पटना : राष्ट्रीय कार्यक्रम 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत 'नशा छोड़े, जीवन जोड़ें' पर आधारित राज्य स्तरीय कार्यशाला का उद्घाटन विनोद सिंह गुंजियाल, सचिव समाज कल्याण विभाग द्वारा दशरथ मांझी ऑडिटोरियम, पटना में किया गया. उन्होंने कार्यशाला का संबोधन करते हुए कहा की युवा पीढ़ी देश के निर्माण में भूमिका निभाये, न की देश के लिए परेशानी का सबक बने. नशा मुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों को बिहार की जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना और उन्हें पूरी कड़ाई से लागू करना आज हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इस अवसर पर इनायत खान, प्रबंध निदेशक, महिला एवं बाल विकास निगम, डॉ. प्रीति, निदेशक, सामाजिक सुरक्षा तथा सुश्री अंजली शर्मा, निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय भी उपस्थित थे.
बता दें कि भारत को नशा मुक्त बनाने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा NAPDDR (National Action Plan for Drug Demand Reduction) योजना यानि मादक द्रव्य मांग घटाने की राष्ट्रीय कार्ययोजना बिहार में संचालित है. नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2020 को की गई है.
सचिव, समाज कल्याण ने कार्यशाला की गंभीरता को बताते हुए कहा कि इस कार्यशाला को मुख्य रूप से 03 बिन्दुओं यथा नशा मुक्त भारत अभियान, शीघ्र हस्तक्षेप और दिव्यंगता की बोझ में कमी (Early Intervention and Reduction of Disability Burden) तथा सुगम्य भारत अभियान पर विचार विमर्श किया जाना है और उसके फीडबैक को भारत सरकार को भेजना है ताकि देश स्तर पर एक सशक्त निति बनाया जा सके. उन्होंने कहा कि नशा राष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ी समस्या है.
राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. प्रीति, निदेशक, सामाजिक सुरक्षा ने योजना की प्रगति पर विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि सामाजिक सुरक्षा का वास्तविक अर्थ केवल बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवाओं को पेंशन देना भर नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को हर उस लाइलाज और गंभीर खतरे से सुरक्षित करना है जो उसके जीवन को बर्बाद कर सकता है- और आज नशा हमारे युवाओं और परिवारों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है. बिहार सरकार के समाज के सबसे कमजोर और संवेदनशील तबकों को संबल देने वाले विभाग के रूप में, सामाजिक सुरक्षा निदेशालय यह भली-भांति समझता है कि नशे की लत किस प्रकार एक हंसते-खेलते परिवार को रसातल में धकेल देती है. उन्होंने कार्यक्रम की संवेदनशीलता पर जोड़ देते हुए कहा जब घर का युवा या कमाने वाला सदस्य नशे की गिरफ्त में आता है, तो पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक तंगी के दौर से गुजरता है. ऐसे में, NAPDDR (National Action Plan for Drug Demand Reduction) और नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के माध्यम से हम निवारक कदम उठाने के साथ-साथ पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास की दिशा में सीधे तौर पर कार्य कर रहे हैं. उन्होंने जिला कार्यालयों में चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग मुस्तैदी से करने का निदेश दिया. उन्होंने कार्यक्रम की जागरूकता को और प्रभावी ढंग से प्रचार प्रसार करने पर जोड़ दिया और बताया कि नुक्कड़ नाटक, कला जत्था, और डिजिटल माध्यमों (e-pledge), offline pledge के माध्यम से जागरूकता संबंधित कार्य किये जा रहे हैं.
डॉ. प्रीती ने जानकारी देते हुए कहा कि बिहार में वर्तमान में 13 नशा मुक्ति केन्द्र का संचालन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गैर सरकारी स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से संचालित एवं State Level Coordinating Agency (SLCA) के माध्यम से अनुश्रवण कराया जाता है, अनुदान की राशि भारत सरकार द्वारा सीधा NGO को प्रदान किया जाता है. नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत मादक दव्यों में कमी संबंधी गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, अंतर-विभागीय अभिसरण नियमित समीक्षा एवं अनुश्रवण हेतु मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति, जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमिटि एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में प्रखंडस्तरीय समिति का गठन किया गया है. उन्होंने आज के कार्यशाला में भाग लेने वाले पदाधिकारियो को निदेश देते हुए कहा कि आप सभी कार्यशाला की गंभीरता और संवेदनशीलता को समझते हए इसे पूर्ण रूप से लागू करेंगे ताकि नशा मुक्त भारत अभियान के उदेश्यों को पूरा किया जा सके.
राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए अंजली शर्मा, निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय ने बताया कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण एवं सशक्तिकरण हेतु निरंतर प्रयास कर रही है तथा उनके अधिकारों की रक्षा एवं समान अवसर की पंहुच सुनिश्चित किये जाने हेतु दिव्यांगजनों से संबंधित विभिन्न अधिनियमों/नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जा रहा है.
इसी कड़ी में राज्य में दिव्यांगजनों के लिए बाधामुक्त वातावरण के निर्माण हेतु दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अध्याय-8 की धारा 40 से 46 के अंतर्गत दिये गये प्रावधान के आलोक में विभिन्न सरकारी भवनों एवं परिसरों को दिव्यांगजनों के लिए सुगम्य बनाया गया है. इसके तहत केन्द्र सरकार द्वारा क्रियान्वित सीपडा योजना के अंतर्गत बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड, बिहार, पटना द्वारा कुल 18 तथा भवन निर्माण विभाग द्वारा कुल 03 सरकारी शैक्षणिक भवनों में बाधामुक्त परिसर का निर्माण किया गया है. अब तक राज्य में लगभग 44,755 भवन दिव्यांगजन हेतु सुगम्य बनाये गये हैं. इसी प्रकार परिवहन व्यवस्था एवं वेब पोर्टल को भी सुगम्य बनाने की दिशा में कार्य किये गए हैं. राज्य में अब तक कुल 45 वेबसाइटों को दिव्यांगजनों के लिए सुगम्य बनाया गया है. इसके अतिरिक्त, शिक्षा विभाग द्वारा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों/विद्यार्थियों को सुगम एवं समावेशी शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ब्रेल मुद्रित सामग्री (Braille Printed Material), ब्रेलर स्लेट (Brailler Slate), अबेकस (Abacus) एवं टेलर फ्रेम (Taylor Frame) आदि शिक्षण सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं. राज्य में सुगम्य वातावरण के निर्माण एवं संवर्द्धन के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों की सुगम्यता की स्थिति की समीक्षा की जाती है. इसी क्रम में वर्ष 2025 एवं 2026 के दौरान राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों का Yes to Access App के माध्यम से सुगम्यता ऑडिट (Accessibility Audit) किया गया.
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजानो हेतु राज्य में District Early Intervention Center की संख्या सीमित होने के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों के जरूरतमंद दिव्यांगता एवं विकासात्मक विलंब से प्रभावित बच्चों का इसके लाभ से वंचित रहने की संभावना को देखते हुए सक्षम, समाज कल्याण विभाग अंतर्गत राज्य के सभी 101 अनुमडलों में संचालित बुनियाद केन्द्रों के माध्यम से जरूरतमंद दिव्यांग बच्चों को Early Intervention की सेवाएँ उपलब्ध कराने संबंधी कार्ययोजना पर कार्य किया जा रहा है.
इस कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को विशेषज्ञों डॉ. शम्भू, एम्स, पटना, डॉ. उमा शंकर सिन्हा, डॉ. अशोक कुमार सिन्हा, बी.के. स्नेह राज, ब्रह्म कुमारी, पटना, संजय कुमार, दिव्य ज्योति पटना, नमिता, आर्ट ऑफ़ लीविंग, पटना, फजले रब्बानी सिद्दकी, सक्षम ने कार्यशाला को प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभिन्न विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला. इस अवसर पर सामाजिक सुरक्षा निदेशालय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय तथा सक्षम के पदाधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित थे. अंत में गायत्री कुमारी, संयुक्त निदेशक, सामाजिक सुरक्षा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
शपथ
“प्रिये साथियों, युवा किसी भी राष्ट्र की उर्जा एवं शक्ति के प्रतीक होते है. समाज तथा देश के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान होता है. अतः नशामुक्त भारत अभियान में हम आज यह शपथ लेते हैं कि न केवल अपने समुदाय, परिवार, मित्रों बल्कि स्वयं को भी नशे से दूर रखेंगे. मै प्रतिज्ञा करता हूँ कि अपने जिले, अपने राज्य और अपने देश को नशामुक्त रखने में अपनी क्षमता अनुसार हर संभव प्रयास करूँगा. जय हिन्द”
पटना से अंकिता सिंह की रिपोर्ट-
