बिहार विधान परिषद में नियुक्तियों को लेकर शुक्रवार को एक बार फिर मामला गरमा गया। नवनियुक्त करीब 100 कर्मचारियों ने विधान परिषद के मुख्य गेट पर जमकर हंगामा किया। ये सभी कर्मचारी जल्द से जल्द योगदान कराने की मांग कर रहे थे। हालांकि, विधान परिषद परिसर में प्रवेश करने से उन्हें रोक दिया गया। स्थिति को देखते हुए परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।जानकारी के अनुसार, नवनियुक्त कर्मचारियों में सात निजी सहायक (आशुलिपिक), करीब 56 सुरक्षा प्रहरी और 33 डेटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं। इन सभी का योगदान नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं के कारण फिलहाल रोक दिया गया है। कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता और कौशल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों ने पिछले दो से तीन महीने तक विधान परिषद में काम किया था। लेकिन शुक्रवार को अचानक उन्हें कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी विधान परिषद के गेट पर जमा हो गए और अपनी जॉइनिंग की मांग करने लगे।वहीं, निजी सहायकों के सात पदों पर हुई नियुक्तियों को लेकर भी जांच चल रही है। ये नियुक्तियां पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में हुई थीं। चयनित सात निजी सहायकों की शॉर्टहैंड दक्षता की जांच के लिए चार नवंबर को परीक्षा आयोजित की गई थी, लेकिन कोई भी अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुआ।
इसके बाद परिषद सचिवालय ने सभी सात अभ्यर्थियों को एक और मौका देने का निर्णय लिया है। अब 18 नवंबर को दोबारा शॉर्टहैंड परीक्षा आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थियों को स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित परीक्षा में शामिल नहीं होने पर उनकी उम्मीदवारी समाप्त की जा सकती है।फिलहाल विधान परिषद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। नियुक्तियों की जांच और योगदान पर रोक के बीच कर्मचारियों का विरोध जारी है।
पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
