
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
LivePatna : पटना हाईकोर्ट में मोतिहारी शहर के मोतीझील बुढ़ी गंडक नदी से निकले ब्रिटिश कालीन नहर को रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है,के दोनों ओर हुए अतिक्रमण के मामले पर सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी. भारतीय न्यायप्रिय नागरिक परिषद की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस वी कामेश्वर राव की खंडपीठ ने सुनवाई की.इस बीच प्रशासन की ओर से समस्या से निपटने के लिए ठोस कार्रवाई की जा रही है. रामरेखा नहर पर कब्जा जमाये 110 लोगों को प्रशासन की ओर से नोटिस भेजा जा चुका है. प्रशासन ने कहा कि यदि स्वेच्छापूर्वक कब्जा नहीं हटाने पर बल प्रयोग के साथ जुर्माना वसूलने की कार्रवाई होगी. 12 किलोमीटर लंबी और 45 फीट चौडी नहर का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर हैं. सिरहाना नदी का जल सीधे मोतीझील में प्रवेश करता था.पिछली सुनवाई के दौरान मोतीहारी नगर निगम के वार्ड नंबर 18 के सदस्य संजय जायसवाल ने कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका डाल कर बताया था कि ये नहर नहीं, बल्कि एक नाला हैं. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने इस हस्तक्षेप याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जब कि मोतिहारी नगर निगम स्वयं पार्टी हैं,तो वार्ड पार्षद के हस्तक्षेप याचिका दायर करने का कोई अधिकार ही नहीं है.उन्होंने बताया था कि जिला प्रशासन, मोतिहारी नगर निगम और राज्य सरकार इसे नहर मान रही है. जिला प्रशासन ने बताया था कि नहर के आसपास हुए अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दे दिया गया है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि नहर के आसपास बड़े - बड़े पेड़ हो गये हैं. पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा था कि वार्ड पार्षद को हस्तक्षेप याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने डीएम, पूर्वी चंपारण के 4 जून, 2026 के पत्र के सन्दर्भ में हुई कार्रवाईयों पर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था.याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि मोतिहारी शहर के मोतीझील को बुढ़ी गंडक नदी पर स्थित रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है. इसकी लम्बाई लगभग ग्यारह किलोमीटर है. मोतीझील को शहर की जीवनरेखा भी कहा जाता है. इससे मोतिहारी शहर को पेयजल मिलता है. साथ ही बाढ़ के समय ये नहर इस शहर को बाढ़ से बचाता है.अधिवक्ता विकास पंकज ने बताया था कि 24 दिसंबर,2022 को कार्यपालक अभियंता,तिरहुत कैनाल डिवीज़न ,मोतिहारी ने इस सम्बन्ध में पूर्वी चम्पारण के जिलाधिकारी को पत्र लिखा,जिसमें इस नहर को बाढ़ के समय अतिउपयोगी और मोतीझील को रिचार्ज करने का वैकल्पिक श्रोत बताया गया था.अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने बताया था कि काफी बैठकें हुई,लेकिन अब तक कोई विस्तृत रिपोर्ट नहीं दिया गया था. इससे मोतिहारी शहर के नागरिकों को काफी कष्ट और असुविधा हो रही है. इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जायेगी.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
बेगूसराय : बड़ी खबर बेगूसराय से है जहां पुलिस ने फायरिंग कर स्वर्ण आभूषण दुकानदार से लूट मामले में 4 बदमाशों को हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया है. पकड़े गए अपराधियों के पास से पुलिस ने लूटे गए 9200 रुपये और 3 बाइक भी जब्त किया है, हालांकि लूटे गए सोने का आभूषण अभी बरामद नहीं हो सका है.दरअसल 25 अक्टूबर की रात बखरी थाना क्षेत्र के जोकियाही पुल पर स्वर्ण आभूषण दुकानदार नीरज कुमार से बाइक सवार बदमाशों ने फायरिंग कर लूट की घटना को अंजाम दिया था. बदमाशों ने 60000 रुपये और करीब 25 ग्राम सोने के जेवरात लूट लिया था . इस घटना के बाद बखरी डीएसपी कुंदन कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम लगातार टेक्निकल और मैनुअल अनुसंधान कर रही थी जिसके बाद बदमाशों की गिरफ्तारी हुई है.पुलिस ने इस मामले में साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के आहोक रजौड़ा गांव के रहने वाले किशन कुमार, बीरपुर थाना क्षेत्र के फुलकारी गांव निवासी प्रेम कुमार और मुफस्सिल थाना क्षेत्र के लालू नगर के प्रदुमन कुमार और आकाश कुमार को गिरफ्तार किया है. गुरुवार देर शाम बखरी थाना में आयोजित प्रेस वार्ता में डीएसपी ने बताया कि यह लोग पहले दुकान पर रेकी किया था और फिर बाद में बखरी बाजार से दुकान बंद कर घर जाने के दौरान सुनसान इलाके में फायरिंग का लूट की घटना को अंजाम दिया है. पुलिस ने इन चारों को गिरफ्तार किया है . लूट में शामिल बाइक, 9200 रुपये को भी बरामद किया है. साथ ही लूट के दौरान जिस पिस्टल से फायरिंग की थी, वह पिस्टल भी बरामद कर लिया गया है. इस घटना में करीब आठ लोग शामिल थे. रेकी करने से लेकर लूटने तक में. अन्य बदमाशों की गिरफ्तारी और लूटे गए सोने के जेवरात के बरामदगी के लिए छापेमारी की जा रही है. बताया जाता है कि गिरफ्तार बदमाशों का आपराधिक इतिहास है और यह लोग जेल भी गए थे जेल में ही दोस्ती हुई थी और बाहर जमानत पर बाहर आने के बाद इस लूट की घटना को अंजाम दिया है.
पटना : आम लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए बाजार में उपलब्ध तमाम खाद्य पदार्थों पर राज्य सरकार के स्तर से खासतौर से चौकसी बरती जा रही है. स्वास्थ्य विभाग के विशेष निर्देश पर खाद्य सुरक्षा इकाई के स्तर से इस वर्ष 27 अगस्त से खाद्य पदार्थों से जुड़े तमाम तरह के प्रतिष्ठानों की जांच का सिलसिला निरंतर जारी है. अब तक राज्यभर में 87 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा चुका है. इसमें होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानें, खाद्य निर्माण इकाई, पैकेज पेयजल, होम डिलेवरी से जुड़ी कंपनियों के वेयरहाउस समेत ऐसे अन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं. जांच के दौरान सबसे ज्यादा गड़बड़ी पाए जाने वाले 15 प्रतिष्ठानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. दो प्रतिष्ठानों के लाइसेंस भी निलंबित किए गए हैं. जबकि शेष को अंतिम चेतावनी के तौर पर सुधार करने का नोटिस दिया गया है. संबंधित प्रावधानों के तहत तीन माह तक कारावास एवं 3 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. राज्यभर में जितने प्रतिष्ठानों पर जो कार्रवाई की गई है, उसमें सर्वाधिक 87 निरीक्षण पटना के प्रतिष्ठानों में किए गए हैं. पटना में खाद्य संरक्षा विभाग की टीम अब तक अधिकांश होटलों, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकान, डेयरी, फास्ट फूड सेंटर, पैकेज्ड पेयजल इकाइयों और ऑनलाइन खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने वाले स्टोर का निरीक्षण कर चुकी है. इस दौरान खराब एवं दुर्गंधयुक्त पनीर, मिठाई, दूध, एक्सपायरी खाद्य सामग्री और अन्य असुरक्षित उत्पाद जब्त कर नष्ट कराए गए हैं.पटना जिले में खाद्य संरक्षा विभाग की व्यापक कार्रवाईपटना के आसपास के इलाकों में व्यापक स्तर पर जांच की गई है. संपतचक, गौरीचक और आसपास के क्षेत्रों में बिना वैध खाद्य लाइसेंस के संचालित पैकेज्ड पेयजल इकाइयों की जांच की गई. इस दौरान महादेव इंटरप्राइजेज, त्रिवेणी नीर और अन्य प्रतिष्ठानों से बड़ी मात्रा में पैकेज्ड पेयजल जब्त किए गए हैं. कई इकाइयों में बिना लाइसेंस पानी की पैकेजिंग तथा विभिन्न ब्रांडों के लेबल के इस्तेमाल से संबंधित अनियमितताएं पाई गईं. विभाग ने संबंधित इकाइयों में उत्पादन एवं संचालन बंद कराने के साथ खाद्य पदार्थों के नमूने प्रयोगशाला भेजे.कुछ प्रतिष्ठानों को 14 दिन की मोहलतपटना के मुख्य होटल एवं रेस्टोरेंट में विशेष जांच अभियान चलाए गए हैं. होटल गार्गी ग्रैंड, पाटलिपुत्र एग्जॉटिका, द पनाश, होटल मौर्या और अन्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण में रसोई की साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों के भंडारण, कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और पानी की जांच से संबंधित कमियां सामने आई. कुछ स्थानों पर शाकाहारी एवं मांसाहारी खाद्य पदार्थ एक साथ रखा पाया गया. जबकि, कई प्रतिष्ठानों में एक्सपायरी और खराब खाद्य सामग्री मिली. संबंधित प्रतिष्ठानों को कमियां दूर करने के लिए 14 दिनों का सुधार नोटिस जारी किया गया. इसके अतिरिक्त पटना के विभिन्न केएफसी ऑउटलेट, बारबेक्यू नेशन और पिज्जा हट जैसे प्रतिष्ठानों में जांच अभियान चलाया गया. बुद्ध मार्ग स्थित बारबेक्यू नेशन से 30 किलोग्राम दुर्गंध युक्त पनीर और 4 किलोग्राम चावल जब्त कर नष्ट किए गए. जबकि 15 किलोग्राम पैक्ड चिकन के उपयोग पर रोक लगाई गई. फ्रेजर रोड स्थित बारबेक्यू नेशन में ब्रेड के पैकेट में कीड़े पाए गए और 20 लीटर जला हुआ तेल जब्त कर नष्ट किया गया. बोरिंग कैनाल रोड स्थित केएफसी में औद्योगिक उपयोग के 835 प्लास्टिक गिलासों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई. पिस्ता हाउस में भी कई तरह की कमियां पाई गई थी. सभी प्रमुख मिठाई दुकानों का भी निरीक्षण किया गया है. इन जिलों में हुई इतनी कार्रवाईपटना के अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी खाद्य संरक्षण विभाग ने व्यापक जांच अभियान चलाया. पिछले तीन महीनों के दौरान रोहतास में 41, सारण में 40, गोपालगंज में 37, सीवान में 27, गया में 26, वैशाली में 24, मुजफ्फरपुर में 20, भागलपुर एवं पश्चिम चंपारण में 18-18, पूर्णिया में 16, भोजपुर एवं समस्तीपुर में 15-15 तथा दरभंगा एवं पूर्वी चंपारण में 14-14 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया. अरवल एवं कैमूर में 13-13, कटिहार में 12, मधुबनी, सहरसा और सीतामढ़ी में 10-10, खगड़िया में 7, सुपौल में 6, बेगूसराय में 5, अररिया, औरंगाबाद, मधेपुरा तथा नालंदा में 4-4 प्रतिष्ठानों की जांच हुई. बांका, बक्सर एवं जहानाबाद में 3-3, जमुई, लखीसराय एवं मुंगेर में 2-2 तथा किशनगंज एवं नवादा में एक-एक प्रतिष्ठान का निरीक्षण हुआ है. वैशाली, मुजफ्फरपुर, सुपौल समेत कुछ अन्य जिलों में पैकेड पेयजल और पनीर समेत अन्य खाद्य समाग्री कई प्रतिष्ठानों से नष्ट की गई है.आम लोगों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिहार सरकार का खाद्य संरक्षा विभाग के स्तर से राज्यभर में निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है. प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, सुरक्षित भंडारण, रसोई की स्वच्छता, खाद्य संरक्षा मानकों के अनुपालन और वैध लाइसेंस की जांच की जा रही है. सभी प्रमुख होटल, रेस्तरां, मिठाई प्रतिष्ठान, खाद्य निर्माण इकाइयां और पैकेज्ड पेयजल से जुड़े कारोबार विशेष रूप से जांच के दायरे में हैं. आमजन के स्वास्थ की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. इससे कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
वैशाली : बड़ी खबर वैशाली से आ रही है जहाँ मुजफ्फरपुर में एके 47 बरामदगी मामले में एनआईए ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संदीप कुमार सिन्हा को गुरुवार देर रात गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई. एनआईए की टीम ने अधिवक्ता को केस नंबर R.C.NO-11/2024/NIA/DLI में नगर थाना क्षेत्र के जौहरी बाजार स्थित उनके कार्यालय के पास से पकड़ा. हालांकि एनआईए की इस कार्रवाई पर अधिवक्ता संदीप कुमार सिन्हा के परिजनों ने सवाल खड़ा किया है और बताया कि एनआईए जानबूझकर अधिवक्ता को फंसा रही है.गिरफ्तार अधिवक्ता के पिता ने बताया कि इससे पहले दो बार एनआईए की टीम रेड कर चुकी है. उन्होंने बताया कि पहली रेड में घर से कुछ बरामद नहीं हुआ था. लेकिन दूसरी रेड में एनआईए ने प्लांट कर घर के बाहर स्थित एक कमरे में रिवाल्वर रख कर बरामदगी दिखाई. वहीं अधिवक्ता के चचेरे भाई ने बताया कि दूसरी बार एनआईए द्वारा की गई कार्रवाई और जब्ती सूची को पटना एनआईए कोर्ट में चैलेंज किया गया है जिसमें कोर्ट एनआईए से जवाब मांग रही है और उसी दुर्भावना से ग्रसित होकर एनआईए ने उनके भाई को गिरफ्तार किया है. अधिवक्ता के पिता ने बताया कि एनआईए की टीम ने दूसरी रेड में उनकी लाईसेंस गन और कुछ कैश भी लेकर चली गई थी जिसकी शिकायत एनआईए डीजी से लेकर प्रधानमंत्री तक से की गई है और शायद यही वजह है कि एनआईए अधिवक्ता को परेशान कर रही है.बता दें कि मुजफ्फरपुर एके 47 बरामदगी मामले में अभी तक 6 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और गुरुवार देर रात एनआईए ने अधिवक्ता संदीप कुमार सिन्हा को गिरफ्तार कर लिया है और अब इस मामले में शामिल सभी आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है.वैशाली से ऋषभ कुमार की रिपोर्ट-
News Desk : दुलारचंद यादव हत्याकांड में मोकामा के विधायक और जेडीयू से निष्कासित अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ गई है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी जमानत रद्द करते हुए एक दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है. अनंत सिंह को मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी. इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदेश और न्यायमूर्ति पी.वी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की. खबर के मुताबिक, अदालत ने पटना हाईकोर्ट के जमानत देने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमानत देते समय अपराध की प्रकृति और आरोपी के आपराधिक इतिहास पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था. इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए जमानत रद्द कर दी.दुलारचंद यादव के पोते ने दी थी चुनौतीइस मामले में दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उन्होंने पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत अनंत सिंह को मार्च में जमानत मिली थी. याचिका में जमानत रद्द कर उन्हें दोबारा जेल भेजने की मांग की गई थी.सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों का हवाला दिया गया. इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल बताए गए.जेडीयू से निष्कासन के बाद दूसरा बड़ा झटकागौरतलब है कि बिहार विधान परिषद चुनाव की वोटिंग के बाद अनंत सिंह को जेडीयू ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा भी की गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई है. उन्हें एक दिसंबर तक सरेंडर करना होगा.संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास में तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी नरेंद्र प्रसाद सिंह और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी बंशीधर ब्रजवासी से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दोनों नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों को जीत की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।बिहार विधान परिषद चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दोनों विजयी प्रत्याशियों से मुलाकात कर उन्हें उनकी सफलता पर बधाई दी। लोक सेवक आवास में हुई इस मुलाकात को चुनाव परिणाम के बाद की महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है।तिरहुत शिक्षक सीट से नरेंद्र प्रसाद सिंह विजयीतिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नरेंद्र प्रसाद सिंह ने जीत दर्ज की है। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि के तौर पर उनकी भूमिका शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को विधान परिषद में उठाने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात हुई, जहां उन्हें शुभकामनाएं दी गईं।स्नातक सीट से बंशीधर ब्रजवासी को बधाईस्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी बंशीधर ब्रजवासी को भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बधाई दी। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में उनसे उच्च शिक्षा, युवाओं और स्नातक मतदाताओं से जुड़े विषयों पर चर्चा की अपेक्षा रहेगी।मुख्यमंत्री की ओर से दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को दी गई बधाई चुनाव परिणाम के बाद की औपचारिक मुलाकात का हिस्सा रही। दोनों नेताओं की जीत के बाद अब विधान परिषद में उनकी भूमिका पर नजर रहेगी। हालांकि, मुलाकात के दौरान किसी विशेष राजनीतिक मुद्दे या आगामी कार्ययोजना पर चर्चा होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
पटना:बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ओडिशा कैडर के 1997 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय कुमार सिंह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव बनाए जा सकते हैं। इसको लेकर राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार से अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति का अनुरोध किया गया है। यदि प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो संजय कुमार सिंह एक बार फिर बिहार में अपनी सेवाएं देंगे।ओडिशा सरकार में प्रधान सचिव के पद पर हैं तैनातसंजय कुमार सिंह फिलहाल ओडिशा सरकार में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वे मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं। इससे पहले भी वे अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति पर बिहार में काम कर चुके हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान उन्होंने लगभग सात वर्षों तक बिहार में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।पटना और गया के डीएम रह चुके हैं संजयसंजय कुमार सिंह बिहार में पटना और गया के जिलाधिकारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सचिव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। प्रशासनिक अनुभव और मुख्यमंत्री कार्यालय में काम करने के अनुभव के कारण उनकी संभावित वापसी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।केंद्र से प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया जारीप्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने उनकी अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति के संबंध में ओडिशा सरकार से संपर्क किया है। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद अब उनकी विजिलेंस रिपोर्ट मंगाई गई है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने और रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें बिहार के लिए विरमित किया जा सकता है।संजय कुमार सिंह के एक सप्ताह के भीतर बिहार लौटने की संभावना जताई गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव के रूप में उनकी नियुक्ति को लेकर अभी आधिकारिक आदेश जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है। उनकी वापसी और संभावित नियुक्ति पर प्रशासनिक तथा राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
पटना:बिहार में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। राज्य में अब तक 15,680 लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जा चुके हैं। यदि ऐसे लोग प्रतिबंधित लाइसेंस के बावजूद वाहन चलाते पकड़े जाते हैं, तो उनकी गाड़ी जब्त की जाएगी। गुरुवार को विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा समीक्षा बैठक में संबंधित विभागों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए।बैठक में परिवहन विभाग को पुलिस की ओर से प्राप्त लाइसेंस निलंबन संबंधी अनुशंसाओं पर 15 दिनों के भीतर नियमानुसार कार्रवाई करने और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभियान तेज करने को कहा गया।सड़क सुरक्षा के लिए बढ़ेंगी सुविधाएंपथ निर्माण विभाग और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 5,124 जेब्रा क्रॉसिंग का निर्माण और दोबारा पेंटिंग का काम पूरा हो चुका है। 161 स्थानों पर काम जारी है, जबकि 1,060 स्थानों पर जेब्रा क्रॉसिंग प्रस्तावित हैं। वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 474 व्हीकल अंडरपास बनाए जा चुके हैं। 219 निर्माणाधीन और 11 प्रस्तावित हैं। वहीं, 170 पैदल यात्री अंडरपास पूरे हो चुके हैं।29 जिलों में लगेंगे CCTV कैमरेराज्य के 29 जिलों में 307 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और ट्रैफिक लाइट लगाने के लिए जगह चिह्नित की गई है। राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी के लिए 58 हाईवे पेट्रोल वाहन भी तैनात किए गए हैं। सरकार सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण पर भी जोर दे रही है। अब तक 7,985 वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। स्कूली बसों की सुरक्षा, बच्चों की बैठने की क्षमता और दुर्घटना पीड़ितों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
जन सुराज के डिजिटल कम्युनिकेशन हेड देवपालिक गुप्ता की मौत पर सस्पेंस,प्रशांत किशोर बोले—ट्रेन से गिरे या गिराए गए,हो निष्पक्ष जांचपटना: जन सुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन हेड देवपालिक गुप्ता की मौत के मामले में पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने गहन जांच की मांग की है। गुरुवार को वे पश्चिम चंपारण के भितहा स्थित देवपालिक के पैतृक गांव गोड़रिया पहुंचे और शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि देवपालिक ट्रेन से खुद गिरे थे या उन्हें गिराया गया था। मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।प्रशांत किशोर ने परिजनों से मुलाकात के बाद बांसी नदी के मलाही घाट पर आयोजित देवपालिक गुप्ता के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा लिया। उन्होंने पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान घाट पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। उन्होंने देवपालिक के बड़े भाई और पत्रकार तारकेश्वर गुप्ता सहित अन्य परिजनों से बातचीत कर दुख की इस घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया।26 अक्टूबर को ट्रेन से कर रहे थे यात्राजानकारी के अनुसार, 31 वर्षीय देवपालिक गुप्ता 26 अक्टूबर को जनशताब्दी एक्सप्रेस से रांची से पटना आ रहे थे। यात्रा के दौरान वे अपनी बर्थ से यह कहकर निकले थे कि पैंट्री कार से खाना लेने जा रहे हैं। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर उनके साथियों को चिंता हुई। फोन करने पर उनका मोबाइल बंद मिला। इसके बाद साथियों ने मुरी स्टेशन पर उतरकर पुलिस को सूचना दी। तलाश के दौरान रेलवे पटरी के किनारे उनका शव बरामद हुआ।परिजनों ने जताई हत्या की आशंकादेवपालिक के बड़े भाई तारकेश्वर गुप्ता ने मामले में हत्या की आशंका जताते हुए उचित जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि खाना लेने जाने के दौरान उनका मोबाइल कैसे बंद हो गया। फिलहाल मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल बने हुए हैं। मामले की वास्तविक वजह जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
पटना: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 1,181 अमीनों के स्थानांतरण को मंजूरी दी है। विभाग ने यह प्रक्रिया पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था के तहत पूरी की है। गुरुवार को विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अपने कार्यालय कक्ष में कंप्यूटर का बटन क्लिक कर स्थानांतरण प्रक्रिया का अनुमोदन किया।विभाग के अनुसार, अमीनों का स्थानांतरण रैंडमाइज्ड कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से किया गया है। इसके लिए बिहारभूमि पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन प्राप्त किए गए थे। इन्हीं आवेदनों के आधार पर कंप्यूटरीकृत प्रक्रिया के जरिए कर्मचारियों के पदस्थापन को अंतिम रूप दिया गया। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और तकनीक के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना है।773 पुरुष और 333 महिला अमीन शामिलस्थानांतरण की सूची में कुल 1,181 अमीन शामिल हैं। इनमें 773 पुरुष, 333 महिला और 75 दिव्यांग कर्मचारी हैं। विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों से जुड़ी विभिन्न प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा। इनमें स्थान की दूरी, महिला कर्मचारियों की प्राथमिकता, दिव्यांगता और गंभीर बीमारी जैसे पहलू शामिल हैं। विभाग के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन और कंप्यूटर आधारित प्रक्रिया के जरिए स्थानांतरण को अंतिम रूप दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके।अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ अनुमोदनस्थानांतरण प्रक्रिया के अनुमोदन के दौरान विभाग के अपर सचिव अमित कुमार पांडेय, आईटी मैनेजर आनंद शंकर और अवर सचिव निरंजन यादव भी उपस्थित रहे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की यह पहल सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण में डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कंप्यूटरीकृत व्यवस्था से आवेदन के आधार पर पदस्थापन करने और निर्धारित प्राथमिकताओं को ध्यान में रखने का प्रयास किया गया है।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
पटना: बिहार की जल सुरक्षा, सिंचाई और भविष्य की जल आवश्यकताओं को लेकर जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को पटना के होटल चाणक्या में ‘गंगा जल संधि : बिहार की जल सुरक्षा’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें गंगा जल संधि के तकनीकी एवं नीतिगत पहलुओं, गंगा नदी में गाद के जमाव, बाढ़ प्रबंधन और राज्य में वर्षभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उपायों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। विभाग के अनुसार, खराब मौसम के कारण बक्सर से फरक्का तक गंगा नदी में गाद के जमाव की स्थिति का निर्धारित हवाई सर्वेक्षण स्थगित कर दिया गया है। गंगा जल संधि और बिहार की जल सुरक्षाभारत और बांग्लादेश के बीच12दिसंबर1996को30वर्षों के लिए हस्ताक्षरित गंगा जल संधि की अवधि11दिसंबर2026को समाप्त हो रही है। संधि के अंतर्गत फरक्का बैराज से निम्न धार में जल के बंटवारे की व्यवस्था की गई है। बिहार की बढ़ती जल आवश्यकताओं और बदलती जलवैज्ञानिक परिस्थितियों को देखते हुए संधि की भावी व्यवस्था पर विचार करते समय बिहार की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं का समग्र आकलन आवश्यक है।बिहार सरकार द्वारा वर्ष2051तक की अनुमानित जल आवश्यकता का वैज्ञानिक आकलन कराया गया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बिहार को गैर-मानसून अवधि (जनवरी से मई तक) में भी न्यूनतम लगभग10,000क्यूसेक जल की आवश्यकता है। राज्य में जलाशयों एवं अन्य जल स्रोतों में पर्याप्त जल उपलब्धता के अभाव में इनकी उपयोगिता प्रभावित होती है। ऐसे में गंगा से जल की वर्षपर्यंत उपलब्धता बिहार की जल सुरक्षा, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति तथा औ‌द्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।सेमिनार का उ‌द्देश्य इन आवश्यकताओं को वैज्ञानिक तथ्यों एवं तकनीकी आकलन के आधार पर प्रस्तुत करना तथा गंगा जल संधि की भावी व्यवस्था के संदर्भ में बिहार के हितों से जुड़े विषयों पर सार्थक विमर्श करना है।गंगा में गाद का जमाव और बाढ़ की बढ़ती चुनौतीबिहार की भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियां राज्य को बाढ़ और सूखे, दोनों तरह की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाती हैं। गंगा तथा उत्तर बिहार की अनेक नदियां हिमालय से निकलती हैं और मानसून के दौरान अपने साथ बड़ी मात्रा में गाद लाती हैं। बिहार की कम ढाल वाली भौगोलिक संरचना के कारण नदी की प्रवाह गति कम होने पर गाद नदी तल में जमा होती है। इससे नदी तल की ऊंचाई, जल प्रवाह की दिशा तथा नदी की जलवहन क्षमता प्रभावित होती है।राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की आवश्यकतागाद का जमाव न केवल बाढ़ के जोखिम को प्रभावित करता है, बल्कि नदियों, बराजों, जलाशयों एवं अन्य जल स्रोतों की जलवहन और जलधारण क्षमता पर भी असर डालता है। इससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति तथा अन्य उपयोगों के लिए जल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। जलवायु परिवर्तन, वर्षा के स्वरूप में बदलाव, बढ़ती जनसंख्या, कृषि की आवश्यकताओं, शहरीकरण एवं औ‌द्योगीकरण के कारण जल प्रबंधन की चुनौती और महत्वपूर्ण हो गई है।बिहार में गाद प्रबंधन एवं रिवर सिस्टम के पुनर्स्थापन की आवश्यकता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा 'बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति', 2026 लागू की गई है। चूंकि गंगा नदी में गाद की समस्या अंतर्राज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रकृति की है, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट गाद प्रबंधन नीति, दीर्घकालिक कार्ययोजना तथा गंगा बेसिन के राज्यों को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय कोष की आवश्यकता है। बाढ़ प्रबंधन की योजनाओं में गाद प्रबंधन, नदी तल के वैज्ञानिक अध्ययन तथा आवश्यकता के अनुरूप ड्रेजिंग की संभावनाओं पर भी समग्रता से विचार किया जाना जरूरी है।वैज्ञानिक आकलन के आधार पर दीर्घकालिक समाधानराज्य की जल आवश्यकताओं का आकलन केवल वर्तमान मांग तक सीमित नहीं है। भविष्य में कृषि, पेयजल, ऊर्जा, उ‌द्योग और शहरी विकास के लिए जल की आवश्यकता में वृ‌द्धि होने की संभावना है। इसके साथ ही, राज्य के जलाशयों एवं अन्य जल स्रोतों में गाद के जमाव तथा जल की अनियमित उपलब्धता से जल संचयन और उपयोग की क्षमता प्रभावित होती है। गंगा जल संधि की भावी व्यवस्था पर विचार करते समय बिहार की जल आवश्यकताओं तथा गंगा बेसिन के अन्य राज्यों की जरूरतों को तथ्यात्मक आधार पर शामिल किया जाना महत्वपूर्ण होगा।सेमिनार में विशेषज्ञों से अपेक्षा है कि वे उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों, तकनीकी अध्ययनों और अपने अनुभवों के आधार पर बिहार की वर्तमान एवं भावी जल मांग के आकलन, जल के न्यायसंगत उपयोग, गाद प्रबंधन, बाढ़ जोखिम में कमी तथा जल की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने के व्यावहारिक विकल्पों पर सुझाव देंगे। विचार-विमर्श के आधार पर तकनीकी एवं नीतिगत अनुशंसाएं तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि बिहार का पक्ष भारत सरकार एवं संबंधित संस्थाओं के समक्ष तथ्यात्मक आधार पर प्रस्तुत किया जा सके।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
पटनाः बिहार की राजधानी पटना में आम लोगों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य संरक्षा विभाग ने विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट और कैफे का निरीक्षण किया। 29 अक्टूबर 2026 को चलाए गए इस अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों, साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों के भंडारण और जरूरी दस्तावेजों की जांच की गई। निरीक्षण में कई प्रतिष्ठानों में कमियां सामने आईं। कुछ खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए, जबकि एक होटल से विभिन्न खाद्य सामग्री जब्त कर नष्ट करने की कार्रवाई की गई।कैफे 7 गार्डन में दस्तावेजों की कमी, दो नमूने जांच के लिए भेजेएम्स गोलंबर के निकट स्थित कैफे 7 गार्डन (प्राइड विहार स्नैक्स) के निरीक्षण के दौरान चना दाल और हल्दी पाउडर के दो नमूने संग्रहित किए गए। इन नमूनों को जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण संख्या, पानी की जांच रिपोर्ट, कीट नियंत्रण संबंधी दस्तावेज, कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र और FoSTaC प्रशिक्षण प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं पाए गए। इसके अलावा, शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग रखने की व्यवस्था में कमी मिली। खाद्य सामग्री के भंडारण में FIFO और FEFO प्रणाली का भी पालन नहीं किया जा रहा था।होटल पाटलिपुत्र कॉन्टिनेंटल में एक ही फ्रिज में रखे मिले वेज-नॉनवेज खाद्य पदार्थअनीसाबाद बाइपास क्रॉसिंग के निकट स्थित होटल पाटलिपुत्र कॉन्टिनेंटल का भी निरीक्षण किया गया। विभाग के अनुसार, यहां खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत निर्धारित Schedule IV के प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया। निरीक्षण के दौरान शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य सामग्री एक ही फ्रिज में रखी हुई मिली। खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण और अलग-अलग रखने की व्यवस्था को लेकर यह कमी दर्ज की गई।होटल द रॉयल बिहार से खाद्य सामग्री जब्त कर नष्टवाल्मी, फुलवारीशरीफ स्थित होटल द रॉयल बिहार, जो आर.ई.पी.एल. हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड की इकाई बताई गई है, के निरीक्षण के दौरान कई खाद्य सामग्रियों को जब्त कर नष्ट करने की कार्रवाई की गई।विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, जब्त एवं नष्ट की गई सामग्री में शामिल हैं:आलू दम: 1.8 किलोग्राम — ₹400येलो ग्रेवी: 5 किलोग्राम — ₹1,250दाल मखनी: 2 किलोग्राम — ₹800रियल फ्रूट मैंगो जूस: 3 लीटर — ₹324इन सामग्रियों का कुल दर्ज मूल्य ₹2,774 बताया गया है। इसके अतिरिक्त किशमिश, बादाम और पनीर के नमूने भी संग्रहित कर जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजे गए।होटल जी डायमंड को साफ-सफाई के लिए नोटिसविशाल नगर, एम्स गेट नंबर-1, फुलवारीशरीफ स्थित होटल जी डायमंड का भी निरीक्षण किया गया। विभाग के अनुसार, प्रतिष्ठान को साफ-सफाई बनाए रखने के संबंध में नोटिस दिया गया।द आर्च रेस्टोरेंट की रसोई में मिलीं कमियांएम्स गोलंबर के निकट कोरजी स्थित द आर्च रेस्टोरेंट के निरीक्षण के दौरान रसोई की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई। विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां साफ-सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था में कमियां थीं। पानी की जांच रिपोर्ट और कीट नियंत्रण संबंधी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं पाए गए। इसके अलावा FIFO और FEFO प्रणाली का पालन नहीं होने तथा शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को एक साथ रखे जाने की बात सामने आई।घरौंदा प्रतिष्ठान को 14 दिनों का सुधार नोटिसआशियाना मेन्यूसर्व प्राइवेट लिमिटेड के मेसर्स घरौंदा, 24 गोकुल मार्ग, एस.के. पुरी, बोरिंग रोड, पटना में भी निरीक्षण किया गया। विभाग के अनुसार, यहां ड्रेनेज सिस्टम, डस्टबिन, पानी की जांच रिपोर्ट, कीट नियंत्रण संबंधी दस्तावेज और कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं पाए गए। खाद्य सामग्री संभालने वाले कर्मचारियों के पास एप्रन और ग्लव्स भी नहीं मिले। निरीक्षण के दौरान नमकीन एक किलोग्राम, पानी पुरी पैलेट एक किलोग्राम, कोकोनट पाउडर 500 ग्राम और एवरेस्ट सांभर मसाला 50 ग्राम जब्त कर नष्ट किए गए। प्रतिष्ठान को कमियों में सुधार के लिए 14 दिनों का नोटिस दिया गया।गणपति फूड प्लाजा को साफ-सफाई का निर्देशफुलवारीशरीफ में एम्स गेट नंबर-1 के निकट स्थित गणपति फूड प्लाजा का भी निरीक्षण किया गया। विभाग ने प्रतिष्ठान को साफ-सफाई बनाए रखने का निर्देश दिया।खाद्य कारोबारियों को नियमों के पालन की हिदायतखाद्य संरक्षा विभाग ने सभी खाद्य कारोबारियों से प्रतिष्ठानों में स्वच्छता बनाए रखने, खाद्य सामग्री का सुरक्षित भंडारण करने और शाकाहारी एवं मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग रखने की अपील की है। साथ ही जरूरी लाइसेंस, प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज उपलब्ध रखने तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।विभाग के इस अभियान का उद्देश्य खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता और सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करना तथा आम लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
पटनाः भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में परिजनों को अब भी न्याय का इंतजार है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आश्वासन के बावजूद परिवार का आरोप है कि अब तक न तो उन्हें न्याय मिला है और न ही मामले में आरोपित लोगों की गिरफ्तारी हुई है। भरत तिवारी की मां ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और एक बार फिर मुख्यमंत्री से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाने की बात कही।मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोपभरत तिवारी की मां का कहना है कि मुख्यमंत्री से आश्वासन मिलने के बाद भी मामले में अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों को वह इस मामले में दोषी मानती हैं, उनकी गिरफ्तारी भी नहीं हुई है।परिजनों के मुताबिक, जांच के नाम पर अधिकारियों की ओर से पूछताछ तो की जा रही है, लेकिन अब तक जांच का कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया है। परिवार लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।जांच की प्रक्रिया पर उठाए सवालमीडिया से बातचीत के दौरान भरत तिवारी की मां ने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल पूछताछ तक सीमित हैं और जांच में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने मामले में तेजी से और निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई किए जाने की मांग की।परिवार का कहना है कि जब तक मामले की जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई नहीं होती, तब तक उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद अधूरी ही रहेगी।फिर मुख्यमंत्री से मिलकर न्याय की लगाएंगी गुहारभरत तिवारी की मां ने कहा कि वह एक बार फिर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करेंगी और अपने बेटे के मामले में न्याय की मांग उठाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से मामले में आगे की कार्रवाई होगी और परिवार को न्याय मिल सकेगा। अब इस मामले में सबकी नजर जांच की प्रगति, संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदमों पर है।
पटनाः पटना पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बबलू कुमार के रूप में हुई है, जो फिजिक्स से स्नातक है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ देशभर में साइबर ठगी से जुड़ी 40 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। शुरुआती जांच में उसके बैंक खातों से करीब 50 से 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। पुलिस को आशंका है कि जांच का दायरा बढ़ने पर ठगी की कुल रकम और अधिक हो सकती है।रामकृष्णानगर में छापेमारी कर आरोपी गिरफ्तारपुलिस ने पटना के रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र स्थित आदर्श कॉलोनी में छापेमारी कर बबलू कुमार को गिरफ्तार किया। आरोपी मूल रूप से शेखपुरा जिले के सलैया गांव का रहने वाला है और पटना में किराए के मकान में रहकर कथित तौर पर साइबर ठगी के नेटवर्क के लिए काम कर रहा था।पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से 15 एटीएम कार्ड, 7 बैंक पासबुक और 2 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। साइबर थाने की प्रभारी संगीता के अनुसार, एनसीआरबी पोर्टल पर आरोपी के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों से 40 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।ऑनलाइन ट्रेडिंग में कर्ज के बाद ठगी के नेटवर्क से जुड़ने का आरोपपुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि बबलू पहले गांव में ऑनलाइन ट्रेडिंग करता था। इस दौरान उसे कथित तौर पर 5 से 6 लाख रुपये का कर्ज हो गया। कर्ज चुकाने के लिए वह नौकरी की तलाश में राजस्थान गया, जहां पुलिस के मुताबिक, उसकी मुलाकात साइबर ठगी से जुड़े लोगों से हुई।आरोप है कि इसके बाद वह इस नेटवर्क में शामिल हो गया। गिरोह ने उसे उत्तर प्रदेश के बस्ती में बैंक खाते खुलवाने के लिए भेजा था। पुलिस के अनुसार, 20 हजार रुपये के लालच में उसने आधार कार्ड में पता बदलवाकर दो बैंकों में खाते खुलवाए। बाद में खातों में बड़ी रकम आने के बाद बैंक ने उन्हें ब्लॉक कर दिया। इसके बाद आरोपी पटना आ गया और रामकृष्णानगर इलाके में रहकर कथित तौर पर गिरोह के लिए काम करने लगा।फर्जी बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर करने का आरोपजांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश में सक्रिय कथित सरगनाओं ने बबलू का संपर्क रोहतास जिले की एक महिला से कराया था। पुलिस को संदेह है कि महिला फर्जी या किराए के बैंक खाते उपलब्ध कराती थी। इन खातों के एटीएम कार्ड और चेकबुक कथित तौर पर बबलू के पास रहते थे।पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद बबलू पटना के अलग-अलग एटीएम से नकदी निकालता था। आरोप है कि इस काम के बदले महिला को प्रति खाते 10 हजार रुपये और बबलू को निकाली गई रकम का 5 से 8 प्रतिशत कमीशन मिलता था। निकाली गई रकम का शेष हिस्सा कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए राजस्थान और उत्तर प्रदेश में मौजूद कथित आरोपियों के खातों में भेजा जाता था।50 से 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जांचपुलिस की शुरुआती जांच में आरोपी के बैंक खातों से करीब 50 से 60 लाख रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली है। पुलिस को आशंका है कि अन्य बैंक खातों और संभावित पीड़ितों की जानकारी सामने आने पर साइबर ठगी की कुल रकम बढ़ सकती है।फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है। साथ ही संदिग्ध बैंक खातों, एटीएम कार्डों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।साइबर एसडीपीओ संगीता का बयान अहमइस मामले में साइबर एसडीपीओ संगीता का बयान जांच की दिशा और गिरोह के काम करने के तरीके को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। पुलिस की जांच पूरी होने और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही इस अंतरराज्यीय नेटवर्क की पूरी संरचना तथा कथित ठगी की कुल रकम का खुलासा हो सकेगा।पटना से विवेक कुमार की रिपोर्ट
दरभंगा : बड़ी खबर बिहार के दरभंगा से है जहां बिहार विधान परिषद चुनाव में दरभंगा स्नातक एमएलसी सीट से राजद प्रत्याशी अनिल कुमार झा चुनाव जीत गए हैं. उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सर्वेश कुमार को पराजित किया.बिहार एमएलसी चुनाव में दरभंगा सबसे बड़ी हॉट सीट बन गई. यहां शिक्षक सीट का परिणाम दूसरे दिन के शुरु होने से पहले ही आ गया. लेकिन स्नातक सीट के लिए गिनती 3 दिन तक चली. मतगणना दरभंगा के लहेरियासराय स्थित खेल भवन सह व्यायामशाला परिसर में चल रही थी. लेकिन आखिरी दौर में राजद ने दरभंगा स्नातक सीट पर भारी उलटफेर कर दिया.दरभंगा स्नातक एमएलसी सीट पर जीत के लिए किसी भी प्रत्याशी को 31911 वोट की आवश्यकता थी. भाजपा के सर्वेश कुमार सबसे आगे दिख रहे थे. लेकिन वो भी इतने वोट नहीं ला पाए थे. लेकिन अखिरी राउंड की काउंटिंग समाप्त होते ही जो नतीजे आए उसने सबको हैरान कर दिया. राजद के अनिल कुमार झा ने इस सीट पर भाजपा के साथ सबको चौंकाते हुए जीत दर्ज की.राजद, अनिल कुमार झा-जीतेभाजपा, सर्वेश कुमार-हारेजेएसपी, इम्तेयाज नूरानी -हारे..
Patna : पटना हाईकोर्ट ने खगड़िया पुलिस द्वारा बिना लिखित कारण के शिक्षक को गिरफ्तार किए जाने पर सख्त नाराजगी जाहिर की. कोर्ट ने कहा कि ऐसा करके सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और संवैधानिक अधिकारों की धज्जियाँ उड़ायी गई.जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस अंशुल की खंडपीठ ने खगड़िया जिले के चित्रगुप्त नगर थाने में दर्ज एक मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही और मनमानी पर कड़ा रुख अपनाया. कोर्ट ने एसपी और दारोगा से ऑनलाईन पूछताछ की. ये मामला मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज स्थित सरकारी हाई स्कूल के शिक्षक दिव्य प्रकाश की पत्नी (भवानी कुमारी, जो खगड़िया सदर अस्पताल में बतौर नर्सिंग स्टाफ कार्यरत थीं, द्वारा 12 फरवरी, 2026 को कथित तौर पर आत्महत्या किये जाने का है. इस संबंध में चित्रगुप्त नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 108/3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. 05 जून, 2026 को चित्रगुप्त नगर पुलिस ने दिव्य प्रकाश को खगड़िया सिविल कोर्ट परिसर के बाहर से गिरफ्तार कर लिया. इसके खिलाफ शिक्षक के पिता शशि भूषण प्रसाद सिंह ने पटना हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर कर गिरफ्तारी को असंवैधानिक घोषित करने और मुआवजा देने की मांग की. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने दलील दी कि पुलिस ने गिरफ्तारी के समय अभियुक्त को लिखित में गिरफ्तारी का कारण नहीं सौंपा, जो संविधान के अनुच्छेद 21 और 22(1) तथा BNSS और CrPC की धाराओं का सीधा उल्लंघन है. पुलिस ने एक 'टेम्पलेट/रेडीमेड अरेस्ट मेमो' का इस्तेमाल किया, जिसमें महज खानापूरी की गई थी.सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों (मिहिर राजेश शाह, विहान कुमार, और राजेंद्र राजन मामले) का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि केवल एक औपचारिक अरेस्ट मेमो पकड़ा देना संवैधानिक अधिकारों का अनुपालन नहीं माना जा सकता. एसपी और दरोगा ऑनलाइन तलब किये गए. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल खगड़िया के पुलिस अधीक्षक पुष्कर आनंद और चित्रगुप्त नगर थाने की सब-इंस्पेक्टर ज्योत्सना कुमारी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया. खगड़िया एसपी ने कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि गिरफ्तारी के वक्त आरोपी को कोई लिखित आधार नहीं दिया गया था. जांच अधिकारी का मानना था कि चूंकि कोर्ट से वारंट जारी था, इसलिए आरोपी को सीधे गिरफ्तार किया जा सकता था, चाहे प्रक्रिया का पालन हो या न हो. हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की इस ढिलाई और कानून की अनदेखी पर गहरी नाराजगी जताई. निचली अदालत के रिमांड ऑर्डर पर भी सवाल उठाये गए.याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, खगड़िया ने बिना पुलिस की कमियों को देखे और संवैधानिक प्रक्रिया के उल्लंघन को नजरअंदाज करते हुए 06 जून, 2026 को आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार से 58 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा मांगने के साथ-साथ दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से इसकी कटौती करने और विभागीय जांच की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में, पटना हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को तय की है. कोर्ट ने राज्य सरकार (गृह विभाग, डीजीपी) और शिकायतकर्ता को 26 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है. राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों की इस नाकामी से एक बार फिर यह साबित होता है कि जमीनी स्तर पर पुलिस प्रक्रियात्मक नियमों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की किस कदर अनदेखी कर रही है. इस मामले पर अगली सुनवाई 30 अक्टूबर ,2026 को होगी.पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
मुंगेरः मुंगेर जिले के धरहरा थाना क्षेत्र में रसोई गैस सिलेंडर से रिसाव ठीक करने के दौरान अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में नयन इंडेन गैस एजेंसी के डिलीवरी कर्मी समेत तीन लोग झुलस गए। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई। हालांकि, ग्रामीणों की सूझबूझ और तत्परता से आग पर काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। सभी घायलों को धरहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, प्राथमिक उपचार के बाद तीनों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है।सिलेंडर से दोबारा गैस रिसाव होने पर हुई घटनामिली जानकारी के अनुसार, घायलों में दयानंद यादव के पुत्र अमन कुमार, अनुराग कुमार और नयन इंडेन गैस एजेंसी के डिलीवरी कर्मी दीपक कुमार शामिल हैं। अमन कुमार के मुताबिक, उनके घर में रसोई गैस सिलेंडर से रिसाव शुरू हुआ था। इसके बाद वह सिलेंडर लेकर गैस एजेंसी पहुंचे, जहां तकनीकी कर्मियों ने सिलेंडर की रबर यानी ओ-रिंग बदलकर गैस रिसाव बंद होने की बात कही थी। हालांकि, गुरुवार को सिलेंडर से दोबारा गैस रिसने लगी।रिसाव ठीक करने के दौरान अचानक भड़की आगबताया जा रहा है कि गांव में गैस वितरण करने पहुंची एजेंसी की गाड़ी को अमन कुमार ने रोका और सिलेंडर से दोबारा गैस रिसने की समस्या बताई। इसके बाद डिलीवरी कर्मी दीपक कुमार सिलेंडर की जांच कर रिसाव ठीक करने का प्रयास करने लगे। इसी दौरान चिंगारी के संपर्क में आने से अचानक आग भड़क उठी। आग की चपेट में आकर अमन कुमार, अनुराग कुमार और दीपक कुमार झुलस गए। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरातफरी मच गई।ग्रामीणों ने बालू, पानी और भीगे बोरों से बुझाई आगआग लगते ही स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य में जुट गए। ग्रामीणों ने बालू, पानी और भीगे बोरों की मदद से आग पर काबू पाया। इसके बाद तीनों घायलों को तत्काल धरहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। ग्रामीणों की तत्परता के कारण आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे संभावित बड़े हादसे को टालने में मदद मिली।गैस एजेंसी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालघटना के बाद ग्रामीणों ने गैस एजेंसी की सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं। सिलेंडर में पहले भी रिसाव होने और कथित तौर पर ओ-रिंग बदलने के बाद दोबारा लीकेज शुरू होने की बात सामने आने से मामले की गंभीरता बढ़ गई है।अब यह जांच का विषय है कि सिलेंडर में दोबारा गैस रिसाव क्यों हुआ और रिसाव ठीक करने के दौरान सुरक्षा संबंधी सभी जरूरी सावधानियों का पालन किया गया था या नहीं। मामले में संबंधित विभाग और गैस एजेंसी की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।मुंगेर से अमृतेष सिन्हा की रिपोर्ट
दरभंगा: बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए मद्य निषेध विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में दरभंगा में मद्य निषेध विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एनएच-27 के किनारे रानीपुर बेला स्थित एक टाइल्स गोदाम से शराब की बड़ी खेप बरामद की है। गोदाम से शराब के कुल 459 कार्टन जब्त किए गए हैं। बरामद शराब की मात्रा करीब 4 हजार लीटर बताई जा रही है, जबकि इसकी बाजार कीमत लगभग 60 लाख रुपये आंकी जा रही है।गुप्त सूचना पर मद्य निषेध विभाग की छापेमारीमिली जानकारी के अनुसार, दरभंगा मद्य निषेध विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि एनएच-27 के किनारे रानीपुर बेला स्थित एक टाइल्स गोदाम में भारी मात्रा में शराब छिपाकर रखी गई है। सूचना के सत्यापन के बाद टीम ने मौके पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान गोदाम से शराब के 459 कार्टन बरामद किए गए।संतोष चौधरी और सरोज चौधरी के गोदाम होने की जानकारीमद्य निषेध विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, संबंधित गोदाम संतोष चौधरी और सरोज चौधरी का बताया जा रहा है। हालांकि, गोदाम में शराब कैसे पहुंची, इसे किस उद्देश्य से रखा गया था और इस मामले में संबंधित लोगों की क्या भूमिका है, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। किसी की संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।एनएच-27 के किनारे गोदाम में शराब छिपाने पर सवालराष्ट्रीय राजमार्ग-27 के किनारे स्थित गोदाम से इतनी बड़ी मात्रा में शराब बरामद होने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कहीं इस गोदाम का इस्तेमाल शराब की खेप को लाने, जमा करने और दूसरे स्थानों तक पहुंचाने के लिए तो नहीं किया जा रहा था।शराब के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी टीमफिलहाल मद्य निषेध विभाग की टीम पूरे मामले की जांच में जुटी है। शराब की खेप कहां से लाई गई थी, इसे कहां पहुंचाया जाना था और इस कारोबार में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही अवैध शराब के कारोबार से जुड़े संभावित नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा।बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में शराब की बरामदगी ने एक बार फिर अवैध शराब की आपूर्ति और भंडारण पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में इस खेप के स्रोत और इसके पीछे सक्रिय लोगों के बारे में क्या जानकारी सामने आती है।दरभंगा से गिरीश कुमार की रिपोर्ट
पटना : कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (CSI), बिहार चैप्टर का 32वां वार्षिक सम्मेलन CARDICON 2026 आगामी 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को पटना के होटल मौर्या में आयोजित होगा. इस सम्मेलन में देशभर के करीब 500 हृदय रोग विशेषज्ञ, कार्डियक सर्जन और सामान्य चिकित्सक शामिल होंगे. इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘प्रिवेंशन टू इंटरवेंशन’ (रोकथाम से उपचार तक) रखी गई है.सम्मेलन से पहले 30 अक्टूबर को एक प्रेस ब्रीफिंग आयोजित की जाएगी. वहीं, 31 अक्टूबर को शाम 4 बजे सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन होगा, जिसमें बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत मुख्य अतिथि होंगे.सम्मेलन के दौरान हृदय रोगों की देखभाल में हो रही नवीनतम प्रगति, जांच की आधुनिक तकनीकों और उपचार की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी. इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध और नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों को व्यावहारिक चिकित्सा से जोड़ना है. सम्मेलन को बिहार के चिकित्सकों के लिए भी महत्वपूर्ण बताया गया है. इसके तहत बिहार काउंसिल ऑफ मेडिकल रजिस्ट्रेशन, पटना की ओर से आठ सीएमई क्रेडिट आवर्स की मान्यता दी गई है.नवजात शिशुओं के हृदय रोगों पर विशेष सत्रआयोजन अध्यक्ष डॉ. बी.बी. भारती के अनुसार, वैज्ञानिक कार्यक्रमों में नवजात शिशुओं के हृदय रोगों के उपचार पर केंद्रित विशेष सत्र भी आयोजित होगा. इसमें ‘डॉ. ए. के. ठाकुर मेमोरियल ओरिएशन’ के तहत शिशुओं में जन्मजात हृदय रोगों के उपचार से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी.लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से होंगे सम्मानितसम्मेलन में हृदय रोग विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ चिकित्सकों को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. इनमें डॉ. यू. सी. सामल और डॉ. एस. एस. चटर्जी शामिल हैं. आयोजकों के अनुसार, चिकित्सा के क्षेत्र में उनके समर्पण, अनुभव और बिहार में चिकित्सा सेवाओं के विकास में योगदान को देखते हुए यह सम्मान दिया जाएगा.राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ करेंगे शिरकतवैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष और प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि सम्मेलन का वैज्ञानिक कार्यक्रम आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और नवीनतम शोध को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. देश के प्रमुख विशेषज्ञ जटिल हृदय रोगों से जुड़े मामलों पर अपने अनुभव साझा करेंगे. आयोजकों को उम्मीद है कि इस सम्मेलन से बिहार में हृदय रोगों के उपचार और चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा मिलेगी.पटना से अंकिता की रिपोर्ट-