पटना : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शनिवार को लोक सेवक आवास में प्रख्यात पर्यावरणविद् पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने बिहार में विकास योजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया. उन्होंने जल संरक्षण, वनों के विस्तार और नदियों के पुनर्जीवन को राज्य के विकास मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने का सुझाव दिया.
डॉ. जोशी ने कहा कि विकास का आकलन केवल आर्थिक प्रगति और सकल घरेलू उत्पाद (GDP)के आधार पर नहीं होना चाहिए,बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि विकास योजनाओं से पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को कितना लाभ मिल रहा है. उन्होंने उत्तराखंड की तर्ज पर बिहार में भी ग्रास एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP)की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया. इससे आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण की स्थिति में होने वाले बदलावों का भी आकलन किया जा सकेगा.
बिहार डेवलपमेंट डायलॉग का सुझाव
मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान डॉ. जोशी ने‘बिहार डेवलपमेंट डायलॉग’शुरू करने का सुझाव दिया. इसके माध्यम से विभिन्न संस्थानों,विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों को एक मंच पर लाकर राज्य के विकास की प्राथमिकताओं तथा पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की जा सकती है. इससे विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी.
जल संरक्षण और जनभागीदारी पर जोर
डॉ. जोशी ने बिहार यात्रा के दौरान बांका की सफाई व्यवस्था की सराहना की. उन्होंने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए आम लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण है. छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं.
गौरतलब है कि डॉ. अनिल प्रकाश जोशी दो अक्टूबर को नेपाल के जनकपुर धाम से 16 सदस्यीय दल के साथ साइकिल यात्रा पर निकले हैं.‘प्रकृति ही प्रभु है’संदेश के साथ शुरू हुई लगभग तीन हजार किलोमीटर की यह यात्रा पर्यावरण,हिमालय और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की जा रही है.
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
