पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे समेत चार बड़ी परियोजनाएं प्रस्तावित,बिहार में सड़क और कनेक्टिविटी का नेटवर्क होगा मजबूत
पटना: बिहार में सड़क और आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर राज्य की महत्वपूर्ण सड़क एवं एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने का अनुरोध किया। इन परियोजनाओं पर कुल 49,751 करोड़ रुपये खर्च होने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति बिहार के विकास में निरंतर सहयोग के लिए आभार भी जताया।

बिहार को मिलेगी 49,751 करोड़ की सड़क परियोजनाओं की सौगात! CM ने नितिन गडकरी से की जल्द मंजूरी की मांग
49,751करोड़ की चार बड़ी परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने की मांग
2 नवंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री के आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार की करीब 330 किलोमीटर लंबाई वाली चार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं को सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) से स्वीकृति मिल चुकी है। अब ये परियोजनाएं आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की अंतिम मंजूरी के लिए विचाराधीन हैं।

मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं को जल्द स्वीकृति देने का आग्रह किया। इनमें शामिल हैं:
गंडक नदी पर दो लेन पुल: एनएच-727AA के तहत मनुआपुल (बेतिया) से उत्तर प्रदेश के तिवारीपट्टी (सेवराही) को जोड़ने वाले पुल और पहुंच पथ का निर्माण। अनुमानित लागत 1,976.77 करोड़ रुपये।
पटना में छह लेन एलिवेटेड रोड: सरिस्ताबाद-दीदारगंज और अनीसाबाद-दीदारगंज खंड में छह लेन एलिवेटेड रोड एवं सर्विस रोड का निर्माण। लागत 8,455.86 करोड़ रुपये।
पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे: चार लेन के इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) पर प्रस्तावित है। लागत 31,987.11 करोड़ रुपये।
वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड हाईवे: कोणकी गांव से लेरुआ गांव तक छह लेन हाईवे का निर्माण प्रस्तावित है। लागत 7,331.40 करोड़ रुपये।

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को लेकर भी उठाई मांग
बैठक में मुख्यमंत्री ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के बिहार खंड को राष्ट्रीय एक्सप्रेस-वे के रूप में जल्द अधिसूचित करने की मांग की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार निर्माण पूर्व की प्रक्रियाओं में एनएचएआई को पूरा सहयोग दे रही है। संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अग्रिम चरण में है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से उत्तर बिहार में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और नदियों पर नए पुलों का निर्माण होने से आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।

रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे से बढ़ेगा व्यापार
मुख्यमंत्री ने रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे के संशोधित रूट को मंजूरी मिलने के बाद शुरू हुई भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जानकारी भी केंद्रीय मंत्री को दी।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना नेपाल के साथ व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ बिहार को हल्दिया बंदरगाह से सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से यह एक्सप्रेस-वे बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने इसे जल्द अधिसूचित कर स्वीकृति देने का अनुरोध किया।

मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेन निर्माण में तेजी लाने की मांग
बैठक में मुजफ्फरपुर-बरौनी एनएच-122 के चार लेन चौड़ीकरण का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से इस परियोजना के निर्माण की प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है।

13,015करोड़ की छह अन्य परियोजनाओं की DPRभी तैयार
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में करीब 2,329 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और विकास की जिम्मेदारी राज्य के पथ निर्माण विभाग को सौंपी गई है। विभाग ने 323 किलोमीटर लंबाई की छह राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की DPR तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी है। इन पर करीब 13,015 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन परियोजनाओं में विक्रमशिला पुल का पहुंच पथ और मशरख-चकिया-भिट्ठामोड़ फोरलेन चौड़ीकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं को जल्द तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति देने का अनुरोध किया।

सड़क नेटवर्क मजबूत होने से बढ़ेंगी आर्थिक गतिविधियां
बैठक में सड़क नेटवर्क के विस्तार, पुल एवं एक्सप्रेस-वे निर्माण, बेहतर कनेक्टिविटी और बाढ़ सुरक्षा से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित परियोजनाओं को मंजूरी मिलने से बिहार में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। साथ ही व्यापार, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसरों को भी गति मिलेगी। अब इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की अंतिम मंजूरी को लेकर बिहार की नजर केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) पर टिकी है।

पटना से राजीव रंजन की रिपोर्ट