दरभंगा फैमिली कोर्ट को दो सप्ताह में जांच पूरी करने का निर्देश,गार्जियनशिप केस की रोजाना होगी सुनवाई;तीन महीने में फैसला करने का लक्ष्य
पटना: पटना हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बच्ची के अधिकार, सुरक्षा और बेहतर भविष्य को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत के सामने मामला आया कि जिस उम्र में बच्ची के हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए, उस उम्र में उससे कथित तौर पर अपनी मां की चाय दुकान पर काम कराया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दरभंगा फैमिली कोर्ट को दो सप्ताह यानी 14 दिनों के भीतर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है।

बच्ची के भविष्य को लेकर हाईकोर्ट गंभीर
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि बच्ची के साथ श्रम कराए जाने या उसकी उपेक्षा किए जाने की बात जांच में सही पाई जाती है, तो उसके संरक्षण और सर्वोत्तम हित में तत्काल उचित कदम उठाए जाएं। अदालत ने साफ किया कि किसी भी परिस्थिति में बच्ची के अधिकारों और सुरक्षित भविष्य से समझौता नहीं किया जा सकता।

पिता ने हाईकोर्ट में लगाई थी गुहार
यह मामला दरभंगा निवासी अनुराग की नाबालिग बेटी ओरा मिश्रा से जुड़ा है। पिता ने अपनी बेटी के अधिकारों और सुरक्षित भविष्य को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि बच्ची की मां निगम रानी कथित तौर पर पूर्व में जारी न्यायिक आदेशों का पालन नहीं कर रही हैं। साथ ही मामले की सुनवाई में भी अपेक्षित सहयोग नहीं किया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि बच्ची को पढ़ाई-लिखाई के उचित माहौल से दूर रखकर मां की चाय दुकान पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

14दिनों में जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दरभंगा फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच करें। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या वास्तव में बच्ची से चाय दुकान पर काम कराया जा रहा है और क्या उसकी उचित देखभाल एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। यदि बच्ची की उपेक्षा या असुरक्षा की बात सामने आती है, तो उसके संरक्षण और कल्याण के लिए तत्काल आवश्यक आदेश पारित किए जाएंगे।

तीन महीने में गार्जियनशिप केस के निपटारे का लक्ष्य
हाईकोर्ट ने गार्जियनशिप केस की सुनवाई में भी तेजी लाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि मामले की सुनवाई दिन-प्रतिदिन की जाए, ताकि अनावश्यक देरी न हो और तीन महीने के भीतर बच्ची के हित में उचित निर्णय लिया जा सके। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने भी बच्ची की सुरक्षा, देखभाल और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

बच्ची का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि
हाईकोर्ट ने अपने रुख से स्पष्ट कर दिया कि बच्चे का कल्याण, सुरक्षा और सर्वोत्तम हित न्यायिक प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी नाबालिग के अधिकारों और उसके उज्ज्वल भविष्य के साथ समझौता न हो। अब सबकी नजर दरभंगा फैमिली कोर्ट की जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली सुनवाई पर टिकी है।

पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट