बिहार विधान परिषद में विभिन्न पदों पर हुई नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में सीएस डेटामाशन रिसर्च सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (CS Datamation Research Services Pvt. Ltd.) को जिम्मेदारी सौंपे जाने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संवेदनशील परीक्षा और चयन प्रक्रिया का जिम्मा ऐसी एजेंसी को दिया गया, जिसके पुराने रिकॉर्ड और कार्यप्रणाली पर पहले से सवाल रहे हैं। इस मामले ने विधान परिषद की भर्ती व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।विवाद के बीच निजी सहायक यानी पर्सनल असिस्टेंट के सात चयनित अभ्यर्थियों की शॉर्टहैंड दक्षता जांच परीक्षा भी चर्चा में है। इन अभ्यर्थियों को 4 नवंबर को परीक्षा में शामिल होना था, लेकिन निर्धारित तिथि पर एक भी अभ्यर्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचा। इसके बाद परिषद सचिवालय ने उन्हें दोबारा मौका देने का फैसला किया है।

अब सातों अभ्यर्थियों की शॉर्टहैंड जांच परीक्षा 18 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस बार परीक्षा में शामिल नहीं होने वाले अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी समाप्त की जा सकती है और उनकी नौकरी पर भी संकट आ सकता है।वहीं, भर्ती में अनियमितताओं की आशंका के मद्देनजर 100 से अधिक नवचयनित कर्मियों के विधान परिषद परिसर में प्रवेश पर रोक लगाए जाने की खबर है। विभिन्न पदों पर हुई नियुक्तियों की जांच भी की जा रही है। इससे करीब 125 नवचयनित कर्मचारियों की नौकरी पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।फिलहाल पूरे मामले में एजेंसी की भूमिका, चयन प्रक्रिया और नियुक्तियों से जुड़े सवालों की जांच अहम है। परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर 18 नवंबर की परीक्षा से संबंधित सूचना जारी की गई है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही भर्ती विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट