पटना : बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में जातीय समीकरण और दलों के प्रदर्शन को लेकर चर्चा तेज हो गई है. शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में हुए इस चुनाव में भूमिहार समाज से आने वाले प्रत्याशियों ने सबसे अधिक सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं, यादव, राजपूत और मल्लाह समाज के उम्मीदवारों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

भूमिहार समाज के पांच प्रत्याशियों को मिली जीत

चुनाव परिणामों के मुताबिक, आठ सीटों में पांच पर भूमिहार समाज के प्रत्याशियों ने जीत हासिल की. इनमें तिरहुत शिक्षक सीट से भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह, पटना शिक्षक सीट से राजद के संजीव कुमार सिंह, पटना स्नातक सीट से जदयू के नीरज कुमार, दरभंगा शिक्षक सीट से जन सुराज के डॉ. सुरेश प्रसाद राय और दरभंगा स्नातक सीट से भाजपा के सर्वेश कुमार शामिल हैं.

कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के डॉ. एनके यादव ने जीत दर्ज की. वे यादव समाज से आते हैं. सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज ने सफलता हासिल की, जबकि तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय वंशीधर ब्रजवासी विजयी रहे, जो मल्लाह समाज से आते हैं.

भाजपा तीन सीटों के साथ सबसे आगे

पार्टीवार परिणामों में भाजपा ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की. जदयू, राजद और जन सुराज को एक-एक सीट मिली, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की. सारण शिक्षक सीट से जीते राहुल राज को भाजपा का बागी बताया गया है.

कई सीटों पर बदले राजनीतिक समीकरण

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राजद के संजीव कुमार सिंह ने भाजपा के नवल किशोर यादव को हराया. दरभंगा शिक्षक सीट पर जन सुराज के डॉ. सुरेश प्रसाद राय की जीत से पार्टी का बिहार विधान परिषद में खाता खुला. कोसी स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. एनके यादव ने राजद प्रत्याशी को लगभग10हजार मतों से पराजित किया.

इन नतीजों ने बिहार की राजनीति में जातीय प्रतिनिधित्व, स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ को लेकर नई बहस छेड़ दी है. हालांकि, इन आठ सीटों के परिणामों के आधार पर पूरे बिहार के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा.

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-