पटना: पटना हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की हृदय गति रुकने से मौत होने पर भी उसके परिजनों को अनुग्रह अनुदान राशि दी जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए,न कि सरकारी संकल्प की तकनीकी व्याख्या के आधार पर सहायता देने से इनकार करना चाहिए।
बुधवार को जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा बिक्रम सिंह की खंडपीठ ने जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने अनुग्रह राशि का भुगतान9प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने और याचिकाकर्ता को मुकदमे के खर्च के रूप में25हजार रुपये देने के आदेश को भी बरकरार रखा।
क्या है पूरा मामला?
मामला पुलिस निरीक्षक जयप्रकाश की ड्यूटी के दौरान हुई मौत से जुड़ा है। जयप्रकाश गोपालगंज के सदर अंचल में पुलिस निरीक्षक के पद पर तैनात थे। सरस्वती पूजा के दौरान मूर्ति विसर्जन को लेकर उत्पन्न विवाद के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें हथुआ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के साथ तैनात किया गया था।
ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें सरकारी वाहन से चिकित्सक के पास ले जाया गया,जहां हृदय गति रुकने के कारण उनकी मृत्यु होने की बात कही गई।
मृतक पुलिस निरीक्षक की पत्नी मधु भारती ने अनुग्रह अनुदान राशि के भुगतान के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
सरकार ने क्यों किया था भुगतान का विरोध?
राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई थी कि सरकारी प्रावधानों के तहत अनुग्रह राशि का भुगतान उग्रवादी या अन्य हिंसक गतिविधियों में हुई मौत के मामलों में किया जाता है।
सरकार का कहना था कि जयप्रकाश की मृत्यु कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनाती के दौरान हृदय गति रुकने से हुई थी। इसलिए इस मामले में अनुग्रह राशि देने का प्रावधान लागू नहीं होता।
एकलपीठ ने माना था अनुग्रह राशि का हकदार
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने उपलब्ध तथ्यों और न्यायिक फैसलों के आधार पर मधु भारती को अनुग्रह राशि का हकदार माना था। अदालत ने राशि का भुगतान मृत्यु की तारीख से9प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करने का निर्देश दिया था।
इसके अलावा,याचिकाकर्ता को अनावश्यक रूप से मुकदमा लड़ने के लिए बाध्य किए जाने के मद्देनजर25हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया गया था।राज्य सरकार ने एकलपीठ के इस फैसले को खंडपीठ में चुनौती दी थी।
चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश
खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा और चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।
पुलिसकर्मियों के मनोबल पर अदालत की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिसकर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु होने पर उनके परिजनों को आर्थिक सहायता देने के मामलों में सरकार को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि पुलिस बल का मनोबल बनाए रखने के लिए मृत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को नियमानुसार सहायता मिलनी चाहिए।
इस फैसले से ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के परिजनों को अनुग्रह राशि देने से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी संदेश गया है। हालांकि,प्रत्येक मामले में सहायता की पात्रता संबंधित नियमों और परिस्थितियों के आधार पर तय होगी।
पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट

