PATNA : गया के पूर्व एसएसपी आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। फिलहाल फरार आईपीएस की जमानत पर सस्पेंस बरकरार है। गया सिविल कोर्ट में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के द्वारा दर्ज मामले में आज सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत पर दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया । बताया जा रहा है कि कल यानि शनिवार को फैसला सामने आ सकता है।

आईपीएस आदित्य कुमार के वकील एसडी संजय ने कोर्ट में कहा कि कैसे बिहार पुलिस के मुखिया एक फर्जी व्यक्ति के झांसे में आ सकते हैं। दरअसल आदित्य कुमार को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने अपनी दलील में कहा कि कोई भी व्यक्ति कैसे 40-50 बार फोन करके बिहार पुलिस के प्रधान यानि डीजीपी पर दवाब बना सकता है।वकील ने कहा कि सिविल कोर्ट से न्याय नहीं मिलने पर वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

डेढ़ महीने से फरार चल रहे आईपीएस आदित्य कुमार की गिरफ्तारी को लेकर बिहार पुलिस मुख्यालय के एडीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी को लेकर लगातार EOU और बिहार पुलिस छापेमारी कर रही है। बता दें कि पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम पर बिहार डीजीपी को फोन किया गया था। इस काम को आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार के करीबी अभिषेक अग्रवाल ने अंजाम दिया था। जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में तीन लोग गिरफ्तार किए गये है लेकिन IPS अधिकारी की खोज जारी है।

गौरतलब है कि शराब माफिया के सांठ-गांठ मामले में आईपीएस पर पैसा लेकर छोड़ने का आरोप लगा था। इस मामले तत्कालीन आईजी अमित लोढ़ा ने तत्कालीन गया एसएसपी आदित्य कुमार को पत्र लिखकर संबंधित तत्कालीन फतेहपुर थानाप्रभारी संजय कुमार पर कार्रवाई करने का आदेश दिया था। लेकिन एसएसपी ने केवल डांट-फटकार कर थानाप्रभारी को छोड़ दिया था। जिसकी शिकायत अमित लोढ़ा ने पुलिस मुख्यालय को की थी। इसके बाद जांच में तत्कालीन एसएसपी की सलिप्तता पाई गयी थी। डीएसपी की गवाही पर फतेहपुर थाना में इनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था।

पटना से मरगूब आलम की रिपोर्ट ...