सीवान/छपरा:बिहार विधान परिषद के सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई है. राष्ट्रीय जनता दल ने इस सीट से प्रो. जयराम यादव को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है. वहीं जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से ई. आनंद पुष्कर को एनडीए प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारा गया है.RJD ने11सितंबर2026को जारी अपनी सूची में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रो. जयराम यादव के नाम की घोषणा की थी.
जयराम यादव की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बनी हुई है. वर्ष2023में उन्हें जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ का प्रदेश महासचिव बनाए जाने की सार्वजनिक रिपोर्ट सामने आई थी. अब वे राजद के टिकट पर सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं.
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उनकी पत्नी संगीता देवी को लेकर भी जदयू संगठन में कार्रवाई की खबर सामने आई है. संगीता देवी सीवान जिला परिषद की अध्यक्ष और जदयू की प्रदेश सचिव के रूप में राजनीतिक एवं संगठनात्मक भूमिका में रही हैं. सार्वजनिक रिपोर्टों में पति-पत्नी के अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े होने की चर्चा भी सामने आई है.
जदयू की ओर से पार्टी अनुशासन के मद्देनजर संगीता देवी को संगठनात्मक पद से हटाने/निष्कासित करने की कार्रवाई की गई है. पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जयराम यादव के राजद में जाने और चुनाव मैदान में उतरने के बाद दोनों की राजनीतिक भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर गंभीरता से विचार किया गया.
एक ही परिवार, अलग-अलग राजनीतिक रास्ते
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक ही परिवार के पति-पत्नी अब अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ दिखाई दे रहे हैं. एक ओर प्रो. जयराम यादव राजद के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संगीता देवी लंबे समय तक जदयू के संगठन से जुड़ी रही हैं.
जयराम यादव के राजद प्रत्याशी बनने के बाद सीवान और सारण क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है. वहीं जदयू ने शिक्षक मतदाताओं के बीच अपने प्रत्याशी ई. आनंद पुष्कर के नेतृत्व में अभियान तेज कर दिया है.
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिले शामिल हैं. ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के सामने पूरे क्षेत्र में शिक्षक मतदाताओं तक पहुंच बनाने की चुनौती है.
आने वाले दिनों में दोनों दलों के संगठनात्मक अभियान, शिक्षक मुद्दों पर प्रत्याशियों की प्राथमिकताएं और स्थानीय राजनीतिक समीकरण इस चुनाव को और अधिक चर्चित बना सकते हैं.
