झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिवंगत माता रूपी सोरेन का दशकर्म उनके पैतृक गांव नेमरा में पूरे पारंपरिक और धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत पूरा परिवार और देश भर से पहुंचे रिश्तेदार इस शोक सभा और अनुष्ठान में सम्मिलित हुए।शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नेमरा घाट से अपनी दिवंगत माता रूपी सोरेन का अस्थि-कलश लेकर अपने पैतृक आवास पहुंचे। यहां विधि-विधान के साथ अस्थि-कलश को आंगन में रखा गया, जिसके बाद संथाली रीति-रिवाजों के अनुसार दशकर्म की रस्में शुरू हुईं।सुबह ग्यारह बजे से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के सभी सदस्य शामिल हुए। इस दौरान नेमरा के मांझी हड़ाम प्रमुख हेमंत सोरेन प्रमाणिक हड़ाम, बीजू सोरेन, कुडूम हड़ाम, नाइके हड़ाम और चेतन टुडू ने संथाली परंपरा के मुताबिक सभी अनुष्ठान पूरे करवाए।दशकर्म के इस अवसर पर विधायक कल्पना सोरेन, रेखा सोरेन और परिवार की अन्य महिला सदस्यों ने मिलकर भोजन तैयार किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी परिजनों के साथ पारंपरिक रूप से भोजन परोसने की रस्म में हिस्सा लिया।

इसके बाद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में परिवार के सदस्य प्रसाद लेकर पास के तालाब पर पहुंचे। यहाँ बाल और नाखून कटवाने समेत मुंडन से जुड़ी पारंपरिक रस्में निभाई गईं। वहीं, परिवार की महिलाएं तालाब के दूसरी ओर बने पंडाल में धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हुईं। 'छूतका' उतारने की रस्म के बाद दशकर्म के बाकी विधि-विधान पूरे किए गए।दिवंगत रूपी सोरेन के दशकर्म में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से सगे-संबंधी और रिश्तेदार नेमरा पहुँचे थे। इस दौरान दयानंद सोरेन, परमानंद सोरेन, राहुल सोरेन, दिव्यांशु सोरेन, सतीश मुर्मू, जीतलाल टुडू और विनोद किस्कू के साथ-साथ मुख्यमंत्री के पुत्र नितिन सोरेन, अंश सोरेन, दिवंगत रूपी सोरेन की बेटियां, दामाद और अन्य परिजनों ने पारंपरिक अनुष्ठानों में पूरी श्रद्धा के साथ भाग लिया।