BIHAR NEWS : पटना के परफेक्ट पीजी हॉस्टल की छात्रा के परिजनों से मिलने गोह पहुँची आइसा–ऐपवा की ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’

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पटना: आइसा–ऐपवा की संयुक्त‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’,जो 3 फरवरी 2026 को पटना के बुद्धा पार्क से जन-सुनवाई के साथ शुरू हुई थी,जहानाबाद,नालंदा,नवादा और गया जिलों में जनसंवाद के बाद शनिवार को औरंगाबाद जिले के गोह पहुँची.

परिस्थितियों में मृत पाई गई छात्रा अनामिका के परिजनों से मिलकर उन्हें न्याय के संघर्ष में समर्थन देना और बिहार में छात्राओं की सुरक्षा के सवाल को राज्यव्यापी मुद्दा बनाना है.

गोह में यात्रा की टीम अनामिका के घर पहुँची,जहाँ पीड़िता की दादी से मुलाकात हुई,जो पोती की हत्या के बाद पूरी तरह टूट चुकी हैं. चाचा और फुआ ने बताया कि प्रशासन ने माता-पिता को पटना बुला रखा है,जबकि प्रशासन को स्वयं पीड़ित परिवार के घर आकर न्याय की गारंटी देनी चाहिए थी. परिजनों का आरोप है कि प्रशासन जाँच में देरी कर रहा है और हत्या को आत्महत्या साबित करने का दबाव व भय पैदा किया जा रहा है.

औरंगाबाद जिले के गोह की रहने वाली अनामिका की पटना के परफेक्ट पीजी हॉस्टल में हुई मौत ने बिहार में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 6 जनवरी को दोपहर 1 बजे परिवार को सूचना दी गई कि अनामिका ने फांसी लगा ली है,जबकि उसी दिन सुबह 9 बजे अनामिका ने अपनी माँ से सामान्य बातचीत की थी. यह तथ्य पूरे मामले को गहरे संदेह के घेरे में लाता है.

घटना की सूचना मिलते ही जब परिवार पटना पहुँचा,तो उन्हें पीएमसीएच सहित कई अस्पतालों में घंटों भटकाया गया. काफी देर बाद शव तक पहुँचने दिया गया. परिवार को हॉस्टल के कमरे में प्रवेश नहीं दिया गया,जबकि इसी दौरान रूम पार्टनर का सामान दूसरे कमरे में शिफ्ट कराया गया,जो स्पष्ट रूप से साक्ष्यों से छेड़छाड़ का मामला है.

पुलिस द्वारा अनामिका का मोबाइल फोन जब्त किए जाने के बावजूद,महीनों बाद भी न तो कोई डिजिटल साक्ष्य सार्वजनिक किया गया है और न ही मोबाइल परिवार को लौटाया गया है. 7 जनवरी को पोस्टमार्टम किया गया,लेकिन उसकी रिपोर्ट 29 जनवरी को दी गई. परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने के बदले एक लाख रुपये की मांग की गई,जो पूरी व्यवस्था पर शर्मनाक धब्बा है.

मामले को एक महीना बीत जाने के बावजूद न तो जाँच की कोई पारदर्शी जानकारी परिवार को दी गई है और न ही किसी दोषी पर कार्रवाई हुई है. प्रशासन लगातार इस मामले को‘आत्महत्या’बताकर खत्म करने की कोशिश कर रहा है. यह मोदी–नीतीश की डबल इंजन सरकार के संरक्षण में चल रही प्रशासनिक लीपापोती को उजागर करता है.

आइसा और ऐपवा ने कहा कि यह मामला सिर्फ अनामिका की मौत का नहीं,बल्कि बिहार में बेटियों,छात्राओं और मेहनतकश परिवारों की सुरक्षा,सम्मान और न्याय का सवाल है. जब पटना जैसे शहर में नीट की तैयारी कर रही छात्रा को न्याय नहीं मिल पा रहा,तो सरकार के‘बेटी बचाओ’के दावे पूरी तरह खोखले साबित होते हैं.

यात्रा में औरंगाबाद भाकपा-माले जिला सचिव कॉ. मुनारीक राम,ऐपवा नेत्री अलकारी देवी,मीना देवी सहित अन्य स्थानीय माले नेता मौजूद थे.

आइसा–ऐपवा की मांगें :

* पूरे मामले की स्वतंत्र,निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए

* सभी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए

* सीसीटीवी फुटेज,डिजिटल साक्ष्य और जाँच रिपोर्ट परिवार के सामने सार्वजनिक की जाए

* छात्राओं के लिए सरकारी छात्रावास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए

* सभी शिक्षण संस्थानों मेंGSCASHको सख्ती से लागू किया जाए

यह यात्रा ऐपवा महासचिव कॉ. मीना तिवारी,कॉ. संगीता सिंह,कॉ. रीता वर्णवाल,कॉ. लीला वर्मा,आइसा की राज्य अध्यक्ष कॉ. प्रीति कुमारी,राज्य सह-सचिव कॉ. दीपांकर मिश्र,कॉ. प्रिया और कॉ. अनु के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी तथा दाउदनगर के रास्ते अरवल में रात्रि विश्राम करेगी.

अंकिता की रिपोर्ट---