झारखंड बीजेपी के दो नेताओं को पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी दी है. राजमहल के पूर्व विधायक अनंत ओझा और राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा को उत्तर प्रदेश बीजेपी का सह-प्रभारी बनाया गया है. यूपी में बीजेपी ने विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया है. उनके साथ अनंत ओझा, प्रदीप वर्मा, जगदीश पटेल और मेधा कुलकर्णी को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है.

छात्र राजनीति से शुरू हुआ अनंत ओझा का सफर

अनंत ओझा ने राजनीति की शुरुआत छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी से की थी. इसके बाद वे बीजेपी के युवा संगठन से जुड़े और संगठन में लगातार काम करते रहे. धीरे-धीरे पार्टी में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती गईं और वे झारखंड बीजेपी के प्रदेश स्तर के संगठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहे.

दो बार राजमहल से बने विधायक

2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अनंत ओझा को राजमहल से उम्मीदवार बनाया. उन्होंने चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में कदम रखा. इसके बाद 2019 में भी उन्होंने राजमहल सीट से जीत हासिल की और लगातार दूसरी बार विधायक बने. विधायक रहते हुए उन्होंने अपने क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों को विधानसभा में उठाया. साहिबगंज और राजमहल इलाके में सड़क, बिजली, गंगा से जुड़ी परियोजनाओं और दूसरे विकास कार्यों को लेकर भी वे सक्रिय रहे. हालांकि 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्हें राजमहल सीट पर हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता बनी रही. अब बीजेपी ने उन्हें झारखंड से बाहर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की जिम्मेदारी दी है.

संगठन से राज्यसभा तक पहुंचे प्रदीप वर्मा

डॉ. प्रदीप वर्मा लंबे समय से बीजेपी संगठन के साथ जुड़े हुए हैं. उन्होंने पार्टी में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं. प्रदेश सचिव और प्रदेश उपाध्यक्ष के बाद वे प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचे. 2024 में बीजेपी ने उन्हें झारखंड से राज्यसभा भेजा. इसके बाद पार्टी संगठन में भी उनकी भूमिका बढ़ी और 2026 में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिली. अब पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश बीजेपी का सह-प्रभारी बनाया है. यूपी की जिम्मेदारी मिलने के बाद झारखंड के इन दोनों नेताओं की भूमिका राज्य से बाहर भी महत्वपूर्ण हो गई है.

UP की जिम्मेदारी में झारखंड के दो चेहरों की एंट्री

उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए पार्टी ने इस बार बड़ा संगठनात्मक सेटअप तैयार किया है. विनोद तावड़े को प्रभारी बनाया गया है, जबकि चार नेताओं को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. इनमें झारखंड के दो चेहरे प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा भी शामिल हैं. दोनों नेताओं को संगठन में लंबे अनुभव और जमीनी राजनीति की पृष्ठभूमि के आधार पर यूपी की जिम्मेदारी दी गई है. अब देखना होगा कि झारखंड की राजनीति में संगठनात्मक अनुभव हासिल करने वाले ये दोनों नेता उत्तर प्रदेश में पार्टी की जिम्मेदारी को किस तरह आगे बढ़ाते हैं.

रांची से संवाददाता राहुल कुमार पांडेय की रिपोर्ट