झारखंड में शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले वित्त रहित शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षक और कर्मचारी एक बार फिर सड़क पर हैं। गांधी जयंती के अवसर पर, 'झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा' के आह्वान पर राज्यभर के करीब 10 हजार शिक्षकों और कर्मचारियों ने एक दिवसीय उपवास रखा।मोर्चा ने पहले मुख्यमंत्री आवास के घेराव का कार्यक्रम तय किया था, लेकिन जिला प्रशासन से अनुमति न मिलने के बाद आंदोलन का स्वरूप बदल दिया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए मार्ग पर चलते हुए, शिक्षकों ने शांतिपूर्ण तरीके से उपवास रखकर सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकृष्ट कराया।

मोर्चा की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—

  • पहली: वित्त रहित संस्थानों के अनुदान में 75% वृद्धि के प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट के समक्ष रखना, जिस पर विधि और वित्त विभाग की सहमति मिल चुकी है।

  • दूसरी: शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा और वेतनमान देने के संबंध में कार्मिक विभाग के पत्र पर आगे की कार्रवाई करना।

  • तीसरी: इंटरमीडिएट, माध्यमिक, संस्कृत और मदरसा विद्यालयों के लिए सेवा शर्त नियमावली का निर्माण।

  • और चौथी: वित्त रहित स्कूलों के विद्यार्थियों को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ फिर से बहाल करना।"

"इस सिलसिले में आगामी 8 अक्टूबर को रांची के धुर्वा स्थित सर्वोदय बाल निकेतन उच्च विद्यालय में एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में राज्यभर के प्रधानाचार्य और शिक्षक प्रतिनिधि शामिल होंगे, जहां आंदोलन की अगली और कड़ी रूपरेखा तय की जाएगी।