पटना: बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के जींस और टी-शर्ट पहनकर आने पर रोक लगाने के शिक्षा विभाग के निर्देश को लेकर विवाद गहराने लगा है। बिहार शिक्षक संघ ने विभाग के इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे शिक्षा के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला कदम बताया है।

बिहार प्राथमिक शिक्षक संघ के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी एवं पटना के एक सरकारी विद्यालय के प्राचार्य मनोज कुमार ने कहा कि शिक्षा विभाग को शिक्षकों के पहनावे पर निर्देश जारी करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी समस्याओं को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।

60 प्रतिशत विद्यार्थियों को अब तक नहीं मिली पाठ्य पुस्तकें

उन्होंने कहा कि राज्य में अब भी करीब 60 प्रतिशत विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। विद्यालयों में भवन और कमरों की कमी है। शिक्षकों का रेशनलाइजेशन भी लंबित है। ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करने की जरूरत है।

ड्रेस कोड लागू करना है तो सरकार उपलब्ध कराए कपड़े

मनोज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू करना चाहती है तो पुलिसकर्मियों की तरह शिक्षकों के लिए भी पोशाक निर्धारित करे और कपड़े सिलवाकर उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि सामान्य जींस पैंट के साथ फुल शर्ट पहनकर विद्यालय आने में कोई अशालीनता नहीं है। समय के साथ पहनावे में बदलाव आया है और शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी एवं कार्यस्थल की गरिमा का पूरा एहसास है।

तस्वीर वायरल होने पर कार्रवाई को बताया अनुचित

शिक्षकों की तस्वीरें वायरल होने के बाद कार्रवाई किए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी शिक्षक की परिस्थिति को समझे बिना तस्वीरों के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं है।

बुनियादी सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान दे सरकार

मनोज कुमार ने मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया कि शिक्षकों को निर्देश देने के साथ-साथ विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं, पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाए। शिक्षक संघ ने साफ किया है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि केवल शिक्षकों के पहनावे पर सख्ती।