्रिय प्रैक्टिस प्रमाण पत्र, माता/पिता आय प्रमाण पत्र, निवासी प्रमाण पत्र, पैन कार्ड,एआईबीई प्रमाण पत्र, आपराधिक मामले में संलिप्तता नहीं होने का शपथ पत्र, वकालत पेशा के अलावा किसी दूसरे व्यवसाय में नहीं होने का शपथ पत्र,रद्द चेक देना होगा.
उन्होंने बताया कि आवेदन पर एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव का हस्ताक्षर होना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्टी कमेटी के कॉन्वेनर पटना में नहीं होने के कारण उनका हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं है. उनका कहना था कि बिहार के जूनियर वकीलों को शुरुआती आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से यह योजना लागू की गई है.
जाने माने अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने सरकार द्वारा स्पीडी ट्रायल व्यवस्था की सराहना की. आमलोगों को शीघ्र न्याय मिले,इसके लिए यह बहुत महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा. आज भी बड़ी तादाद में अंडरट्रायल कैदी राज्य की जेलों में हैं.
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
