प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मधुरेंदु पांडेय ने सरकार पर लगाया सौतेलापन का आरोप
PATNA : बिहार आयुष मेडिकल एसोसिएशन ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और उदासीन रवैया के कारण बिहार की आयुष चिकित्सा प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मधुरेंदु पांडेय ने राज्य के सभी राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में नामांकन पर रोक लगा दिए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष प्रकट किया है। बिहार आयुष मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मधुरेंदु पांडेय ने कहा कि आयुष चिकित्सा प्रणाली के प्रति स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अकर्मण्य एवं निरंकुश साबित हो रही है। आयुष चिकित्सा पद्धति से संबंधित कोई भी कार्य सुगमता से नहीं हो पा रहा है। चाहे वह बहाली की प्रक्रिया हो, वेतन संबंधी प्रक्रिया हो, स्थानांतरण संबंधी प्रक्रिया हो या आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालयों में शिक्षा व चिकित्सा का मामला हो सभी जगह स्वास्थ्य विभाग की सौतेलापन व्यवहार देखने को मिल रहा है। जिस कारण आयुष चिकित्सा पद्धति बिहार में पूरी तरह रसातल की ओर जा रहा है।डॉ. मधुरेंदु पांडेय ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग द्वारा बिहार के राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालयों में कॉलेज की खामियों को आधार बनाकर मौजूदा सत्र 2022- 23 में नामांकन पर रोक लगा दी है। जिस कारण बिहार के गरीब गुरबे बच्चे आयुर्वेदिक शिक्षा ग्रहण करने में मरहूम हो जाएंगे। आयुर्वेद की शिक्षा ग्रहण करने वाले बिहार के छात्र निजी कॉलेज में नामांकन कराएंगे और इसके लिए बिहार सहित देश के अन्य राज्यों में पलायन करेंगे। और भारी-भरकम राशि का भुगतान करके आयुर्वेद महाविद्यालय में नामांकन कराएंगे। इन सबके लिए बिहार के स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह जिम्मेदार है।एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आयोग ने समीक्षा के क्रम में जो भी कमियां पाई है उसके लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह जिम्मेदार है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से अनुरोध है कि इस मसले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करें ताकि राज्य के राजकीय आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय में गरीब गुरबे के बच्चों का नामांकन हो सके।डॉ. मधुरेंदु पांडेय ने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग ने आयुर्वेदिक संस्थान में शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक, अस्पताल कर्मी, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग एवं आधारभूत संरचना में कमी पाई है। इसी तरह रजिस्ट्रार, सीनियर रेजिडेंट, नर्सिंग, अधीक्षक, वार्ड बॉय , सहित अन्य कर्मियों की कमी है लैब तकनीकी सहायकों की कमी है। हर्बल गार्डन में काम करने वाले कर्मी नहीं है। बेड का अभाव है। सरकार बताए कि आखिर जो भी कमी पाई गई है उसका निराकरण करने वाला कौन है। एक तरफ सरकार हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोल रही है दूसरी तरफ विश्व का सर्वोत्तम चिकित्सा प्रणालियों में से एक आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के लिए सरकार उदासीन रवैया क्यों अपना रही है।बिहार आयुष मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मधुरेंदु पांडेय ने कहा कि नए कॉलेज ना खोलें परंतु जो पुराने राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय हैं या राज्य में आयुष चिकित्सालय हैं कम से कम उसका जीर्णोधार कर राज्य के लोगों को देसी चिकित्सा पद्धति का लाभ दिलाने का काम तो करे। उन्होंने कहा कि 3270 नियमित आयुष चिकित्सकों की बहाली स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण ही कई वर्षों से रुकी हुई है। उन्होंने इस मसले पर सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से सीधा हस्तक्षेप करने की अपील की है।
Anurag Goel·